बाहर की ट्रेनों में घर का एहसास

लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्री सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए रेलवे निरंतर कोई न कोई प्रयोग कर रही है। यात्रियों के आरामदायक सफर के लिए रेलवे उत्कृष्ट योजना के तहत रेल यात्रियों को घर का एहसास देने में जुटी है।
पश्चिम रेलवे इन दिनों बाहर की ट्रेनों के कायाकल्प में जुटी है। ट्रेनों के कोच में यात्रियों के घुसते ही उन्हें घर जैसा एहसास हो इसलिए रेलवे कोचों के अंदर घर जैसा लुक जबकि बाहर से पीले और लाल रंग को मिलाकर एक नया लुक दे रही है। इसी तरह का जरा हटके दिखनेवाला लुक आपको जयपुर एक्सप्रेस में देखने को मिलेगा। पश्चिम रेलवे मुंबई सेंट्रल स्थित कोच केअर डेपो के अधिकारी और कर्मचारी इन दिनों बाहर की ट्रेनों को नया लुक देने में लगे हैं। उत्कृष्ट योजना के तहत १२९५५ जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस को कल पश्चिम रेलवे ने एक नए लुक के साथ यात्री सेवा में शामिल किया। २३ डिब्बे की जयपुर सुपर फास्ट ट्रेन के भीतरी भाग के कोच को विनाइल रैपिंग किया गया था, जिससे कोच के भीतर यात्रियों को घर जैसा एहसास होगा। इतना ही नहीं टॉयलेट में भी नई सुविधाएं दी गई हैं। आईसीएफ के इस कोच में पुराने वॉश बेसिन की जगह एलएचबी कोच के वॉश बेसिन लगाए गए हैं। ट्रेनों के टॉयलेट में अक्सर रेलवे ने जगुआर के नल लगाकर यात्रियों को हाई क्लास की सुविधा देने की कोशिश की है लेकिन लगातार हो रही चोरी की घटनाओं को देखते हुए इस बार प्लास्टिक के नल लगाने को रेलवे मजबूर है। पहले टॉयलेट का फ्लश दबाने पर ही पानी निकलता था लेकिन अब दो चरणों मे टॉयलेट का वॉल फ्लश होगा। पहले स्टेज में फ्लश करने पर १.५ लीटर पानी और दूसरे स्टेज में ४.५ लीटर पानी फ्लश होगा, जिससे टॉयलेट के अंदर गंदगी नहीं रह पाएगी। इसके अलावा इस ट्रेन में टॉयलेट डिस्पेंसर मशीन, अग्निरोधी यंत्र आदि सुविधाएं उत्कृष्ट योजना के तहत जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन में दी गई हैं। मुंबई सेंट्रल कोच केअर डिपो के मुख्य कोच अधिकारी अरुण सिंह ने बताया कि उत्कृष्ट योजना के तहत हम प्रायोगिक तौर पर ट्रेनों को नया लुक देने में लगे हैं ताकि यात्रियों को रेलवे अपनी लगे। हम यात्रियों को सफर के दौरान सुखद अनुभव देना चाहते हैं और इसी कड़ी में हम जुटे हैं। सिंह के अनुसार पहले चरण के तहत २० रेक और दूसरे चरण के तहत ३८ रेकों का कायाकल्प किया जाएगा।