" /> बड़ी चूक! एक और मामले में छूट गया ‘आतंकी’

बड़ी चूक! एक और मामले में छूट गया ‘आतंकी’

कोर्ट ने किया निर्दोष घोषित
वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई पेशी

किसी आतंकी को रोकना या नाकाम करना पुलिस एवं जांच एजेंसियों के लिए एक कठिन चुनौती की तरह होता है। किसी आतंकी हमले के बाद उस हमले के जिम्मेदार लोगों की शिनाख्त और धरपकड़ उससे भी बड़ीr चुनौती होती है लेकिन इन सबसे कठिन होता है आतंकवाद पैâलाने के आरोप में पकड़े गए आरोपियों को अदालत में दोषी सिद्ध करवाना। क्योंकि खौफ के कारण या तो कोई गवाह पुलिस को नहीं मिलता है या फिर धमका कर उन्हें तोड़ दिया जाता है। ऐसी वजहों से आतंकियों का छूट जाना देश के लिए घातक हो सकता है। मुंबई-हैदराबाद सहित देशभर में आतंकी साजिशों में शामिल रहे ऐसे ही एक संदिग्ध को दोषी सिद्ध करवाने में पुलिस एवं जांच एजेंसियां चूक गर्इं। हैदराबाद में गणेश उत्सव के दौरान आतंकी हमले की साजिश रचाने के मामले में ८० वर्षीय सैयद अब्‍दुल करीम उर्फ टुंडा को कल कोर्ट ने आरोपों से मुक्त कर दिया।

हिंदुस्थान के साथ सीधी लड़ाइयों में ४ बार मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान यह समझ चुका है कि वह हिंदुस्थान से सीमा पर जंग लड़कर जीत नहीं सकता है। इसलिए वह छद्म युद्ध यानी हिंदुस्थान में आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देता रहा है। धर्म के नाम पर गुमराह होनेवाले लोग पाकिस्तान की इस नापाक हरकत में उसका साथ देते हैं। इस काम के लिए पाकिस्तान डॉक्टर बम के नाम से मशहूर १९९३ मुंबई बम ब्लास्ट के आरोपी जलीश अंसारी और सैयद अब्‍दुल करीम उर्फ टुंडा जैसे हिंदुस्थानी नागरिकों को मोहरे के रूप में इस्तेमाल करता।
हिंदुस्थान के ऐसे ही दुर्दांत आतंकियों में शामिल अब्‍दुल करीम उर्फ टुंडा का ४० से अधिक बम धमाकों के पीछे हाथ माना जाता है। २६/११ बम धमाकों के लिए जिम्‍मेदार २० आतंकियों में एक अब्‍दुल करीम भी है। अब्दुल करीम का लालन-पालन हिंदुस्थान में ही हुआ लेकिन बाद में वह पहले पाकिस्तान और फिर वहां से बांग्लादेश चला गया। ९० के दशक में वह बांग्लादेश से हिंदुस्थान लौट आया था और यहां आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने लगा। वह २६/११ के मुंबई हमले में संलिप्त उन आतंकियों में शामिल माना जाता है, जिन्हें सौंपने की मांग पाकिस्तान से हिंदुस्थान लगातार करता रहा है। अब्‍दुल करीम उर्फ टुंडा ने कथित रूप से युवाओं को हिंदुस्थान में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए प्रशिक्षण दिया था। वर्ष १९९८ में एक पाकिस्तानी नागरिक जुनैद के साथ उसने हैदराबाद में कथित रूप से गणेश उत्सव के दौरान आतंकवादी हमला करने की योजना बनाई थी। इस मामले में कुल २८ आरोपित थे। इनमें से कुछ को गिरफ्तार किया गया और सजा हुई, जबकि बाकी फरार हैं। टुंडा को १६ अगस्त, २०१३ को हिंदुस्थान-नेपाल सीमा स्थित बनबासा से केंद्रीय एजेंसी ने गिरफ्तार किया था। इस मामले में हैदराबाद की नामपल्ली कोर्ट में अब्‍दुल करीम के खिलाफ सलीम जुनैद के साथ मिलकर आतंकी हमले की साजिश रचने का मामला चल रहा है। उस पर आपराधिक साजिश रचने, हथियार और गोला-बारूद रखने के आरोप हैं। उसने कुछ आरोपियों को बम बनाने का प्रशिक्षण भी दिया था। आतंकवाद से जुड़े एक अन्य मामले में गाजियाबाद जेल में उम्रवैâद की सजा काट रहे लश्कर-ए-तैयबा के हार्डकोर आतंकी टुंडा को कल वीडियो कांप्रâेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने आतंकी सैयद अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को वर्ष १९९८ के सिलसिलेवार धमाके का षड्यंत्र रचने के आरोपों से बरी कर दिया है। मेट्रोपोलिटन सत्र न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष टुंडा के खिलाफ समुचित साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया।
यह कोई पहला मामला नहीं है जब साक्ष्यों के अभाव में लश्कर-ए-तैयबा के संदिग्ध बम विशेषज्ञ अब्दुल करीम टुंडा को उसके तीन साथियों के साथ दिल्ली की अदालत ने ६ मार्च २०१६ को बरी किया था उस पर १९९७ में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिकों को हिंदुस्थान में घुसाने का आरोप था। यह दिल्ली पुलिस द्वारा टुंडा के खिलाफ दायर चौथा और अंतिम मामला था, जिसमें उसे आरोप मुक्त किया गया, इससे पहले वर्ष १९९६ में टुंडा के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। टुंडा के अलावा अदालत ने उसके ससुर मोहम्मद जकारिया और उनके दो करीबी सहायकों अलाउद्दीन और बशीरुद्दीन को मामले में आरोपमुक्त करार दिया था। हालांकि फिलहाल वह गाजियाबाद जेल में सजा काट रहा है। १९९६ में हरियाणा के सोनीपत में दो बम धमाके हुए। एक सोनीपत बस स्‍टैंड के पास दूसरा गीता भवन चौक पर मिठाई की दुकान के पास। इस मामले में धमाके के २१ साल बाद अक्‍टूबर, २०१७ में सोनीपत की अदालत ने अब्‍दुल करीम को उम्रकैद की सजा का पैâसला सुनाया था।