बाल ने बदली किस्मत!

अनवर अली के साथ ‘पैराडाइज’ में रहने के दौरान ही अमिताभ बच्चन की दोस्ती माया नाम की एक लड़की से हो गई थी। माना जाता है कि माया अमिताभ की पहली गर्लफ्रेंड थी और वह ब्रिटिश एयरवेज में नौकरी करती थी। माया स्टाइल से ‘टामब्वॉय टाइप’ लड़की थी और उसका गुस्सा हमेशा नाक पर रखा रहता था। माया जब भी अमिताभ से मिलती तो अक्सर झगड़ा करती थी और अमिताभ डिस्टर्ब हो जाते थे। यह देखकर एक दिन अनवर अली ने ही अमिताभ को सलाह दी कि अगर वे माया के चक्कर में पड़े रहे तो पूरे मन से काम नहीं कर पाएंगे और अपने लक्ष्य को पाने के लिए लटक जाएंगे। अच्छा होगा कि वे माया से अपना पीछा छुड़ा लें। अमिताभ को अनवर अली की यह सलाह ठीक लगी और उन्होंने माया के साथ अपने संबंध तोड़ लिए।
१९७१ में अमिताभ बच्चन की तीन फिल्में ‘परवाना’, ‘प्यार की कहानी’ और ‘रेशमा और शेरा’ प्रदर्शित हुर्इं और तीनों ही फिल्में असफल साबित हुर्इं। किंतु ‘आनंद’ की तरह ‘रेशमा और शेरा’ में छोटी-सी गूंगे आदमी की भूमिका में भी अमिताभ के अभिनय की प्रशंसा हुई। यह भी एक दुखदायी घटना थी कि अमिताभ की जो आकर्षक और बुलंद आवाज इस अभिनेता की शक्ति थी, गूंगे का पात्र देकर उसी शक्ति को शक्तिहीन कर दिया गया था। यह अमिताभ की प्रतिमा का पर्दे पर प्रत्यक्ष प्रमाण था कि आवाज न होने के बावजूद अमिताभ ने अभिनय से उस गूंगे पात्र को जुबान दे दी थी।
‘रेशमा और शेरा’ की आउटडोर शूटिंग पर राजस्थान में अमिताभ के साथ एक और लोमहर्षक घटना घटी थी। इस लंबी शूटिंग पर कलाकारों और यूनिट के लोगों के बाल काटने के लिए फिल्म जगत के नामचीन हेयर ड्रेसर हकीम कैरानवी को बुला लिया गया था। अमिताभ को जब मालूम पड़ा कि हकीम सभी बड़े सितारों के बालों का स्टाइल बनाता है और विशेषज्ञ है तो एक दिन अपने बाल कटवाते समय अमिताभ ने भी हकीम से कहा कि आउटडोर शूटिंग के बाद हकीम मुंबई में उनके बालों को भी स्टाइल दे। इस तरह मुंबई आकर हकीम ने अमिताभ के बालों का पुराना स्टाइल एकदम बदलकर नया स्टाइल दिया। दाएं-बाएं रहनेवाले बालों को उल्टा करके पीछे की ओर घुमाया और कानों के बीच कलम के बालों को लंबा करके इतना नीचे तक बढ़ा दिया कि अमिताभ के गालों में पिचके हुए गड्ढे उन बालों में छुप गए। साथ ही हकीम ने गर्दन के नीचे पीछे की ओर के बालों को भी बढ़ा दिया और अमिताभ का यह हेयर स्टाइल इस कदर लोकप्रिय हुआ कि एक-एक कर फिल्म जगत के सारे कलाकारों ने अपने बाल बढ़ा लिए। इनमें राजेश खन्ना जैसा वह कलाकार भी था जिसने कभी अमिताभ बच्चन से हाथ मिलाना तक गवारा नहीं किया था, आज वही राजेश खन्ना अमिताभ के हेयर स्टाइल की नकल करने पर विवश थे। सुपर स्टार का यह हेयर स्टाइल सिर्फ फिल्म जगत में नहीं बल्कि सारे देश में लोकप्रिय हो गया था, जिसे देखो बाल बढ़ाए नजर आता था।
१९७१ में प्रदर्शित तीनों फिल्मों की असफलता के बावजूद अमिताभ के अश्वमेघ की महायात्रा का रथ थमा नहीं था। ‘आनंद’ में अमिताभ को मिली प्रशंसा और प्रोत्साहन से महमूद को भी विश्वास हो गया था कि इस अभिनेता को एक दिन सफलता का सिंहासन जरूर मिलेगा इसीलिए वे लगातार अपने मित्र निर्माताओं से अमिताभ को लेने की सिफारिशें कर रहे थे।
