" /> भतीजे के लिए बढ़ी चाचा की चाहत!, शिवपाल और अखिलेश की नजदीकी से भाजपा की भौंएं तनीं

भतीजे के लिए बढ़ी चाचा की चाहत!, शिवपाल और अखिलेश की नजदीकी से भाजपा की भौंएं तनीं

यूपी में चाचा-भतीजे के बीच जब ३६ का आंकड़ा हुआ था तो सपा की लुटिया डूब गई थी। न सिर्फ लुटिया डूबी बल्कि भाजपा ने अकेले के दम पर सपा और बसपा दोनों को ही धूल चटाते हुए भारी बहुमत से सरकार बना ली थी। चाचा यानी शिवपाल सिंह यादव और भतीजा यानी अखिलेश यादव। अब कुछ देर से ही सही, चाचा-भतीजा दोनों को ही समझ में आ गया है कि आपसी फूट से राजनीतिक नुकसान बहुत ज्यादा है। अगर यूपी की राजनीति में एक बार फिर से पकड़ बनानी है तो फिर आपसी मतभेद भुलाने ही होंगे और एक होना ही पड़ेगा तभी भाजपा को चुनौती दी जा सकती है। शायद यही कारण है कि चाचा के दिल में भतीजे के लिए चाहत पैदा हुई है। भतीजे ने भी चाचा के लिए अपना प्यार छलका दिया है। अब जाहिर है कि चाचा-भतीजे के पास आने की खबर से भाजपा की भौंएं तन गई हैं।

खबर है कि शिवपाल ने बड़ा कदम बढ़ाया है। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को एक पत्र लिखा है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि अब सपा में उनकी वापसी तय हो गई है।सपा नेता आजम खां के जेल जाने के बाद पार्टी को प्रदेश में जमीन से जुड़े दमदार नेता की कमी खल रही है। पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के अस्वस्थ होने के बाद से मोर्चा अखिलेश यादव अकेले ही संभाल रहे हैं। इसी बीच सपा ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर शिवपाल की विधानसभा की सदस्यता रद करने की याचिका वापस ले ली। इसके जवाब में शिवपाल ने भी पत्र भेजकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का आभार जताया है। यह पत्र २९ मई को लिखा गया था जो अब वायरल अब हो रहा है।

इधर सपा के सूत्र बता रहे हैं कि अखिलेश और चाचा शिवपाल के बीच रिश्तों की कड़वाहट कम होती दिख रही है। इसीलिए शिवपाल ने पत्र लिखकर अखिलेश की तारीफ करते हुए उन्हेंं थैंक्स कहा। शिवपाल ने इस चिट्ठी में अखिलेश के नेतृत्व की सराहना करते हुए लिखा, निश्चय ही यह मात्र एक राजनीतिक परिघटना नहीं है, बल्कि आपके इस तरह के स्पष्ट, सार्थक व सकारात्मक हस्तक्षेप से राजनीतिक परीधि में आपके नेतृत्व में एक नव राजनीतिक विकल्प व नवाक्षर का जन्म होगा।

इसी वर्ष होली पर सैफई में आयोजित कार्यक्रम में मुलायम और अखिलेश के साथ शिवपाल भी थे। होली मिलन कार्यक्रम के दौरान ही अखिलेश ने शिवपाल के पैर छूकर आर्शीवाद लिया था। तभी से इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि दोनों के रिश्तों में कुछ सुधार हुआ है। उसी कार्यक्रम में शिवपाल ने मुलायम के साथ रामगोपाल के भी पैर छूकर आशीर्वाद लिया था।

गौरतलब है कि यूपी में मुलायम तथा अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे शिवपाल ने विधानसभा चुनाव २०१७ के पहले सपा छोड़ दी थी। इसके बाद अपनी पार्टी बनाकर लोकसभा चुनाव २०१९ में कई जगह पर प्रत्याशी भी उतारे थे। तकनीकी रूप से शिवपाल यादव अभी एसपी से असंबद्ध विधायक हैं। वर्ष २०१७ में यूपी विधानसभा चुनावों के समय से ही मुलायम सिंह यादव के परिवार में बिखराव शुरू हो गया था।
इस टकराव का नतीजा ये हुआ कि शिवपाल को सपा से बाहर होना पड़ा और उन्होंने अपनी अलग पार्टी बना ली। लोकसभा चुनाव २०१९ में शिवपाल ने भतीजे अक्षय यादव के खिलाफ फिरोजाबाद से ताल ठोकी थी। शिवपाल ने अक्षय के वोट काटकर भाजपा के चंद्रसेन जादौन को जिता दिया था। लोकसभा चुनाव में सपा को काफी नुकसान पहुंचा और पार्टी ने ४ सितंबर २०१९ को शिवपाल की विधानसभा सदस्यता रद करने की याचिका दायर की थी। इस याचिका का परीक्षण हो ही रहा था कि इस बीच रामगोविंद चौधरी ने पत्र लिख कर कहा कि वह याचिका वापस लेना चाहते हैं।