" /> बेमौसमी आफत

बेमौसमी आफत

फिलहाल राज्यभर में कोरोना का साया पसरा हुआ है। कोरोना को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार युद्धस्तर पर काम कर रही है। तिस पर राज्य को बेमौसमी बरसात, तूफान और ओलावृष्टि का आघात सहना पड़ा है। उत्तर महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के जलगांव, धुले, भंडारा, चंद्रपुर, यवतमाल, अमरावती, वर्धा, वाशिम, हिंगोली, जालना, परभणी और संभाजीनगर जिलों में ये आघात लगा है। इसके कारण खरीफ की तैयार फसल और फल के बागों का बड़ी मात्रा में नुकसान हुआ है। कुछ जगहों पर काटकर रखी गई पकी हुई फसलें भीग जाने के कारण बेकार हो गर्इं। कुछ वर्षों से महाराष्ट्र में ऐसा ही हो रहा है। खरीफ और रबी की फसलें किसानों को सुरक्षित और अच्छी मिल ही नहीं पार्इं। पिछले साल महाराष्ट्र को अतिवृष्टि और बाढ़ भी झेलनी पड़ी। कई बार खरीफ की फसल के दौरान बरसात ने पीठ दिखा दी। उस पर कीड़ों के कारण कई फसलें नष्ट हो गर्इं। पहले से ही किसान फसल न होने और साहूकार के कर्ज से परेशान हैं। राज्य सरकार की ओर से भी किसानों को कर्जमुक्त करने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। किसानों के लिए दो लाख रुपए तक का कर्जमाफी उसी का एक अंग है। हालांकि सरकार हर तरह के प्रयास कर रही है लेकिन प्राकृतिक आपदा पर मनुष्य का कोई बस नहीं। प्रकृति कब क्या रंग दिखाए कुछ कहा नहीं जा सकता। हमारे देश के लिए ये पुराना अनुभव है। इसलिए मौसम विभाग का अनुमान भी कई बार गलत साबित होकर मजाक का विषय बन जाता है। कभी बेमौसम बारिश तो कभी ओलावृष्टि, कभी बाढ़ तो कभी अकाल। इस प्रकार का मौसम यहां बनता-बिगड़ता रहता है। मतलब बरसात में जो बारिश मराठवाड़ा में होनी चाहिए, वो बारिश रूठ जाती है और बरसात नहीं होती। मराठवाड़ा की जनता को बूंद भर पानी के लिए दसों दिशाओं में घूमने को मजबूर कर देती है। इसके बावजूद किसान ने हिम्मत जुटाकर फसल उगाई भी तो बरसात में गायब पर्जन्य मार्च के महीने में बेमौसम बरसात और ओले गिराकर हाथ आई तैयार फसल को भी उद््ध्वस्त कर देती है। विदर्भ में भी कुछ अलग तस्वीर नहीं है। पिछले साल राज्य के बड़े भूभाग में खरीफ की फसल अतिवृष्टि के कारण नष्ट हो गई। अबकी बार रबी की फसल अच्छी हुई तो बेमौसमी बारिश ने उसे नष्ट कर दिया। गेहूं, मक्का, टमाटर और प्याज आदि की फसलों का नुकसान हुआ है। इसके अलावा संतरा, आम, केला, अनार और मोसंबी आदि के फल बागान ओला गिरने के कारण खराब हो गए। खरीफ की फसल बाढ़ में डूब गई और रबी की फसल को बेमौसमी बरसात ने लील लिया। कुछ दिनों पहले महाराष्ट्र में असमय आई बरसात के कारण खेती का बड़ा नुकसान हुआ था। अब बेमौसमी बरसात, तूफान और ओले का आघात लग रहा है। खेतों में तैयार फसलें और फल आदि एक झटके में गिर जा रहे हैं। एक तरफ कोरोना की छाया और दूसरी तरफ बेमौसमी बारिश-ओला का संकट। कोरोना के खिलाफ युद्धस्तर पर काम किया जा सकता है लेकिन सवाल ये है कि आक्रामक प्रकृति को वैâसे रोकेंगे? बेमौसमी बारिश की आफत पिछले कुछ वर्षों से महाराष्ट्र के पीछे लगी हुई है। मंगलवार को उसकी पुनरावृत्ति ओलावृष्टि के साथ हुई। इस आफत को दूर करना इंसान के वश की बात नहीं। फिर भी इस संकट का सामना करना ही होगा। राज्य के सत्ताधारी संवेदनशील हैं। किसानों को प्राकृतिक आपदा से बचाने-संवारने का हरसंभव प्रयास जारी है। बेमौसमी बरसात के आघात से नष्ट हुई रबी की फसल से हतबल किसान को फिर से खड़ा करना होगा।