बॉलीबचन : चुप्पी का शोर!

इन दिनों मीडिया खासकर सोशल मीडिया पर शोर-शराबा इतना ज्यादा है कि लगता है मानो बॉलीवुड भी दो गुटों में बंट चुका है। यूं तो बॉलीवुड पर राजनीति की छाया पहले भी पड़ती रही है पर अब तो जैसे खुल्लम-खुल्ला दोनों पक्षों की सेनाएं आमने-सामने आ डंटी हैं। शुरुआत दीपिका पादुकोण ने जेएनयू पहुंचकर की। हालांकि वे वहां १० मिनट रहीं और कुछ बोली नहीं। चुपचाप रहीं। पर इस चुप्पी के शोर से सोशल मीडिया पर खलबली मच गई। आम आदमी भी इस बॉलीवुड वॉर को देख जोश में आ गया। लोग खुद प्रमोशन में जुट गए। फिल्म ट्रेड के जानकार बताते हैं कि करोड़ों रुपए का प्रमोशन मुफ्त में होने लगा। इससे दोनों फिल्में ‘छपाक’ के साथ ही ‘तानाजी’ भी अचानक बॉक्स ऑफिस पर गर्म हो उठी।
फिल्म ठंडी है। फिल्म काफी गर्म है। ये बॉलीवुड की भाषा है, जो किसी फिल्म के सुर्खियों में होने या नहीं होने के लिए बोली जाती है। ये दोनों ही फिल्में अचानक हॉट हो उठीं जिसे कुछ भी लेना-देना नहीं वो भी पक्ष-विपक्ष में बयानबाजी में जुट गया। दोनों तरफ से फिल्म को हिट कराने के आह्वान शुरू हो गए। ‘छपाक’ से नाराजगी कुछ ज्यादा थी कि दीपिका जेएनयू गई क्यों? जेएनयू की हवा में वामपंथी विचारधारा बहती है। वहां इन दिनों नकाबपोश फाइट की मिस्ट्री सुलझाने की कोशिश चल रही है। करीब ढाई महीने से लॉक डाउन है। सो दीपिका के वहां पहुंचने से माहौल गर्माना ही था। अब सवाल है कि क्या यह कोई पीआर एक्सरसाइज के तहत किया गया? तो ट्रेड के जानकारों का मानना है कि बिल्कुल १०० फीसदी।
किसी भी फिल्म की रिलीज के वक्त अगर कोई विवाद होता है तो उससे फिल्म को फायदा होता है। लोगों में फिल्म के प्रति उत्सुकता बढ़ती है, ओपनिंग अच्छी मिलती है। कुछ समय पहले ही संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ के खिलाफ पूरे देश में जबरदस्त आंदोलन हुआ था। उस फिल्म का बजट २१५ करोड़ रुपए था और फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन ५८५ करोड़ रुपए था। अगर फिल्म के साथ विवाद न जुड़ता तो इसकी कमाई और भी कम होती। कई साल पहले एक फिल्म आई थी ‘एक छोटी सी लव स्टोरी’। उस फिल्म के साथ विवाद इतना गर्माया कि मामला कोर्ट-कचहरी तक जा पहुंचा था। रोज अखबारों में खबरें छप रही थी। फिल्म को अच्छी ओपनिंग मिली थी। मगर कंटेंट में दम नहीं था इसलिए वह ज्यादा सफलता नहीं प्राप्त कर पाई थी। मगर विवाद के कारण वैसे लोगों ने बी फिल्म देखी थी जो आमतौर पर ज्यादा फिल्में नहीं देखते। कुछ समय पहले उड़ता पंजाब के साथ भी विवाद जुड़ा था और उसे भी अच्छी ओपनिंग मिली थी। मगर सिर्फ विवाद के सहारे फिल्म को चलाना समझदारी नहीं है क्योंकि आखिर में बॉक्स ऑफिस पर चलता कंटेंट ही है। ‘छपाक’ दीपिका पादुकोण के कारण कुछ सुर्खियों में आई लेकिन अगर टिपिकल बॉलीवुड ट्रेड के ट्रेंड पर नजर डालें तो यह एक गंभीर और क्लास श्रेणी की फिल्म है। बात अगर तानाजी की करें तो वह एक फुल क्लास-मास एंटरटेनर फिल्म है। यह करीब १२५ करोड़ के बजट की फिल्म है। दूसरी तरफ छपाक ४५ करोड़ की है। ऐसे में कंटेंट व वैâनवास
के साथ दोनों फिल्मों की कोई तुलना नहीं की जा सकती। छपाक एक संदेशपरक फिल्म है, जबकि तानाजी एक ऐतिहासिक व पीरियड फिल्म है। इसमें एक वीर की कहानी को फिल्मी लिबर्टी के साथ दिखाया गया है ताकि दर्शक सिनेमा का आनंद ले सकें। सिनेमा का एक अपना शास्त्र होता है। इस शास्त्र की समझ न सिर्फ फिल्ममेकर बल्कि रेवड़ियों की तरह स्टार बांटनेवाले समीक्षकों को भी होनी चाहिए। स्टार आज बाजार में तब्दील हो चुका है। इस स्टार बाजार पर आगे फिर आपको पढ़ने को अवश्य मिलेगा!