ब्लास्ट पीड़ित का दर्द! जख्मों से ज्यादा चोट पहुंचाती है उपेक्षा

मुंबई सहित पूरी दुनिया को दहलानेवाले ९३ सीरियल बम ब्लास्ट को आज २५ साल पूरे हो गए हैं, लेकिन इस ब्लास्ट के पीड़ित आज भी इंसाफ के लिए भटक रहे हैं। घायलों को आज तक मुआवजा नहीं मिला है। ब्लास्ट के घायलों में शामिल एक पीड़ित कीर्ति अजमेरा का कहना है कि बम विस्फोट से मिले जख्मों से ज्यादा तकलीफ अपनी सरकारों की उपेक्षा पहुंचाती है। अजमेरा का आरोप है कि सरकारों ने ९३ सीरियल ब्लास्ट और २६/११ जैसे आतंकी हमलों से कुछ नहीं सीखा।
बता दें कि पीड़ितों को मुआवजे सहित अन्य मांगों के लिए पिछले २५ वर्षों से संघर्ष कर रहे कीर्ति अजमेरा ने कल एक प्रेस कॉन्प्रâेंस में अपनी व्यथा सुनाई। १२ मार्च, १९९३ को मुंबई स्टॉक एक्सचेंज के पास हुए बम ब्लास्ट में बुरी तरह घायल हुए अजमेरा का अब तक ४० से ज्यादा बार ऑपरेशन हो चुका है लेकिन अभी भी वे पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो सके हैं। अजमेरा ने कहा कि विस्फोट में जो मर गए उनके परिजनों को सरकार ने २-२ लाख रुपए मुआवजा दिया लेकिन जो घायल हुए थे, उनको कुछ नहीं मिला, जबकि मेरे जैसे कई लोगों को आज भी अपने इलाज का खर्च खुद ही वहन करना पड़ रहा है। अजमेरा का कहना है कि सरकार को ऐसे मामलों में घायलों के इलाज और मृतकों के मुआवजे की जिम्मेदारी संबंधित उद्योग समूह, उद्योगपतियों पर डालनी चाहिए, जिनके परिसर में बम विस्फोट हुआ होगा। इससे संबंधित, मॉल, होटल, उद्योग समूह या इंडस्ट्री के मालिक खुद अपने स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था, घायलों को समय पर इलाज एवं मुआवजे के लिए आगंतुकों-कर्मचारियों के बीमा आदि का इंतजाम करके रखेंगे। अजमेरा का आरोप है कि ९३ और २६/११ के बाद भी मुंबईकर पूरी तरह महफूज नहीं हुए हैं। आतंकियों को रोकना तो दूर की बात है, आतंकी हमलों के बाद दोषियों को तुरंत पकड़ने का तंत्र भी हमारे पास नहीं है। दोषियों की शिनाख्त में कई सप्ताह या महीने लग जाते हैं, तब तक दोषी बहुत दूर निकल जाते हैं क्योंकि अभी भी हमारे रेलवे स्टेशन, मुख्य सड़कें, हाइवे या भीड़-भाड़वाले इलाके, बाजार पूरी तरह सीसीटीवी कैमरों की जद में नहीं आए हैं। हाइवे पर पुलिस नाकाबंदी तो करती है लेकिन उनका निशाना हेलमेट, लाइसेंस, पीयूसी के बगैर तथा शराब पीकर या तेज रफ्तार से वाहन चलानेवाले लोग होते हैं। पीड़ितों को समय पर राहत एवं मुआवजे आदि सहित आतंकी हमलों को रोकने संबंधित उपायों के लिए सरकार को एक समिति बनानी चाहिए, जिसमें बम ब्लास्ट-आतंकी हमलों के पीड़ितों को शामिल करना चाहिए, ऐसी मांग अजमेरा ने सरकार से की है।