बोंबिल, मांदेली, झींगा का घुट रहा है दम

 

५-६ किमी के दायरे में रहनेवाली मछलियां न खाना, वरना पड़ेगा डॉक्टर के पास जाना
बोंबिल, मांदेली और झींगा मुंबईकरों की प्रिय मछलियां हैं। मगर इन मछलियों का इन दिनों समुद्र में दम घुट रहा है। मछलियों के दम घुटने की वजह विशेषज्ञ मूर्तियों में इस्तेमाल किए जानेवाले लेड (सीसा) को बता रहे हैं। यह एक जहरीला पदार्थ है। ऐसे में समुद्री मछलियों के शौकीन जरा कुछ दिन मछली खाने से बचें तो ज्यादा अच्छा होगा वर्ना प्रोटीनयुक्त मछलियां आपको अस्पताल का भी रास्ता दिखा सकती हैं।

जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों शहर के समुद्र तटों पर बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया है। इसका असर समुद्री किनारे से लगभग ५-६ किलोमीटर के दायरे में रहनेवाली मछलियों पर पड़ा है। समुद्री जीव वैज्ञानिकों का मानना है कि मूर्तियों के निर्माण के लिए जिन धातुओं का इस्तेमाल होता है, उन धातुओं को अपनी खुराक समझकर मछलियां खा जाती हैं। इसका दुष्परिणाम मछलियों पर पड़ रहा है। ऐसा होने से मछलियों का दम घुटने के साथ ही उन्हें सांस लेने में तकलीफ भी हो रही है जिसके कारण उनकी मौत हो रही है। मुंबई के समुद्र में ५-६ किलोमीटर के दायरे में डोमा, रेमन, झींगा, बोंबिल, मांदेली जैसी मछलियां सबसे अधिक पाई जाती हैं। मुंबई में इन मछलियों की ही सबसे अधिक मांग भी रहती है। सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरी एजुकेशन के प्रोफेसर व विशेषज्ञ डॉ. एस के चक्रवर्ती ने बताया कि गणेश प्रतिमा को बनाने के लिए धातु का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक जहरीला मटेरियल होता है, जिसके खाने से मछलियों का दम घुटने लगता है। चक्रवर्ती के अनुसार यदि मछलियों के शरीर में इस धातु का प्रमाण कम भी रहा और इसे इंसान ने खा लिया तो उन्हें दस्त, पेट दर्द, भोजन हजम न होना आदि शिकायतें हो सकती हैं। ऐसे में अक्टूबर के मध्य तक डोमा, झींगा, बोंबिल, मांदेली जैसी मछलियां लगभग १५ दिनों तक खाने से बचें तो ज्यादा अच्छा होगा।