बढ़ती जागरूकता सिमटता एड्स

शहर में एचआईवी / एड्स के संक्रमण को रोकने के लिए मनपा के मुंबई जिला एड्स नियंत्रण संगठन (एमडैक्स) के निरंतर प्रयासों का अब सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है। एमडैक्स से मिले आंकड़ों की मानें तो वर्ष २०१३-१४ से वर्ष २०१७-१८ तक एचआईवी से ग्रसित होनेवाले नए मामलों में ३३.६ प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। इतना ही नहीं एचआईवी के साथ जी रही गर्भवती महिलाओं से पैदा होनेवाली एचआईवी पॉजिटिव शिशुओं के ग्राफ में भी पिछले पांच वर्षों में ४१ प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। एचआईवी से संक्रमित होने का सबसे अधिक खतरा उच्च जोखिम समूह में होता है, जैसे देह व्यापार करनेवाली महिलाएं, पुरुषों के साथ संबंध बनानेवाले पुरुष और तृतीयपंथी। एमडैक्स की मानें तो पांच वर्ष में देह व्यापार करनेवाली महिलाओं में ५४.४ प्रतिशत, पुरुष के साथ संबंध बनानेवाले पुरुष में २०.७ प्रतिशत और तृतीयपंथियों में एचआईवी से संक्रमित होने का प्रमाण ४२.९ प्रतिशत घटा है। इस संदर्भ में एमडैक्स की एडिशनल प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. श्रीकला आचार्य ने कहा कि एचआईवी से संक्रमित होनेवालों का प्रमाण मुंबई सहित पूरे देश में कम हुआ है। हमें २०२० तक एचआईवी से होनेवाले संक्रमण का ९० प्रतिशत तक निवारण करना है। इसी कड़ी में हम इस बार `नो योर स्टेटस’ यानी अपनी स्थिति पता करो नामक एक मुहिम चलाएंगे। इस मुहिम के तहत लोग मुंबई में किसी भी सरकारी व मनपा डिस्पेंसरी, मैटरनिटी होम और अस्पतालों में मुफ्त में एचआईवी की जांच की जाएगी। जांच में यदि एचआईवी होने की बात सामने आती है तो मरीज का तुरंत उपचार शुरू किया जाएगा और दूसरे किसी को संक्रमित होने से बचाया जा सकता है।
संक्रमण का मुख्य कारण
एमडैक्स से मिले आंकड़ों के अनुसार मुंबई में अप्रैल २०१७ से मार्च २०१८ तक कुल ५ हजार ७०२ लोगों में एचआईवी संक्रमित होने की पुष्टि हुई। ९२.२ प्रतिशत लोगों में एचआईवी से संक्रमित होने का प्रमुख कारण असुरक्षित यौन संबंध है। ३.७ प्रतिशत मामलों में एचआईवी पॉजिटिव माता से उनके शिशुओं को, ०.५ प्रतिशत को संक्रमित सुई से और ०.१ प्रतिशत को संक्रमित रक्त के कारण एचआईवी से ग्रसित होने की बात सामने आई है।
अधूरा इलाज बनी समस्या
एचआईवी से संक्रमित होनेवाले नए मामलों में भले ही मनपा को सफलता मिली है लेकिन अधूरा इलाज छोड़नेवाले मरीजों की समस्या अब भी बरकरार है। वर्ष २०१७-१८ में दवा के लिए रजिस्टर किए गए ७ हजार ४२० मरीजों में से ९०६ मरीज इलाज अधूरे में ही छोड़ कर गायब हो गए। ऐसे में मरीजों को इलाज चालू रखने के लिए मनपा द्वारा प्रेरित भी किया जाता है।

कैदियों को मिलेगी जेल में डोज
एचआईवी / एड्स से ग्रसित वैâदियों को अब तक दवाइयों के लिए जेजे अस्पताल का चक्कर काटना पड़ता है। कभी पुलिस बल न होने और अन्य कई कारणवश मरीज समय पर दवा लेने नहीं पहुंच पाते हैं। इसी के मद्देनजर भायखला और आर्थर रोड जेल में लिंक एंटि-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) केंद्र की शुरुआत की जाएगी। इस सेंटर के शुरू होने के बाद उन्हें जेल के अंदर ही दवाइयां मिल जाएंगी। इसकी शुरुआत दिसंबर के पहले सप्ताह तक हो जाएगी।