एक दिन महमूद ने निर्माता प्रमोद चक्रवर्ती से कहा कि वे अपनी अगली फिल्म में अमिताभ बच्चन को लें। महमूद को मालूम था कि प्रमोद चक्रवर्ती की फिल्म ‘तुमसे अच्छा कौन है’ सफल हो गई है और वे नई फिल्म शुरू करने जा रहे हैं। किंतु प्रमोद चक्रवर्ती ने महमूद से कहा कि वे अगली नई फिल्म ‘जुगनू’ के लिए धर्मेंद्र को अनुबंधित कर चुके हैं। इसके बावजूद महमूद और प्रमोद चक्रवर्ती की मित्रता इतनी अच्छी थी कि महमूद अगले ही दिन अमिताभ को लेकर प्रमोद चक्रवर्ती के ऑफिस में पहुंच गए और कहा कि वे अमिताभ को अपनी किसी भी नई आगामी फिल्म का ‘कन्फर्मेशन लेटर’ दे दें। महमूद के इस दबाव और मित्रता के कारण प्रमोद चक्रवर्ती ने अमिताभ को लेटर और पांच हजार रुपए साइनिंग एमाउंट तो दे दिया लेकिन अमिताभ को साफ-साफ यह भी बता दिया कि वे लेटर जरूर दे रहे हैं लेकिन यह कोई पक्की बात नहीं है कि वे अमिताभ को लेकर कोई फिल्म बनाएंगे ही। किंतु अमिताभ के लिए तो उस समय प्रमोद चक्रवर्ती जैसे बड़े निर्माता की फिल्म साइन करने का लेटर ही बहुत था। उसी दिन यह फिल्म साइन करने की खबर पूरे फिल्म जगत में पैâल गई थी और उसका गहरा असर भी हुआ था। यह बात और थी कि फिल्म संसार के बड़े और दिग्गज निर्माता-निर्देशक अभी भी अमितााभ बच्चन की सफलता की प्रतीक्षा कर रहे थे और अमिताभ के संघर्ष की तपती सड़क अधिक गर्म और कठोर होती जा रही थी।
‘बॉम्बे टू गोवा’ का सुहाना सफर
यह वह दौर था जब महमूद के प्रेम संबंध अरुणा ईरानी के साथ बहुत गहरे हो चुके थे। विवाहित होने और बच्चों के पिता होने के बाद भी महमूद अरुणा ईरानी को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बना चुके थे और अब अपनी किसी फिल्म में अरुणा को हीरोइन बनाना चाहते थे। क्योंकि अरुणा ईरानी एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री और कुशल नृत्यांगना होने के बावजूद हीरोइन के रूप में नहीं आई थी। इस तरह अरुणा को हीरोइन बनाने के इरादे से महमूद ने निर्माता एन.सी. सिप्पी के साथ ‘बॉम्बे टू गोवा’ पार्टनरशिप में बनाने की योजना बनाई और हीरो के रूप में अमिताभ बच्चन को पचास हजार रुपए के पारिश्रमिक पर अनुबंधित किया गया। निर्माता सिप्पी के दोस्तों और यूनिट के लोगों ने अमिताभ को हीरो के रूप में लेने का विरोध किया और उस समय के उभर रहे स्टार जितेंद्र को लेने की सलाह दी। किंतु महमूद ने किसी की एक न सुनी क्योंकि यह सच सिर्फ महमूद जानते थे कि अरुणा ईरानी के साथ हीरो के रूप में कोई भी नामचीन अभिनेता काम नहीं करेगा। शायद जितेंद्र भी नहीं करते।
‘बॉम्बे टू गोवा’ की शूटिंग के लिए आउटडोर में सेट लगाया गया था और कलाकारों को एक होटल में ठहराया गया था। पहले दिन अमिताभ को शूटिंग पर डांस करना था और नामचीन मास्टर पी.एल. राज इस डांस को डायरेक्ट कर रहे थे। अमिताभ डांस के मामले में थोड़ा घबराए हुए थे और मास्टर पी.एल. राज के रिहर्सल कराने के बाद भी सही स्टेप नहीं ले पा रहे थे। यह एक दुखद संयोग ही था कि अचानक अमिताभ ज्वर से पीड़ित हो गए और महमूद को उस दिन शूटिंग वैंâसिल करनी पड़ी। उसी शाम महमूद अमिताभ का हाल-चाल जानने के लिए होटल के कमरे में पहुंचे तो अमिताभ महमूद को देखते ही फफक कर रो पड़े और रोते हुए बोले- ‘मैं डांस नहीं कर सकता।’ तब महमूद ने अमितााभ को दिलासा दी और हिम्मत बंधाते हुए पूछा- ‘अच्छा यह बताओ, कल होटल से सेट पर शूटिंग के लिए वैâसे आओगे?’
