" /> बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय!

बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय!

जब पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है तब भी पाकिस्तान के आतंकी संगठन अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रहे। जब उन्हें कहीं और कुछ करने को नहीं मिलता तो वह अपने देश को भी नहीं बख्शते। पिछले दिनों पाकिस्तान के कराची शहर स्थित `पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज’ पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया जिसमें ११ लोगों की मौत हो गई। इस हमले में शामिल चार आतंकवादियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया। बताया जाता है कि इस हमले को चार आतंकवादियों ने अंजाम दिया। हमले में एक पुलिस अधिकारी और चार सुरक्षा गार्ड भी मारे गए जबकि तीन पुलिस कमिर्‍यों समेत सात लोग इस हमले में घायल हो गए। हमलावरों के शवों के पास से विस्फोटक, हथगोले और यहां तक कि खाने-पीने का सामान भी बरामद हुआ। यह इस बात का संकेत देता है कि वे इमारत की लंबे वक्त तक घेराबंदी की मंशा के साथ आए थे। यह उस देश की कहानी है जिसने खुद को इस्लामिक गणराज्य घोषित कर रखा है। इस्लामी देशों में खुद को प्रमुख मुस्लिम देश के नाम से स्थापित करते हुए आर्थिक रूप से सशक्त इस्लामी देशों आर्थिक मदद लेता है और अपनी अवाम के बीच न जाने किस इस्लाम का प्रचार करता है जहां आए दिन आतंकी संगठन आतंकी कार्रवाई करते रहते हैं। आतंकी विचारधारा से प्रभावित संगठनों की नापाक करतूतों से मस्जिद और दरगाहों जैसे मुकद्दस स्थल भी नहीं छूटते। अक्सर बमों और गोलियों से मस्जिदों में नमाजियों को भून दिए जाने की खबरें आती रहती हैं। पूरी दुनिया भले ही पाकिस्तान पर थूकती हो लेकिन पाकिस्तान के आतंकी इस नफरत को भी अपना ईनाम समझकर अगली कार्रवाई का खाका तैयार करने में लगे रहते हैं।

अब आइये नापाक पाकिस्तान की खुद को पाक बताने की नापाक करतूत पर। पाकिस्तान की भ्रष्ट बुद्धि के नेताओं की समझ में यह नहीं आ रहा कि जो खेल उन्होंने मजहब की बुनियाद पर पाकिस्तान में खेला था वही उन पर उल्टा पड़ रहा है। लेकिन पाकिस्तान है कि अपने घर  संभालने के बजाय हिंदुस्थान पर आरोप मढ़ रहा है। खिलाड़ी से राजनेता बनकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद पर विराजमान इमरान खान ने भी अपने पूर्ववर्ती शासकों की तर्ज पर अपनी कमजोरियों का ठीकरा हिंदुस्थान पर फोड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान को अस्थिर करने के इरादे से हिंदुस्थान ने ही यह हमला कराया है। इमरान खान का कहना है कि हमलावर हथियारों से लैस थे और वे लोगों को बंधक बनाकर मुंबई जैसा हमला कराची में भी करना चाहते थे। हिंदुस्थान की वित्तीय राजधानी मुंबई में २००८ में हुए हमले में १६० लोग मारे गए थे। हिंदुस्थान ने तभी यह राज फाश कर दिया था कि उस हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई और वहां समुद्री रास्ते से आए आतंकवादियों ने इसे अंजाम दिया। अजमल कसाब की जीवित गिरफ्तारी ने पूरे विश्व में पाकिस्तान को बेनकाब करने का काम किया था। हिंदुस्थान की सबूतों के साथ की गई बातचीत के बावजूद पाकिस्तान हमेशा आरोपों को खारिज करता रहा है। अब वैसे ही आरोप पाकिस्तान भी हिंदुस्थान पर लगाकर अपनी साख बचाना चाहता है। खासतौर से पाकिस्तान का कहना है कि हिंदुस्थान बलूचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी आंदोलन और अन्य गुटों की फंडिंग कर रहा है।

दरअसल पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन खस्ता होती जा रही है। पाकिस्तान में इमरान खान के लिए कोरोना महामारी से पैदा स्थिति और खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को संभालना मुश्किल हो रहा है और इसे लेकर उनकी खूब आलोचना भी हो रही है। इमरान खान को पिछले दिनों उस वक्त भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना झेलनी पड़ी थी जब उन्होंने अपने देश की संसद में दिए गए एक भाषण में ओसामा बिन लादेन को शहीद बताया था। इमरान खान के विरोधी उन पर आतंकवादियों और चरमपंथियों से सहानुभूति रखने का आरोप लगाते रहे हैं। उनके इसी रवैये को लेकर अगर उनके कई राजनैतिक आलोचक उन्हें `तालिबान खान’ कहते हैं तो गलत नहीं कहते हैं। ऐसे में इमरान खान के हिंदुस्थान विरोधी बयान को भला अन्य देश क्योंकर गंभीरता से लेंगे? यह तो आईने की तरह साफ़ है कि पाकिस्तान न सिर्फ आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है बल्कि उसने हिंदुस्थान के भगोड़े आतंकियों और अनेक अपराधियों को अपने यहां पनाह भी दी है। दाऊद इब्राहिम सहित अनेक ऐसे नाम हैं जो पाकिस्तान की छत्रछाया में पलते रहे हैं। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पाकिस्तान का अपनी सुरक्षा और विदेश नीति के रूप में आतंकवादी समूहों का इस्तेमाल करना हिंदुस्थान के प्रति हमेशा ही उसके षडयंत्र का हिस्सा रहा है। हिंदुस्थान और उसकी ताकत को वह हमेशा अपने अस्तित्व के खतरे के रूप में देखता रहा है। अपनी नाकामियों के लिए हिंदुस्थान को जिम्मेदार बताने की पुरानी नीति पर ही इमरान खान को भी चलना पड़ रहा है। न सही विश्व बिरादरी को, लेकिन अपने ही देश के कुछ मूर्खों को पाकिस्तानी शासक यह समझाने में सफल हो जाते हैं कि उनके यहां की गई हर आतंकी कार्रवाई में हिंदुस्थान का हाथ है।तभी तो हिंदुस्थान के विरोध में आतंकी विचारधारा वाले संगठनों को खुराक मिल जाती है और वह अवाम को बरगलाने में सफल हो जाते हैं। नतीजतन बद-दिमाग, जाहिल और कट्टरपंथी मुसलमानों का उन्हें मौन और कभी-कभी खुला समर्थन मिलता रहता है।

