ब्रह्मोस बरसेंगे!, सेना के पास सभी विकल्प खुले

पुलवामा हमले का मुहंतोड़ जवाब देने की खातिर ‘सजा’ और ‘प्रतिकार’ के बतौर भले ही हिंदुस्थान, पाकिस्तान पर हमला नहीं करेगा लेकिन इतना अब सुनिश्चित हो गया है कि सीमाओं पर कारगिल सरीखे लघु युद्ध हो सकते हैं। ऐसा होने की संभावना इसलिए व्यक्त की जाने लगी है क्योंकि केंद्र की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद भारतीय सेना हमले का जवाब देने की तैयारी में है। इस बार देश की जनता की निगाहें ब्रह्मोस और पृथ्वी मिसाइलों पर लगी हुई हैं। क्योंकि ये कम दूरी के अचूक शस्त्र हैं और आतंकियों के ठिकानों को नष्ट करने में पूरी तरह सक्षम हैं। अगर सेना ने इनका विकल्प चुना तो फिर तय है कि पाकिस्तान पर ब्रह्मोस बरसेंगे।
आतंकियों के प्रशिक्षण केंद्रों को नष्ट करने में ब्रह्मोस इसलिए सबसे कारगर है क्योंकि यह जमीन से जमीन तक सटीक और सबसे तेज गति से मार करता है। पृथ्वी मिसाइलें भी इस काम को अंजाम देने में सक्षम हैं। मिसाइलों से यह हमला पूरी तरह से अमेरिकी तर्ज पर करने की बात कही जा रही है। ऐसी सलाह देनेवालों का कहना है कि पीओके के भीतर स्थित प्रशिक्षण केंद्र अधिक गहराई में नहीं हैं और ब्रह्मोस व पृथ्वी जैसी मिसाइलें उन पर पूरी तरह से अचूक निशाना लगाने में अपनी अहम भूमिका निभा सकती हैं।
पाकिस्तान को सबक सिखाया जाएगा और मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा, यह पूरी तरह तय है। सेना पाकिस्तान को जवाब देने के लिए रणनीति बना रही है। पाकिस्तान की ठुकाई करने के लिए सेना के पास ४ विकल्प हैं। इनमें से हर विकल्प पर गहन विचार-विमर्श जारी है।
रक्षाधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कार्रवाई के लिए केंद्र की ओर से इस संबंध में हरी झंडी मिल चुकी है। सेना जवाबी कार्रवाई करने की तैयारी में जुटी हैै। हालांकि सेना की नार्दन कमान में तैनात कई अफसर भी इस प्रकार के संकेत दे रहे हैं। मकसद पाकिस्तान को सजा देना है। सैनिक मोर्चों पर जो भी सुझाव जवाब देने के लिए दिए जा रहे हैं, उनका परिणाम अंत में भरपूर युद्ध के रूप में ही निकलता है।
इनमें ब्रह्मोस व पृथ्वी मिसाइल के इस्तेमाल के अलावा तीन प्रकार के अन्य विकल्प भी सुझाए जा रहे हैं। इनमें एक भारतीय सेना को खुली छूट देने की है। अर्थात सर्जिकल स्ट्राइक की तरह भारतीय सेना एलओसी को पार कर २४ घंटों के भीतर आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों को नष्ट कर वापस लौटे। यह कमांडो कार्रवाई होगी, जबकि सभी प्रशिक्षण केंद्र अभी भी एलओसी के पार पाक कब्जेवाले कश्मीर में ही हैं। पर पहली सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी सेना के चौकन्ने हो जाने के बाद इस विकल्प को व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है।
सेना को बोफोर्स तोपों का खुल कर इस्तेमाल करने की इजाजत देने का विकल्प भी है। इसके अतंर्गत एलओसी से १८ से २० किमी की दूरी पर स्थित कुछ प्रशिक्षण केंद्रों पर मोर्टार, बोफोर्स तोपों से हमला किया जाए। बोफोर्स तोप पहाड़ों में २८ से ३० किमी की दूरी तक मार कर सकती हैं। एलओसी पर बोफोर्स तोपों की तैनाती फिर से हो चुकी है।
सूत्रों के अनुसार इनके अतिरिक्त भारतीय वायुसेना का इस्तेमाल कर प्रशिक्षण केंद्रों को उड़ाने का विकल्प भी सैनिक कार्रवाई के तहत खुला है। प्रशिक्षण केंद्रों पर हवाई हमले किए जाने का जो विकल्प दिया गया है उसके अंतर्गत यह कहा जा रहा है कि मिराज-२००० तथा सुखोई विमानों का इस्तेमाल किया जाए जो अचूक निशाना साधने तथा गहराई तक हमला करने में सक्षम माने जाते हैं। हालांकि इसके लिए दोनों किस्म के विमानों को जम्मू-कश्मीर के सभी सैनिक हवाई अड्डों का इस्तेमाल करना होगा।

विशेषताएं
 यह एक क्रूज मिसाइल है।
 यह हवा में ही मार्ग बदल सकती है और
चलते फिरते लक्ष्य को भी भेद सकती है।
 इसे वर्टिकल या सीधे वैâसे भी दागा जा
सकता है।
 यह १० मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर
सकती है और रडार की पकड़ में नहीं आती।
 रडार ही नहीं, किसी भी अन्य मिसाइल
पहचान प्रणाली को धोखा देने में सक्षम।
इसको मार गिराना लगभग असंभव है।
 अमेरिकी ‘टॉम हॉक’ से दोगुनी तेजी से
वार कर सकती है।
 आम मिसाइलों के विपरीत यह मिसाइल
हवा को खींच कर रेमजेट तकनीक से ऊर्जा
प्राप्त करती है।
 यह १,२०० यूनिट ऊर्जा पैदा कर अपने
लक्ष्य को तहस-नहस कर सकती है।

पलक झपकते दुश्मन साफ
ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल है।
दुनिया की सबसे तेज गतिवाली मिसाइल।
हिंदुस्थान-रूस का संयुक्त निर्माण।
टॉप स्पीड मैक ४ (करीब ४,००० किमी प्रति घंटा)
क्षमता २०० किलोग्राम विस्फोटक की।
३०० से ५०० किलोमीटर तक मारक क्षमता।
१४ किलोमीटर की ऊंचाई तक जा सकता है।
थल, जल और वायु तीनों जगह से छोड़ा जा सकता है।
पनडुब्बी से भी छोड़ा जा सकता है।
वजन ३,००० किलो है। – वायु संस्करण २,५०० किलो का।
लंबाई ८.४ मीटर व व्यास ०.६ मीटर।