बॉलीवुड बदल रहा है!

खूबसूरती, बेहतरीन अभिनय, नृत्यकला मेंं निपुणता, समझ इन सब प्रतिभाओं की धनी हैं बॉलीवुड की धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित-नेने। विवाह के बाद करियर ने जो विराम लिया था वह अब खत्म हो चुका है और माधुरी फिर सिनेमा, छोटे पर्दे पर बड़े धमाल कर रही हैं। माधुरी की दो फिल्मों की शूिंटग पूरी हो चुकी है जबकि छोटे पर्दे पर डांस रियलिटी शो ‘डांस दीवाने’ की जज के रूप में नजर आएंगी। माधुरी के करियर और नई फिल्मों को लेकर पूजा सामंत ने बात की। प्रस्तुत है बातचीत का प्रमुख अंश-
आप बॉलीवुड में २५ वर्ष से हैं। आपको मराठी फिल्मों में आने में इतना लंबा वक्त क्यों लगा?
यह सच्चाई है कि मराठी फिल्म्स का यह दौर बहुत उम्दा है, बहुत स्ट्रॉन्ग कंटेंट की फिल्में बन रही हैं। कई हिंदी के कलाकार मराठी फिल्मों में काम करने के लिए उत्सुक हैं क्योंकि बहुत सशक्त कहानियों वाली फिल्में यहां बन रही हैं। मुझे इससे पहले भी मराठी फिल्मों के प्रस्ताव आते रहे हैं पर जो कहानियां, जो किरदार मुझे ऑफर हुए थे मुझे आकर्षित नहीं कर पाएं। मुझे हमेशा से लग रहा था कि मेरी पहली मराठी जो भी हो वो सॉलिड हो। मेरी उम्र के पड़ाव के मुताबिक किरदार हो और कुछ आर्टिफिशियल न लगे इसीलिए मुझे मराठी फिल्म करने में वक्त लगा।
विवाह के बाद करियर को रिवाइव करना वैâसा रहा?
बॉलीवुड में एक अरसा काम करने के बाद मेरे परिवार ने मेरी शादी करानी चाही, उस समय शादी करके पारिवारिक जिंदगी बसर करना मेरी प्राथमिकता थी। डॉक्टर श्रीराम नेने का रिश्ता भी मेरी बहनों ने ढूंढा, शादी के बाद मां बनीं। बच्चों के साथ होना मेरे जीवन का लक्ष्य था। उस दौरान जो ऑफर्स आए उन पर मैंने गौर नहीं किया। जीवन की प्राथमिकता जब बदल जाती है तब करियर में थोड़ा ठहराव लेना जरूरी बन जाता है।
आपको अभिनय कला कहां से मिली?
मेरी मां रत्नागिरी के पास एक छोटे गांव से हैं। वो डांस सीखना चाहती थी पर ऑर्थोडॉक्स कल्चर के कारण यह आजादी उन्हें नहीं मिली। संगीत सीखने की व्यवस्था की गई लेकिन शादी के बाद वे इसमें करियर नहीं बढ़ा पार्इं। मां ने सोच रखा था, जब मुझे बेटियां होंगी उन्हें डांस सिखाऊंगी। जब मेरी बड़ी बहन भारती और फिर कुछ वर्षों बाद रूपा का जन्म हुआ, मां ने उन्हें कत्थक सिखाना शुरू किया। मैं अपनी बड़ी बहन भारती से १० वर्ष छोटी हूं। वे दोनों कत्थक सीखा करती थीं उस समय मेरी उम्र ३ वर्ष की थी। मैं उन दोनों दीदियों को देखकर परदे के पीछे रहते डांस करने लगी , यह देखकर गुरूजी ने कहा, आप माधुरी को भी कत्थक सीखने दीजिए, हो सकता है वो भी सीख लेगी। बस उस दिन से मेरी ट्रेनिंग भी शुरू हो गई।
आपकी नजरोें से देखा जाए तो कितना बदला है बॉलीवुड?
जो बदलाव हुए हैं सुखद हैं। पहले तो स्क्रिप्ट-संवाद तैयार नहीं रहते थे। कई बार सेट पर सीन से पहले संवाद लिखे जाते थे। अब बाऊंडेड स्क्रिप्ट मिलती है। वैनिटी वैंस आम बात हो गई हैं। पहले धूप में भी शूटिंग हो तो छाता लेकर काम करना पड़ता था। अब पूरा बॉलीवुड प्रोफेशनल हो चुका है।
फिल्मों में नायिकाओं के लिए क्या यह दौर सही है?
मैं इस मामले में खुद को लकी मानती हूं। मुझे सशक्त किरदार निभाने का मौका हमेशा से मिला। फिर वो रामलखन जैसी मल्टी स्टारर फिल्म हो या बेटा, राजा, तेजाब, लज्जा, मृत्युदंड हो, लेकिन पहले महिलाओं को सशक्त दिखाना यानी उन पर अत्याचार होकर वे बदला लेती थी यही मतलब था सशक्त किरदारों का। अब ‘तुम्हारी सुलू’ जैसी फिल्म देखिए। अब इस तरह की कॉमन महिला को भी सशक्त नारी के रूप में दिखाते हैं, यह बदलाव है बॉलीवुड का। नई पीढ़ी की प्रियंका चोपड़ा, करीना कपूर, विद्या बालन, आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण बहुत अच्छा काम कर रही हैं।
आपने ‘कलंक’ और ‘टोटल धमाल’ की शूटिंग शुरू कर दी, क्या स्कोप है आपके लिए इन फिल्मों में?
स्कोप से ज्यादा मायने कहानी में मैंने देखा। `टोटल धमाल’ इंद्रकुमार की फिल्म है जिनके साथ मैंने लास्ट फिल्म ‘राजा’ की थी। इसमें मेरे साथ स्टार अनिल कपूर हैं। पुकार फिल्म के बाद उनके साथ काम करूंगी। `कलंक’ में मैंने आलिया की टीचर का रोल किया है यह भी अलग है।