" /> बाली उमर का ‘प्यार’!, पुलिस के लिए बना सिरदर्द

बाली उमर का ‘प्यार’!, पुलिस के लिए बना सिरदर्द

यूपी के गोरखपुर जिले में कच्ची उम्र का प्रेम घरवालों के लिए जिल्लत तो पुलिस के लिए नई मुसीबत साबित हो रहा है। बीते एक माह में पुलिस तक १९ मामले ऐसे पहुंचे हैं, जिनमें किशोरवय लड़के-लड़की का लगाव दो परिवारों में अलगाव की बड़ी वजह बन गया।
पुलिस ने इन मामलों में किशोरी को बहला फुसलाकर भगाने के आरोप में केस दर्ज किया। पुलिस जांच में जुटी और किशोरी की बरामदगी हुई तो मामला कुछ अलग निकल गया। पूछताछ में बेटी की रजामंदी का कड़वा सच सामने आया तो खुद को बेबस मानकर कुछ अभिभावक तो यहां तक कह बैठे कि इसे तो कुछ दिन हवालात में ही रखो दरोगा जी। पुलिस की समस्या अलग है। यदि इन मामलों में किशोरी की बरामदगी नहीं हो पाती तो उस पर सवाल उठने लगते हैं। आरोपी से मिलीभगत के आरोप लगते हैं। मामला अफसरों तक पहुंचता है तो उनकी नाराजगी भी झेलनी पड़ती है। पुलिस के मुताबिक किशोरियों को बहला-फुसलाकर भगाने के मामलों के पीछे कहीं अशिक्षा तो कहीं खुद को आधुनिक साबित करने की होड़ प्रमुख वजह है। मनोवैज्ञानिक इसे पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण का प्रभाव बताते हैं। दोनों का ही मानना है कि फिल्म, टीवी के बाद सोशल मीडिया के विविध आयाम की पहुंच हर घर तक है। जीवकोपार्जन की उलझन में अभिभावक बच्चों को पूरा समय नहीं दे पाते। ऐसे में किशोर-किशोरियां इस तरह के मामलों में पड़ जाते हैं।