बुजुर्गों का काल बन रही है आग, ४ घटना में एक दर्जन से ज्यादा मरे

मुंबई में लगातार घट रही आग लगने की घटनाएं बच्चों और बुजुर्गों का काल बन रही हैं। आग लगने की पिछली ४ घटनाओं में एक दर्जन से ज्यादा बुजुर्ग काल के गाल में समा गए, जबकि लगभग इतने ही लोग जख्मी भी हुए। बताया जा रहा है कि ज्यादातर लोगों की मौत आग के वक्त धुएं से दम घुटने के कारण हुई है। उम्र ज्यादा होने के कारण ये लोग घटना स्थल से भागने व अपना बचाव करने में नाकाम हुए।
बता दें कि अंधेरी-पूर्व के मरोल स्थित ईएसआईएस (कामगार) अस्पताल में सोमवार को दोपहर में आग लग गई थी। इस आग में १७६ के करीब लोग घायल हुए थे जबकि अग्रीरेड्डी सर्वरेड्डी मिंट्टू (७८), आरती सुरेश कोठारकर (४८), तीर्थराज बोडाई गुप्ता (७०), आशाराम पंजाराम माथे (६८), मनीषा मोहन करंगुटकर (६३), चंद्रकांत दामोदर म्हात्रे (६३), बाबुभाई आबित खान (६५) सहित एक २ माह की बच्ची की मौत हो गई। इस आग में मरनेवालों में ६ बुजूर्ग सहित एक अधेड़ तथा एक दुधमुही बच्ची शामिल थी। लेकिन आग में बच्चों व बुजुर्गों की मौत की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले ३ दिसंबर को महालक्ष्मी में एसआरए इमारत में १२ नवंबर को अंधेरी के कदमवाड़ी एसआरए इमारत तथा २३ अगस्त को परेल के क्रिस्टल टॉवर अग्निकांड में भी बुजुर्गों की मौत हो चुकी है।