बुजुर्गों की शादी का `अनुबंध’

जीवन जीने के लिए हमेशा एक सहारे की जरूरत होती है वो भी तब जब आपकी उम्र ढलने लगती है। ढलती उम्र में पति और पत्नी ही एक-दूसरे का आधार बनते है लेकिन किसी कारणवश अगर एक दूसरे का साथ छूटता है तो फिर अकेले जिंदगी बोझ लगने लगती है। ऐसे कई बुजुर्गों को एक-दूसरे से मिलाने, शादी कराने और उनकी जिंदगी में खुशियां लौटाने व आधार प्रदान करने का काम `अनुबंध’ कर रहा है। मुंबई में उक्त फाउंडेशन रविवार को एक ऐसे ही सम्मेलन का आयोजन कर रहा है जहां ५० से अधिक उम्र के लोग अपना जीवनसाथी चुन सकते हैं।
बता दें कि २००१ में गुजरात में आए भूकंप ने न जाने कितने परिवार को तोड़ दिया था। उस दौरान कई बुजुर्ग ऐसे थे जिनके परिवार में कोई नहीं बचा था जिसमें पुरुषों व महिलाएं दोनों का समावेश था। जिसके बाद नटुभाई पटेल ने `अनुबंध फाउंडेशन’ नामक संस्था की शुरुआत की। इसके तहत शादी सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। सम्मलेन में बुजुर्ग एक-दूसरे से मिलते हैं और फिर तय करते हैं कि क्या वे एक-दूसरे का आधार बनेंगे पिछले १६ वर्ष में `अनुबंध’ ने देशभर में ५२ सम्मेलन आयोजित कर १४४ बुजुर्गों की शादियां करवाई हैं। मुंबई में भी दो सम्मेलन हुए जिसमें ५ शादियां हुई हैं। अनुबंध के सदस्य मिलन दोषी (५९) ने बताया कि ५३ की उम्र में उनकी पत्नी का बीमारी के चलते निधन हो गया था। मुझे फिर से शादी करने के लिए कहा जा रहा था लेकिन मैं तैयार नहीं था। माता-पिता भी काफी बूढ़े हो गए हैं, इसके बावजूद वे मेरे लिए गुजरात से मुंबई का चक्कर काटते थे। इसके बाद मुझे उक्त सम्मेलन के बारे में पता चला और मैंने शादी का निर्णय लिया। मुझे और मेरी पत्नी को एक-दूसरे का आधार मिला और माता-पिता को हमारा। इसके बाद से मैंने भी `अनुबंध’ से जुड़ने और लोगों की मदद करने की ठान ली। हम अप्रâीका के एक ट्रस्ट की मदद से गरीब बुजुर्गों की शादी भी करवाते हैं।

क्या है प्रक्रिया?
संस्था द्वारा सोशल मीडिया और खबर के जरिए लोगों को सम्मेलन के बारे में सूचित किया जाता है। इच्छुक व्यक्ति को भाग लेने के लिए पंजीकरण कराना होता है। पंजीकरण के बाद सम्मेलन में भाग लेनेवालों को एक नंबर दिया जाता है। जिसके अनुसार उन्हें स्टेज पर बुलाया जाता है और उनके मैच से मिलने का मौका दिया जाता है। अगर दोनों राजी होते हैं तो भविष्य में खुद मिलकर शादी कर सकते हैं। कई बार जोड़े बन जाते हैं लेकिन शादी के लिए पैसे नहीं होते। ऐसे में संस्था जोड़ों को शादी के लिए आर्थिक मदद देती है।