बुढ़ापा बिगड़ गया रे! जवानी में हुआ फरार, बुढ़ापे में गिरफ्तार

गंभीर मामलों में कोर्ट से जमानत मिलने के बाद कई आरोपी फरार हो जाते हैं। गिरफ्तारी और सजा से बचने के लिए वे गांव या किसी नई जगह चले जाते हैं। वहां अपना नाम, पेशा और हुलिया बदलकर आराम से रहते हैं। जवानी में जुर्म करनेवाले ऐसे आरोपी जब बुढ़ापे में पकड़े जाते हैं तो उनका बुढ़ापा बिगड़ जाता है। ३४ वर्ष की उम्र में अवैध शस्त्रों के साथ पकड़ा गया, ऐसा ही एक आरोपी जमानत मिलने के वाद ३१ साल तक फरार रहा। ६५ साल की उम्र में पुलिस ने उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया है।
बता दें कि प्रभाकर मटकर को पुलिस ने ३ दिसंबर, १९८७ को एक पिस्तौल और ६ कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था। वर्ष १९८८ में कोर्ट से जमानत पर छूटने के बाद मटकर फरार हो गया। कोर्ट द्वारा बार-बार वॉरंट जारी किए जाने के बाद भी पुलिस उसे ढूंढ़ने में नाकाम रही क्योंकि पुलिस के पास मटकर के बारे में कोई खास जानकारी नहीं थी। मटकर ने अपना ठिकाना बदल लिया था। हाल ही में मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच की यूनिट ७ के अधिकारियों को ठाणे जिले के मुरबाड़ इलाके में मटकर को देखे जाने की सूचना मिली थी। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सतीश तावरे के मार्गदर्शन में एपीआई महेश पाटणकर की टीम ने मुंबई से सटे मुरबाड़ इलाके में जाल बिछाकर मटकर के बारे में जानकारी जुटाई और उसे दबोच लिया। मटकर वहां पहले ऑटोरिक्शा चलाता था, बाद में भवन निर्माण के लिए मजदूरों की आपूर्ति का ठेका लेने लगा था।