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बिहार में नया खिलाड़ी!

यह चित्र पिछले साल ३ जून का है। नुकीली मूंछोंवाले सज्जन हैं भारतीय आईआरएस (सीमा शुल्क एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क) अधिकारी संगठन के तत्कालीन अध्यक्ष अनूप श्रीवास्तव। नई-नई वित्तमंत्री बनीं निर्मला सीतारमण का स्वागत करते हुए उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि १५ दिन बाद उनको भी उन १५ अफसरों के साथ जबरन रिटायरमेंट का नोटिस थमा दिया जाएगा। नियम ५६ के तहत सभी अफसरों पर भ्रष्टाचार से घिरे होने के आरोपों में कार्रवाई की गई थी। तब अनूप श्रीवास्तव ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को गलत ठहराते हुए कहा था कि भ्रष्टाचार के आरोपों पर अदालत से उन्हें बरी किया जा चुका है। नियम ५६ का इस्तेमाल नकारा और भ्रष्ट अफसरों को सेवा से बाहर करने के लिए किया जाता है। अब यही अनूप श्रीवास्तव ‘राष्ट्रवादी विकास पार्टी’ के नाम से नया राजनीतिक दल बनाकर इस वर्ष होने वाले बिहार विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारेंगे। रविवार को पटना में इस बाबत औपचारिक घोषणा करते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि यह समाज में सामाजिक सौहार्द और समग्र विकास लाने का एक प्रयास है। यह राजनीतिक संगठन अलग तरह का होगा। यह ओछी राजनीति नहीं करेगा बल्कि समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए काम करेगा। हम अपने युवाओं के लिए बेहतर शिक्षा और नौकरी सुनिश्चित करना चाहते हैं। पार्टी ने बिहार में सभी २४३ सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। भारत निर्वाचन आयोग में पार्टी का पंजीकरण जल्द से जल्द कराने के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। सवाल यह है कि भ्रष्ट आचरण के कारण सेवाच्युत किए गए इस पूर्व नौकरशाह पर जनता कितना भरोसा करेगी, यह भविष्य ही तय करेगा।
जुगाड़ी जुम्मन!
जुगाड़प्रधान देश में क्या नहीं किया जा सकता। प्रतिभाओं की कमी नहीं है। नवादा (बिहार) में रामनगर के ऑटो मेवैâनिक जुम्मन उर्फ अवधेश कुमार ने एक ऐसे जोरदार आवाज करनेवाले जुगाड़ यंत्र का आविष्कार किया है, जिससे टिड्डियों को भगाने में काफी मदद मिल सकती है। लगभग २० दिन की मेहनत से बने इस यंत्र में इन्होंने एक फ्यूल कम्प्रेशन बॉक्स, स्पार्क प्लग, बैट्री, पेट्रोल टैंक, लाउडस्पीकर, टोन रिले समेत बेहद आसानी से मिलनेवाले सामानों का इस्तेमाल किया है। इस यंत्र का मुख्य कार्य तेज आवाज पैदा करना है, जो फ्यूल कंप्रेसर बॉक्स के जरिए किया गया है। इस फ्यूल कंप्रेसर बॉक्स में सिंगल बैरल सिलिंडर लगा हुआ है, जिसमें तीन छेद किए गए हैं। पहले छेद में ईंधन और हवा का मिश्रण जाता है, दूसरे में उस मिश्रण को जलाने के लिए स्पार्क प्लग का इस्तेमाल किया जाता है जबकि तीसरे छेद से उस मिश्रित ईंधन का धुआं बाहर निकलता है और जोरदार आवाज पैदा करता है। लाउडस्पीकर निकलने वाली उस आवाज को दूर तक पहुंचाने का कार्य करता है। एक लीटर पेट्रोल में यह यंत्र लगभग तीन घंटे तक काम करता है। फिलहाल उन्होंने टिड्डियों के भगाने के लिए इसका निर्माण