बिलबिला रहे हैं, बालाकोट के बदमाश, 45 आतंकी अभी भी अस्पताल में

पुलवामा में आतंकी हमले के बाद हिंदुस्थान ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक की थी जिसमें कई आतंकी मारे गए थे। तब विपक्ष ने इसके सबूत मांगे थे। अब बालाकोट में हुए एयर स्ट्राइक को लेकर इटली के एक पत्रकार ने बड़ा खुलासा किया है। पत्रकार फ्रेंसेसा मैरिनो ने ‘स्ट्रिंगरएशिया’ में इस घटना का पूरा विवरण छापकर सबको हैरान कर दिया है। मैरिनो ने लिखा है ‘बालाकोट हमले में घायल कई आतंकी अभी भी अस्तपाल में इलाज करा रहे हैं।’ मैरिनो के खुलासे से यह साफ हो गया है कि बालाकोट के कई बदमाश अभी भी बिलबिला रहे हैं और जिंदगी-मौत के बीच झूल रहे हैं। करीब २० बदमाश की इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो चुकी है।

बालाकोट में हुए एयर स्ट्राइक में जैश के कई आतंकी मारे गए थे। उनमें से कई घायलों का इलाज आर्मी अस्पताल में किया जा रहा है। इनमें से कई शैतान ठीक हो चुके हैं पर उन्हें पाकिस्तानी सेना ने अपने कब्जे में ले रखा है। इस बात का खुलासा एक इटैलियन पत्रकार  फ्रेंसेसा मैरिनो ने किया है।

बालाकोट हमले के बाद जब पाकिस्तानी सेना ने जैश के कैंप पर एयर स्ट्राइक को नकार दिया था तब मैरिनो ने ही खबर ब्रेक की थी कि वहां कैंप पर हुए हमले में बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए थे। अपने ताजा खुलासे में मैरिनो ने लिखा कि ‘सेना की टुकड़ी हमले के दिन सुबह ६ बजे घटनास्थल पर पहुंची। शिंकयारी बालाकोट से २० किलोमीटर दूर है और यह पाकिस्तान आर्मी का बेस कैंप भी है। इस जगह पर पाकिस्तानी सेना की जूनियर लीडर्स एकेडमी भी है। आर्मी की टुकड़ी के बालाकोट पहुंचते ही वहां से कई जख्मी लोगों को पाकिस्तान आर्मी के अस्पताल पहुंचाया गया। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक आर्मी कैंप के अस्पताल में अभी भी तकरीबन ४५ लोगों का इलाज चल रहा है। इलाज के दौरान २० लोगों की मौत हो चुकी है।’
इटैलियन पत्रकार के अनुसार ‘इलाज के बाद जो लोग स्वस्थ हो गए हैं उन्हें पाकिस्तान आर्मी ने अपनी कस्टडी में रखा है और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किया गया है। कई हफ्तों में छानबीन कर अपने सोर्स के माध्यम से जो जानकारी मैंने जुटाई है, उसके मुताबिक कहा जा सकता है कि हमले में जैश के कई वैâडर मारे गए हैं। मृतकों की संख्या १३० से १७० तक हो सकती है। इसमें वे लोग भी हैं जिनकी मौत इलाज के दौरान हुई है।’

इटैलियन पत्रकार मैरिनो ने आगे लिखा, ‘जो कैडर (आतंकी) मारे गए, उनमें ११ ट्रेनर भी हैं। मृतकों में कुछ बम बनाने और हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने वाले भी लोग हैं। जिन परिवारों के लोग इस हमले में मारे गए, उनकी ओर से कोई जानकारी बाहर लीक न हो, इसके लिए भी ‘जैश’ ने पूरे बंदोबस्त किए। मृतकों के घर जाकर जैश के आतंकियों ने मुआवजा तक दिया।’

गौरतलब है कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनवा प्रांत के बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े आतंकी शिविर पर भारतीय वायुसेना की ओर से किए गए हमले की योजना बनाने में २०० घंटे से ज्यादा का वक्त लगा था। हिंदुस्थान में किसी भी जगह पर दूसरे फिदायीन हमले से जुड़ी खुफिया जानकारी के बाद इस हमले की तैयारी शुरू हुई थी। पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले के महज २ दिनों बाद सरकार को खुफिया जानकारी मिली थी। सूत्र ने बताया कि खुफिया जानकारी में हिंदुस्थान के किसी भी हिस्से में अन्य आत्मघाती हमले के बारे में चेतावनी दी गई थी, जिसके पुलवामा की तुलना में ज्यादा बड़ा होने की बात कही गई थी। जानकारी मिलने के तुरंत बाद सरकार के आला अधिकारियों और संबंधित मंत्रियों, सेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुखों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बीच सिलसिलेवार बैठकें हुईं ताकि जैश आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।