अभी पिछले महीने के अंत में यह खबर आई थी कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अपने नये आतंकी संगठन `टेररिस्ट रिवाइवल फोर्स (टीआरएफ) के जरिये कश्मीर में सुरक्षाबलों पर असाधारण तरीके से हमले की योजना बना रहा है। जब पूरे विश्व सहित खुद पाकिस्तान में कोरोना के मामले बढ़ रहे थे तब पाकिस्तान आतंकी कार्रवाई को बढ़ावा दे रहा था। पाकिस्तान ने पुलवामा-२ की पूरी तैयारी कर रखी थी। दरअसल मई के आखिरी सप्ताह में पाकिस्तान की शह पर पुलवामा के पास एक सैंट्रो गाड़ी में इंप्रोवाइज्ड एक्स्प्लोसिव डिवाइस (आईईडी) प्लांट की गई थी, जिसको सुरक्षा बलों ने समय रहते पहचान कर डिफ्यूज कर दिया था। आतंकियों ने पुलवामा जैसे हमले को दोहराने की साजिश रची थी। जांच में पता चला कि आतंकियों ने एक ड्रम में ४५ किलो आईईडी रखा था। पिछले साल पुलवामा में आतंकियों ने इसी तरह के हमले को अंजाम दिया था जिसमें एक गाड़ी में बम रखा गया था जिसे सीआरपीएफ के काफिले में घुसा दिया गया था। फरवरी २०१९ में हुए उस आतंकी हमले में हमारे ४५ जवान शहीद हो गए थे। लेकिन सुरक्षाबलों ने इस बार सतर्कता बरतते हुए आतंकियों के मंसूबे को नाकाम कर दिया। आश्चर्य यह कि पाकिस्तान में यह सब हो रहा है धर्म और मजहब के नाम पर, जिहाद के नाम पर। यहां यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि दरअसल पाकिस्तान ने ही सबसे अधिक इस्लाम धर्म के नाम का उपयोग करते हुए इस्लाम को ही सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। पाकिस्तान के हुक्मरान न जाने किस जन्नत का ख्वाब देख रहे हैं जो खून की होली खेलने के बाद उन्हें मिलने वाली है। पाक की नापाक करतूत कहीं से इस्लामी नजरिए की अक्कासी नहीं करती। जुल्म, ज्यादती, कुटिल चालें, बेगुनाहों का कत्ल आखिर इस्लाम की शिक्षा कबसे हो गए? पाकिस्तान को तो इस्लाम को नए सिरे से समझने की जरूरत है।

पाकिस्तान की आर्थिक तंगी किसी से छुपी नहीं है। पाकिस्तान भी कोरोना महामारी की भयंकर चपेट में है। प्रधानमंत्री इमरान खान को पाकिस्तान में कोरोना संकट का मुकाबला करने के लिए तीन अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ १५० करोड़ डॉलर के ऋण समझौतों पर हस्ताक्षर करना पड़ा है। इमरान खान ने विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और एशियाई इंप्रâास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बैंक के साथ कर्ज के समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। पाकिस्तान में कोरोना मामलों की कुल संख्या लगभग पौने दो लाख तक पहुँचने को है। पाकिस्तान में अब तक लगभग साढ़े तीन हजार के आसपास मौतें हो चुकी हैं। लेकिन बजाय इस संकट में देश के साथ खड़े होने के उस देश के आतंकी खून बहाने को तरजीह दे रहे हैं। दरअसल पाकिस्तान ने जो बोया है वही काट रहा है। आतंकियों की पुश्तपनाही का नतीजा है कि उसके द्वारा पाले गए संगठन अब अपने घर को ही नहीं बख्श रहे। इमरान भले ही कराची ब्लास्ट का ठीकरा हिंदुस्थान पर फोड़ने की कोशिश करें लेकिन वह जानते हैं कि सब किया धरा उनके देश का ही है। मजहबी उन्माद का भस्मासुर अब पाकिस्तान की ही कब्रगाह बन रहा है। बेकसूर आम नागरिकों के कत्ल के बाद भले ही इमरान और उनका देश मरहूमीन का मातम करे, लेकिन उन्हें यह पुरानी कहावत नहीं भूलनी चाहिए, `बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहां से होय।’