भाइंदर मनपा को सता रहा हिसाब परीक्षा आई तो बांट रहे किताब

मीरा-भाइंदर मनपा के शिक्षण विभाग का काम कितना ढीला-ढाला चल रहा है, इसका पता इस बात से चलता है कि देश के सभी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई जहां अंतिम चरण में है, वहीं मीरा-भाइंदर शिक्षण विभाग मनपा स्कूलों के छात्रों को अब स्कूली ड्रेस और किताब बांट रही है।
ज्ञात हो कि मीरा-भाइंदर महानगरपालिका प्रति वर्ष करोड़ों रुपए शिक्षा के नाम पर खर्च करती है। मनपा अपने खर्चे से मनपा स्कूलों में पढ़नेवाले बच्चों को प्रति वर्ष स्कूली ड्रेस, किताब इत्यादि उपलब्ध कराती है। इस वर्ष जब स्कूलों का पाठ्यक्रम समाप्त होने को है और एक महीने बाद छात्रों की वार्षिक परीक्षा है तब मीरा-भाइंदर के मनपा स्कूलों में छात्रों को स्कूल ड्रेस, किताब इत्यादि अभी दिया जा रहा है। मीरा-भाइंदर महानगरपालिका द्वारा संचालित कुल ३६ स्कूल हैं जिसमें मराठी, हिंदी, गुजराती, उर्दू माध्यम से शिक्षा दी जाती हैै। इन सभी स्कूलों में पहली कक्षा से लेकर कक्षा आठवीं तक में कुल ७,८३४ हजार
विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं। इन स्कूलों में पढ़नेवाले अधिकतर बच्चे गरीब घरों के होते हैं, जिनके अभिभावक निजी स्कूलों का खर्च नहीं उठा पाते हैं और अपने बच्चों को मनपा के स्कूल में भेजते हैं। मनपा विद्यार्थियों को प्रति वर्ष किताबें, स्कूल का यूनिफार्म, पानी की बोतल मुफ्त देती है पर जूते और स्कूल बैग के नाम पर हर विद्यार्थी से ७१० रुपए लेती है।
आगे गलती नहीं होगी
मनपा उपायुक्त दीपक पुजारी पूरे मामले में लीपा-पोती करते हुए कहते हैं कि देर तो हुई है पर आगे से नहीं होगी।
सही समय पर उपयोग नहीं
इस मामले में शिवसेना नगरसेविका नीलम ढवन का कहना है कि मनपा हर वर्ष करोड़ों रुपए शिक्षण सामग्री पर खर्च करती है लेकिन इसका उपयोग सही समय पर नहीं होता है।