बेवकूफ ए आजम

हमारा एक देश है जिस देश में लोकतंत्र है। इस लोकतंत्र में अनेक दल हैं, उन दलों में अनेक नेता हैं और उनमें कुछ अभिनेता हैं। कुछ बड़े नेता हैं और कुछ छुटभैए नेता हैं। चूंकि लोकतंत्र में सबको अभिव्यक्ति की आजादी है इसलिए नेताओं के पास एक मुंह होता है, जो भाड़ की तरह कहीं भी खुल जाता है और उससे अनेक तरह के शब्द टपकने लगते हैं। उन शब्दों से अनेक तरह का मसाला प्राप्त होता है। टेलीविजन चैनलवालों को विवाद का विषय मिलता है। जनता को चर्चा करने के लिए प्रकरण प्राप्त हो जाता है और नेताओं की हार जीत भी उसी से तय हो जाती है। देश में एक बहुत बड़ी पार्टी है समाजवादी पार्टी। जिसे शॉर्ट फॉर्म में सपा कहते हैं। उस सपा के मुखिया मुलायम यादव हैं जो फिलहाल अपने सुपुत्र अखिलेश द्वारा लतियाये जाने से अधिक मुलायम हो गए हैं। उसी सपा के एक बड़े नेता जिन्हें स्वयंभू बड़े नेता कहना अधिक उचित होगा वह अपने आपको मुगल-ए-आजम मानते हैं लेकिन असलियत में वे बेवकूफ ए आजम से ज्यादा कुछ नहीं हैं। उन्होंने अपना भाड़-सा मुंह खोलकर एक नेत्री के खिलाफ अपशब्द कह दिए और समूचे देश में चर्चा का बाजार गर्म हो गया है। बेवकूफ ए आजम पहले भी कई बार फालतू बयान देकर विवादों में पड़ चुके हैं। दरअसल यह नेत्री दशकों तक सपा में रहते हुए उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं, जिस क्षेत्र से वे अब विरोधी दल में जाकर आजम खान के ही खिलाफ ताल ठोकने लगी हैं। आजम खान से यह बात बर्दाश्त नहीं हो रहा है अपनी आसन्न हार के खतरे से भी भन्नाए हुए हैं तो कुछ भी अनाप-शनाप बयान देकर अपना पलड़ा भारी करने की कोशिश करना उनकी मजबूरी बन गई है लेकिन हमारे यहां का मतदाता बहुत जागरूक और समझदार हैं, वह इस तरह की फालतू बयानबाजी पर ध्यान नहीं देता, उल्टे इस तरह की अभद्र भाषा बोलनेवाले को औकात दिखाना उसे अच्छी तरह आता है।