‘कार से।’ अमिताभ ने जवाब दिया।
‘और कार से उतर कर सेट तक…?’ महमूद ने पूछा।
‘चलकर…’ अमिताभ ने जवाब दिया।
अमिताभ का यह जवाब मिलते ही महमूद ने कहा- ‘जो आदमी अपने दो पांवों पर चल सकता है वह डांस भी कर सकता है। हौसला रखो। कल तुम ऐसा डांस करोगे कि दुनिया देखेगी।’
इस प्रकार अमिताभ को हौसला बंधाकर महमूद चले गए। दूसरे दिन सेट पर अमिताभ के आने से पहले ही महमूद ने यूनिट के हर सदस्य को चेता दिया कि अमिताभ जैसे ही डांस का पहला शॉट करेंगे, सब लोगों को प्रशंसा में तालियां बजानी हैं। यह महमूद का कलाकार से काम लेने का अपना अंदाज था।
‘बॉम्बे टू गोवा’ नियत समय में पूरी हो गई और फिल्म के ट्रायल शोज में अमिताभ के काम की तारीफें होने लगीं। यह वह समय था जब लेखक सलीम-जावेद ने ‘जंजीर’ की स्क्रिप्ट पूरी कर ली और बेचने के लिए निर्माताओं को सुना रहे थे। तब प्रकाश मेहरा ने एक फिल्म ‘समाधि’ की कहानी धर्मेंद्र को सुनाई और फिल्म में काम करने का प्रस्ताव किया। धर्मेंद्र ने प्रकाश मेहरा से कहा कि उनके पास ‘जंजीर’ की कहानी है जो उन्होंने सलीम-जावेद से खरीदी है, प्रकाश मेहरा ‘जंजीर’ की कहानी ले लें और बदले में ‘समाधि’ की कहानी धर्मेंद्र को दे दें। प्रकाश मेहरा मान गए और ‘समाधि’ की कहानी धर्मेंद्र को देकर ‘जंजीर’ की कहानी ले ली। जब धर्मेंद्र से ‘जंजीर’ में काम करने को कहा गया तो उन्होंने साफ मना कर दिया। धर्मेंद्र के बाद अभिनेता राज कुमार से बात की गई तो कहानी सुनकर राजकुमार की समझ में कुछ नहीं आया। इसके बाद देव आनंद को ‘जंजीर’ की कहानी सुनाई गई। देव आनंद ने पूरी कहानी बहुत गंभीरतापूर्वक और ध्यान से सुनी और कहानी की खूब प्रशंसा भी की लेकिन फिल्म में काम करने से इंकार कर दिया। एक साल तक फिल्म की कहानी इसी तरह इधर से उधर घूमती रही और हीरो की तलाश में प्रकाश मेहरा परेशान हाते रहे। इसी बीच लेखक जावेद ने ‘बॉम्बे टू गोवा’ एक ट्रायल शो में देखी तो उन्हें फिल्म और अमिताभ बच्चन दोनों पसंद आए। जावेद ने पांच बार ‘बॉम्बे टू गोवा’ देखी और महसूस किया कि ‘जंजीर’ के हीरो की भूमिका में अमिताभ बच्चन एकदम सही बैठते हैं। तब जावेद ने प्रकाश मेहरा को भी ‘बॉम्बे टू गोवा’ दिखाई और प्रकाश मेहरा ने अमिताभ को ‘जंजीर’ के लिए अनुबंधित कर लिया।