" /> बिहार में बाढ़ से तबाही! 73 लाख आबादी प्रभावित -10 लाख लोगों को मिल रहा भोजन

बिहार में बाढ़ से तबाही! 73 लाख आबादी प्रभावित -10 लाख लोगों को मिल रहा भोजन

-24 और पंचायत आए चपेट में

बिहार में बाढ़ ने 24 और पंचायतों को प्रभावित कर दिया है। इस तरह अब राज्य के 16 जिलों के 125 प्रखंडों की 1,223 पंचायतों की 73 लाख से अधिक आबादी बाढ़ की चपेट में आ गई है। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार की ओर से बाढ़ पीड़ितों के लिए बचाव एवं राहत कार्य चलाए जा रहे हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव रामचंद्रडु ने कहा है कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बचाव एवं राहत कार्य में लगी हुई हैं। पांच लाख आठ हजार लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया है। बाढ़ पीड़ितों को प्रतिदिन भोजन मुहैया कराने के लिए विभिन्न जिलों में 1,342 सामुदायिक किचेन चलाए जा रहे हैं। यहां पर प्रतिदिन नौ लाख 87 हजार लोगों को भोजन कराया जा रहा है।

नेपाल में बारिश थमने के बावजूद उत्तर बिहार के कुछ जिलों में बाढ़ का संकट बरकरार है। बागमती व बूढ़ी गंडक के अलावा कमला व अधवारा नदियों का जलस्तर कुछ जगहों पर लाल निशान के करीब या उससे ऊपर है। गंडक के जलस्तर में कमी आई है, लेकिन जिन इलाकों में इस नदी का पानी फैल चुका था, वहां के लोगों की अभी मुसीबत कम नहीं हुई है।

मुजफ्फरपुर के औराई, कटरा व गायघाट प्रखंड की पंचायतों में फैला बाढ़ का पानी कम तो हुआ है, लेकिन अभी पूरी तरह इलाके से उतरा नहीं है। इन प्रखंडों की कई पंचायतों में पानी अभी भी लगा हुआ है और लोगों की घर वापसी में अब भी देरी है। उधर, बूढ़ी गंडक के पानी से टूटे तिरहुत नहर का पानी अब भी पंचायतों में फैल रहा है। अब तक करीब दो दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। बाढ़ का पानी मुरौल से सकरा होते हुए मनियारी पंचायत के माध्यम से पातेपुर की ओर बढ़ रहा है, जबकि दूसरी तरफ टूटे बांध के कारण पानी मुशहरी की ओर बढ़ रहा है। वहीं पश्चिमी इलाके में बाया नदी का पानी पारू, सरैया व साहेबगंज में फैल ही रहा है। पीड़ितों के बीच राहत कार्य तेजी लायी गई है। सामुदायिक किचन से उन्हें खाना खिलाया जा रहा है।

अधवारा व कमला नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर 
उधर, दरभंगा में बागमती का जलस्तर बेनीबाद में खतरे के निशान के ऊपर बना हुआ है। जबकि अधवारा व कमला नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। जिले के पश्चिमी इलाके में बाढ़ की स्थिति यथावत है। मोहल्लों में अब भी पानी भरा है और लोगों को आने जाने में कठिनाई हो रही है। प्रभावित मोहल्ले के लोग छत पर शरण लिये हुए हैं। करकौली में टूट रहे बांध की मरम्मत हो जाने के कारण हवाई अड्डा से संकट टल गया है। लेकिन हनुमान नगर, सिंहवाड़ा, कुशेश्वरस्थान आदि जगहों में अब भी बाढ़ का पानी जमा है।
उधर, मोतिहारी में बूढ़ी गंडक का जलस्तर अब भी बढ़ ही रहा है। जबकि गंडक नदी के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गइ है। वाल्मीकिनगर बराज से गंडक में शनिवार को 1.51 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। पश्चिम चंपारण में भी स्थिति सुधर रही है।