किया है। मगर अलग-अलग टोन रिले का इस्तेमाल कर यह यंत्र अलग-अलग जंगली जानवरों को भगाने में मददगार साबित होगा। इसे बनाने में इन्होंने कबाड़ का इस्तेमाल किया है। हालांकि इनके अनुसार अगर सभी सामानों को बाजार से खरीद कर बनाया जाए तो इस पर १० से १२ हजार की लागत आएगी। इससे पहले जुम्मन ऑटो स्विच ऑफ पानी टंकी अलार्म, रेलवे के ऑटोमैटिक फाटक का खुलना और बंद होना और पुलिस व पत्रकारों के लिए लाभप्रद कोरोना हेलमेट बना चुके हैं।
आपदा में अवसर
आपदा में अवसर की तलाश कहीं दूर नहीं, अपने आस-पास ही करनी चाहिए। जैसा कि कोहिमा के लोगों ने किया। नागालैंड में १५ जुलाई तक लॉकडाउन को जारी रखा गया है। राजधानी कोहिमा सब्जियों के लिए दूर-दराज के गांव पर निर्भर है। लॉकडाउन के कारण पैदा हुई सब्जियों की मुसीबत को कोहिमा के लोगों ने अवसर बना दिया। अपने घर पर ही सब्जी उगाने लगे। वहां कई लोगों ने अपने घर के बगीचे का इस्तेमाल हरी सब्जियां उगाने के लिए किया और एक-दो महीने में ये लोग न केवल सब्जी उगाने लगे, बल्कि बाजार में बेचने भी लगे। ऐसा करने वाले कई युवा भी थे। २३ साल की निचुतुओनुओ य्होमे के छोटे से घरेलू बगीचे में कई तरह की सब्जियां लगी हुई हैं, जिसमें बांस भी शामिल है। इन बांस के डंडों पर कई तरह की बेल उग आई हैं। य्होमे की बहनें भी बागवानी में उसका साथ देती हैं। कोहिमा में ये बरसात का समय है और पहाड़ों पर मकई लगाई जा चुकी हैं। नागा समुदाय के लोग मुख्य रूप से किसान ही होते हैं लेकिन धीरे-धीरे खेती पीछे छूट गई। हालांकि कोरोना कालीन लॉकडाउन में लोग एक बार फिर से खेती की तरफ आगे बढ़े हैं।
सड़क पर संगीत
पंजाबी कार्यक्रमों में लाखों रुपए कमानेवाले पंजाबी लोक गायक कोरोना महामारी के चलते बेरोजगारी का शिकार हो चुके हैं। अपने घर का खर्चा चलाने के लिए कोई धान की फसल की बुवाई कर रहा है, कोई ई रिक्शा चला रहा है तो कोई सब्जियां बेच रहा है। जीत कोटली और उसकी पत्नी प्रीत कोटली भी पंजाब के लोक गायक हैं। दोनों कई गाने रिलीज भी कर चुके हैं। अमृतसर के एक गांव में रहनेवाला यह गायक जोड़ा पहले शादियों और मेलों में जाकर गाता था और उससे मिलनेवाले पैसे से अपना परिवार चलाता था। लेकिन लॉकडाउन के कारण शादी-ब्याह रुक गए और अब तो तारा भी डूब चुका है। शादियां दिसंबर तक नहीं होंगी। नतीजा यह है कि यह गायक जोड़ी सब्जी बेचकर अपना और अपने परिवार का पेट पालने को मजबूर है। हाल ही में इन्होंने लॉकडाउन के दौरान एक ऐसा गीत गाया जो कि आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है। भले ही यह लोग सब्जी बेच कर अपने परिवार का गुजारा कर रहे हैं, लेकिन जैसे ही इन्हें पता चला कि चीन द्वारा भारत के सैनिकों को शहीद कर दिया गया है तो इन्होंने गीत के जरिए देश के उन शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी और चीन को सीधी-सीधी चेतावनी भी दी। सब्जी बेचते हुए भी यह जोड़ी एक सामाजिक संदेश दे रही है। खुद प्रीत कोटली का कहना है कि भले ही लोग उसे एक गायिका के तौर पर जानते हों लेकिन वह स्टेज पर भी अपने पति के साथ गाना गाती थी और आज पति के साथ ही उसे सब्जी बेचने में भी किसी तरह की कोई शर्म नहीं है।