" /> बैड टच का गुड सबक, दुराचारी बाप को मिली उम्रकैद की सजा

बैड टच का गुड सबक, दुराचारी बाप को मिली उम्रकैद की सजा

देश में बलात्कार की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं जबकि बलात्कारियों को उस अनुपात में सजा नहीं मिल रही है। वर्ष २०१८ तक न्यायालय में पहुंचे बलात्कार के कुल मामलों में ८८.७ फीसदी मामले आज भी लंबित हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की ताजा रिपोर्टों की मानें तो वर्ष २०१७ में बलात्कार के ३२,५५९ मामले दर्ज हुए थे, जो कि वर्ष २०१८ में बढ़कर ३३,३५६ तक पहुंच गए। दुर्भाग्य की बात ये है कि इसी दौरान बलात्कारियों को सजा का प्रमाण ३२.२ फीसदी से घटकर २७.२ फीसदी तक पहुंच गया। उससे भी शर्मनाक बात ये है कि बलात्कार के मामले में महाराष्ट्र (५,४३२ मामले) टॉप पर रहा। इस दौरान देशभर में बच्चों से यौन शोषण के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। वर्ष २०१८ में २१,४०१ बच्चों से बलात्कार की घटनाएं घटी। पीड़ितों में २०४ लड़के भी शामिल थे और बच्चों से बलात्कार के मामले में भी महाराष्ट्र टॉप पर रहा। राज्य में २,८३२ बच्चों से बलात्कार हुआ। बच्चों के साथ यौन शोषण की घटनाओं में उनके अपने रिश्तेदार या परिचित ही शामिल रहते हैं। हालांकि अब स्कूलों में पुलिस द्वारा बच्चों को सिखाए जा रहे ‘बैड टच’ के सबक का गुड इफेक्ट सामने आने लगा है। ऐसे ही एक मामले में एक दुराचारी पिता को उम्र वैâद की सजा मिली है।
नाबालिग बेटी से सात साल तक बलात्कार करनेवाले कुकर्मी बाप को मुंबई की विशेष पोक्सो कोर्ट ने उम्र वैâद की सजा सुनाई है। हालांकि आरोपी पिता ने अपने बचाव में बेटी द्वारा लगाए गए आरोपों को झूठा एवं दुर्भावना से ग्रस्त होकर लगाया गया बताया था लेकिन बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट और अग्रीपाड़ा पुलिस द्वारा जुटाए गए अन्य सबूतों तथा सरकारी वकील के दमदार तर्कों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी पिता को दोषी माना।
‘पुलिस दीदी’ अभियान का सकारात्मक परिणाम
सात वर्षों से पिता द्वारा किए जा रहे यौन शोषण को नाबालिग बेटी चुपचाप सह रही थी लेकिन डर के मारे वह अपनी पीड़ा किसी के सामने व्यक्त नहीं कर पा रही थी। उसी दौरान स्कूल में पुलिस द्वारा शुरू किए गए ‘गुड़ टच-बैड टच’ अभियान से बच्ची को हिम्मत मिली। ‘पुलिस दीदी’ ने बच्चियों को बताया कि अच्छा स्पर्श वैâसा होता है और बदनीयती से किस तरह कोई स्पर्श करता है। इसी तरह बच्चों के साथ यौन शोषण किस तरह से होता है व यौन शोषण के खिलाफ शिकायत किससे और वैâसे करनी चाहिए आदि सबक पुलिस दीदी ने बच्चियों को सिखाया। पुलिस दीदी के इस सबक से बच्ची को अपने पिता द्वारा किए जा रहे यौन अत्याचार की जानकारी हुई और उसे शिकायत करने की हिम्मत मिली। बच्ची ने पुलिस को बताया कि उसका पिता एक मजदूर है। जब वह १० वर्ष की थी तभी से वह दरिंदा बच्ची के संवेदनशील अंगों से छेड़छाड़ करता था। किसी के सामने मुंह खोलने पर घर से निकालने और मारने की धमकी देकर वह चार बार बच्ची को हवस का शिकार भी बना चुका था। दरिंदा बाप इसके बाद भी कई बार ऐसी हरकतें करता रहा। बच्ची ने जब मदद की आस में अपनी मां को आपबीती सुनाई तो मां ने उसे फटकार कर चुप करा दिया। बच्ची ने पुलिस को आपबीती सुनाकर घर जाने से इंकार कर दिया। तभी से एक शैक्षणिक संस्था बच्ची की शिक्षा और लालन-पालन की जिम्मेदारी उठा रही है।
बच्ची की दृढ़ता से बाप को मिली सजा
पिता के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराने के बाद बच्ची अपनी बातों पर दृढ़ता पूर्वक डटी रही। उसने अदालत में पिता के खिलाफ लगाए गए आरोपों को दोहराया। वहीं बच्ची द्वारा शिकायत कराने के बाद उसकी मां ने पुलिस थाने में अपना बयान दर्ज करते समय स्वीकार किया कि बच्ची ने पिता के दुष्कर्मों के बारे में उसे कई बार बताया था। हालांकि कोर्ट में वह बयान से मुकर गई। लेकिन बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट और उसकी तो शिक्षिकाओं की गवाही तथा पैरवी अधिकारी संजना दुखंडे ने दमदार सबूत पेश किए। उक्त सबूतों व सरकारी वकील एडवोकेट वीणा शेलार के तर्कों के आधार पर विशेष न्यायाधीश प्रीति कुमार-घुले ने आरोपी पिता को आईपीसी की धारा एवं पोक्सो की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए उम्र वैâद की सजा सुनाई।