बॉली बचन- वेबसीरिज की बहार!

आजकल वेबसीरिज का दौर चल निकला है। जिसे देखो वो वेबसीरिज में बिजी होने की बात कर रहा है। फिल्मों में काम नहीं है। सीरियल में काम नहीं है तो क्या हुआ? वेबसीरिज में बिजी है बंदा। ये वेबसीरिज बॉलीवुड का लेटेस्ट पैâशन है। चूंकि यहां सेंसर नहीं है इसलिए निर्माता खूब खुलकर एडल्ट कंटेंट परोस रहे हैं। ५० लाख से लेकर एक करोड़ तक के एपिसोड बनने की खबरें फिजा में तैर रही हैं। सच्चाई क्या है राम जाने!
हाल ही में एक अभिनेता से मुलाकात हुई। कुछ दिनों से वे कहीं नजर नहीं आ रहे थे। हाल-चाल के बाद जब गुफ्तगू शुरू हुई तो क्या चल रहा है, के जवाब में फॉग की बजाय उन्होंने तपाक से कहा कि वेबसीरिज में बिजी हूं। कुछ वेबसीरिज के नाम भी गिना डाले जो फिलहाल याद नहीं।
अब दिलचस्प बात यह है कि वेबसीरिज में भी सितारों की डिमांड है। सैफ अली खान, मनोज बाजपेयी, पंकज त्रिपाठी जैसे अभिनेता वहां जम चुके हैं। वेबसीरिज में रीयल एक्टिंग की मांग होती है इसलिए थिएटरवाले कलाकारों की वहां खूब डिमांड है। चूंकि सेंसर बोर्ड जैसी किसी संस्था की नजरों से ये परे है इसलिए वहां बिना किसी रोक-टोक के अधनंगे व गाली-गलौज से भरे संवाद खूब चल रहे हैं। अब चूंकि ये नया प्लेटफॉर्म है और जियो युग में हर कोई इसके मजे ले रहा है इसलिए फिलहाल तो गाड़ी दनदनाती चल रही है मगर यह गाड़ी कितनी दूर तक जा पाएगी, यह कहना मुश्किल है। क्योंकि आखिर में वही बात आती है कि कंटेंट में दम होगा तभी मामला हिट होगा।
फिल्म, सीरियल, वेबसीरिज हो या ड्रामा, हर जगह कंटेंट तो चाहिए ही। बड़े सितारों से सजी बड़ी-बड़ी फिल्में भी कंटेंट के अभाव में बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ देती हैं। रितिक रोशन की ‘वॉर’ २०० करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर चुकी है। पर साथ ही रितिक की कुछ पिछली फिल्मों पर नजर डाल लीजिए। यही बात खान तिकड़ी की फिल्मों पर भी लागू होती है। वेबसीरिज में दमदार डायलॉग (अश्लीलता भरे) खूब भा रहे हैं। पर अगर कुछ नई कहानी नहीं होगी तो फिर दर्शक कहां तक जुड़ पाएंगे!
अब थोड़ी वेबसीरिज के आर्थिक पहलू पर भी चर्चा आवश्यक है। इस क्षेत्र में कई नई कंपनियों ने एंट्री ली है। इसमें कुछ बाहर हॉलीवुड की हैं तो कुछ देसी कंपनियां हैं। शुरू में तो निर्माताओं को मोटे पैसे दिए गए पर सुनने में आ रहा है कि अब कंपनियों ने मुट्ठी सख्त कर ली है। आसानी से पैसा नहीं मिल रहा। ये वेबसीरिज का बिजनेस शुरू हुए बमुश्किल ३-४ साल हुए हैं और यहां मंदी ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। आखिर ऐसा क्यों? इसका एक कारण तो ये है कि अंग्रेजी में बने वेबसीरिज के दर्शक पूरी दुनिया में होते हैं, जबकि हिंदी के दर्शक सीमित होते हैं। अंग्रेजी दर्शक ‘ओटीटी’ को सब्सक्राइब के लिए तुरंत पैसे चुका देते हैं, जबकि हिंदी के दर्शक पाइरेटेड वर्जन के चक्कर में ज्यादा होते हैं। सो यह मॉडल नुकसान पहुंचानेवाला है। अब भविष्य का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। इस समय तो यही कहना उपयुक्त होगा कि फिलहाल वेबसीरिज की बहार है!