बॉली बचन-

सेंसर बोर्ड से फिल्मवाले जितना चिढ़ते हैं, उतना किसी चीज से नहीं। इसका कारण है इसकी गाइड लाइन। कब किस सीन पर बोर्ड के सदस्यों की भृकुटि तन जाए कहा नहीं जा सकता। आए दिन किसी न किसी फिल्म निर्माता को आप मीडिया में चीखते-चिल्लाते देख-सुन और पढ़ सकते हैं। जब टीवी में अकेला दूरदर्शन था, तब भी कोड ऑफ कंडक्ट था। पर जब ढ़ाई दशक पूर्व निजी चैनल उगे तो वहां काफी कुछ बदलाव आने लगा। पिछले दो-ढ़ाई साल में तो हालत एकदम पलट गए हैं। नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम ने गेम का रूल बदलकर रख दिया है। वहां कोई कोड नहीं, कोई नियम नहीं है। न सिर्फ महाबोल्ड, नंगे-पुंगे सीन बल्कि संवाद भी बोले जा रहे हैं। नई-नई गालियों का इजाद हो रहा है। जाहिर है कि जब हर हाथ में मोबाइल पहुंच चुका है तो बटन दबाते ही दर्शकों के दरबार में ये सब अश्लीलता भरे कार्यक्रम हाजिर हो जा रहे हैं। सेंसर की दुनिया के आदी दर्शकों के लिए यह एक नया अनुभव है।
एक तरफ जहां लोग इन ‘ओटीटी’ पर आनेवाले बोल्ड कार्यक्रमों का मजा ले रहे हैं, वहीं कई लोगों को इस पर आपत्ति भी है कि ये अश्लीलता पैâला रहे हैं। ओटीटी का फुल फॉर्म ‘ओवर द टॉप’ है और यह प्रसारण करनेवाले प्लेटमफॉर्म को कहा जाता है। नेटफ्लिक्स एक ऐसा ही ओटीटी है। बालाजी, ईरोज, कलर्स समेत करीब दो दर्जन ओटीटी इस समय सक्रिय हैं। अब इनका बिजनेस मॉडल क्या है, इस पर आगे के किसी कॉलम में चर्चा होगी। पर इस समय ये सभी ओटीटी महाबोल्ड शोज के प्लेटफॉर्म जरूर बन गए हैं। सेक्रेड गेम्स और मिर्जापुर जैसे शो का नाम तो आपने सुना ही होगा। अगर नहीं सुना तो फिर आपको ओटीटी की इस दुनिया के बारे में कुछ भी नहीं पता है। निर्माता के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि दर्शक और उसके बीच सिर्फ ओटीटी ही है। जबकि सिनेमा में डिस्ट्रीब्युटर, एक्जबीटर और थिएटर होते हैं। यहां एक बार शो बेचकर निकल जाओ। बड़े सितारेवाले शोज के तो एक एपिसोड के लिए ५० लाख से एक करोड़ रुपए तक मिलने की खबर है, जबकि छोटे-मोटे शो के दाम भी १०-२० लाख तो लग ही जा रहे हैं। यानी सबकी बल्ले-बल्ले है। पर मुंबई से दिल्ली तक ओटीटी के बोल्डनेस भरे कार्यक्रमों की शिकायतें आने लगी हैं और सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग हो रही है। मगर हस्तक्षेप इतना आसान है क्या? इंटरनेट से स्ट्रीम होनेवाले किसी ओटीटी पर रोक लगाने के लिए फिलहाल कोई कानून नहीं है। अब ये किसी देशद्रोही श्रेणी में भी नहीं आते। दूसरी तरफ इंटरनेट पर लाखों की संख्या में पोर्न साइट हैं। चाइल्ड पोर्नोग्राफी समेत कुछ अन्य पोर्न साइट्स को सरकार ने बैन कर दिया है मगर वह नाकाफी है। ऐसे में अगर करीब दो दर्जन ओटीटी के लिए कोई आदेश आता है तो इस बात की पूरी संभावना है कि अश्लीलता के सौदागर कोई दूसरा रास्ता ढूंढ लेंगे।