बोट पर चोट! लापरवाही का शुभारंभ

शिवस्मारक के काम का श्रीगणेश करने के लिए स्मारक समिति के अध्यक्ष विनायक मेटे कल ठेकेदारों और प्रशासनिक अधिकारियों को अरब सागर में ले गए। लेकिन इन लोगों को लेकर जानेवाली बोट पर ऐसी चोट लगी कि एक बोट डूबने लगी। शिवस्मारक के शुभारंभ के लिए निकली तीन बोट में से एक बोट चट्टान से टकरा गई जिससे उसमें छेद हो गया। बोट में पानी भरने लगा जिससे उस पर मौजूद लोगों में हाहाकार मच गया। कहा जा रहा है कि उक्त बोट का पहले इंजन खराब हुआ फिर वह समुद्र के अंदर चट्टान से टकराई। हालांकि समय से रेस्क्यू बोट के पहुंच जाने से दुर्घटनाग्रस्त बोट में मौजूद लोगों को बचा लिया गया। जबकि एक व्यक्ति का शव बोट में से बरामद किया गया है। प्रशासन ने पांच लाख रुपए के मुअावजे की घोषणा की है।
जानकारों का कहना है कि चंद्रमा और समुद्र में उठनेवाले ज्वार-भाटा का गहरा संबंध है। ज्वार-भाटा, चंद्रमा और सूर्य के पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा खिंचाव के कारण उत्पन्न होता है। चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का पृथ्वी के समुद्री जल पर गहरा प्रभाव पड़ता है। सामान्यत: अमावस्या और पूर्णिमा के दिन समुद्री जल तथा उसकी लहरों में तेजी देखने को मिलती है। कल शरद पूर्णिमा थी। पूर्णिमा के कारण भी लहरों में तेजी की आशंका जताई जा रही है। कहा ये भी जा रहा है कि अधिक प्रेशर के कारण बोट का तल क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें पानी भरने लगा।