बालासाहेब का व्यक्तित्व ‘लार्जन दैन लाइफ’ था-नवाजुद्दीन

अभिनेता के रूप में बड़े पर्दे पर आज तक मैंने विभिन्न भूमिकाएं निभाई हैं परंतु ‘ठाकरे’ बायोपिक में बालासाहेब की भूमिका निभाना मेरे अभिनय की कसौटी थी। मेरे अब तक के कामों में यह सबसे चुनौतीपूर्ण भूमिका थी, ऐसी भावना अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने इस फिल्म के संदर्भ में दिए गए साक्षात्कार में व्यक्त की। हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख श्री बालासाहेब ठाकरे के जीवन पर आधारित ‘ठाकरे’ फिल्म २५ जनवरी को प्रसारित होगी। इस फिल्म में अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी बालासाहेब की भूमिका निभा रहे हैं।
ठाकरे के संपूर्ण जीवन के संबंध में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि बालासाहेब का व्यक्तित्व ‘लार्जन दैन लाइफ’ था। उनकी भूमिका के विषय में निर्माता संजय राऊत ने मुझसे पूछा तो शुरुआत में मुझे विश्वास नहीं हुआ। यह भूमिका मिलने पर आनंद तो था पर दूसरी तरफ इसे निभाने की चुनौती भी थी। निर्माता संजय राऊत और निर्देशक अभिजीत पानसे ने मुझ पर जो विश्वास दिखाया, इससे मैं हताश नहीं हुआ। इस भूमिका को निभाते समय उन लोगों ने बालासाहेब के बारे में छोटी सी छोटी बातें भी बतार्इं। भूमिका निभाने में उन लोगों की काफी मदद मिली। फिल्म के ट्रेलर में नवाजुद्दीन सिद्दीकी का लुक हूबहू बालासाहेब जैसा दिख रहा है। इसका पूरा श्रेय मैं मेक-अप आर्टिस्टों को देता हूं। भाषण देते समय बीच में बालों पर हाथ फेरने, व्यंग्य चित्र बनाते समय ब्रश पकड़ने की विशिष्ट शैली आदि मेरे लिए चुनौती थीं। इसका अभ्यास करने के लिए फिल्म की शूटिंग से पहले मैंने बालासाहेब के भाषणों की क्लिप भी देखी। बासासाहेब का व्यक्तित्व ऊंचा था। उन तक पहुंचना किसी के लिए भी संभव नहीं है। इस फिल्म में कलाकार के रूप में उनकी भूमिका को न्याय देने की मैंने पूरी कोशिश की है।

पिक्चर अभी बाकी है!
फिल्म ‘ठाकरे’ के टीजर, ट्रेलर के बाद गानों को लोगों का खूब प्यार मिल रहा है। वर्तमान में देश-विदेश में फिल्म ‘ठाकरे’ की ही हवा चल रही है। इस फिल्म को देखने के लिए लोगों की उत्सुकता चरम पर है। ट्रेलर देख हमें अलग ही ऊर्जा मिलने की भावना कई लोगों ने व्यक्त की। ‘ट्रेलर तो सिर्फ एक छोटी-सी झलक है… पिक्चर अभी बाकी है।’ ऐसा अभिनेता नवाजुद्दीन ने कहा। उन्होंने यह भी कहा कि यह फिल्म लोगों के दिलों पर राज करेगी।
बालासाहेब हैं महाराष्ट्र के बाघ
बालासाहेब ठाकरे महराष्ट्र के बाघ हैं। वे निडर, हाजिर-जवाब और पारदर्शी स्वभाव के थे। उनके सच्चेपन पर लोग फिदा थे। वो देशभक्त थे इसी के साथ वे राज्य को भी बड़ा प्यार करते थे इसलिए वे हमेशा ‘जय हिंद, जय महाराष्ट्र’ बोलते थे। भूमिपुत्रों को न्याय और उनका हक दिलाने के लिए वे जिंदगी भर लड़े। भूमिपुत्रों को नौकरी के बजाय व्यापार में उतरने के लिए प्रोत्साहित करते थे। एक पिता की तरह उन्होंने महाराष्ट्र का खयाल रखा। उनका योगदान महाराष्ट्र कभी भूल नहीं सकता, ऐसा नवाजुद्दीन ने कहा।
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