बालासाहेब का व्यक्तित्व चहारदीवारी का नहीं -उद्धव ठाकरे

‘ठाकरे’ फिल्म को लेकर जो प्रतिसाद की अपेक्षा है, वह चहारदीवारी में नहीं मिल सकता। बालासाहेब का व्यक्तित्व चहारदीवारी का नहीं बल्कि मैदानवाला था। इन शब्दों में शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने विचार व्यक्त किए। फिल्म के गीतों की सराहना करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि इन गीतों को शिवसेना भवन में भी सुना था। तभी मैंने कहा था कि ‘ठाकरे’ फिल्म का संगीत इतिहास रचेगा। स्टूडियो में जब इसकी रिकॉर्डिंग शुरू थी, तब पूरा माहौल भावुक हो उठा था। मुझे मर्यादाओं का पालन करना होता है नहीं तो उस भावनात्मक माहौल में मैं भी नाच उठा होता। गायक नकाश अजीज भी दिल से इन गीतों को गा रहे थे। जब सुर, ताल, लय एक साथ आते हैं, तब उससे भावनाएं व्यक्त होती हैं। इन गीतों से उसी तरह की भावनाएं व्यक्त हुई हैं। कल बांद्रा स्थित ताज लैंड्स एंड में ‘ठाकरे’ फिल्म की म्युजिक लांचिंग हुई, इस दौरान उन्होंने उक्त उद्गार व्यक्त किए।