भाग्यग्रहण दोष की  पूजा जरूर कराएं!

 

मैं व्यापार करता हूं। प्रारंभ में ठीक रहता है। बाद में हानि होने लगती है कोई उपाय बताएं?
-सूरज पंचाल
(जन्म- ३ नवंबर १९७३, समय सारणी ६.३० बजे, पाली-राजस्थान)
सूरज जी, आपका जन्म मेष लग्न एवं मकर राशि में हुआ। लग्नेश अष्टमेश मंगल स्वगृही होकर लग्न में ही बैठकर सुख भाव को नीच की दृष्टि से देख रहा है तथा सप्तम भाव को एवं अष्टम भाव को स्वगृही दृष्टि से देखकर आपको पुरुषार्थी तो बनाया है लेकिन अष्टमेश होने के दोष के कारण आपके व्यापार या कार्य क्षेत्र में स्थिरता नहीं प्राप्त होने दे रहा है। भाग्येश बृहस्पति नीच राशि का होकर कर्म भाव में बैठा है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसा आया है कि ‘स्थान हानि करो जीव:’ अर्थात बृहस्पति जिस स्थान पर रहता है। उस स्थान की हानि करता है तथा जहां देखता है, उसे वृद्धि करता है और भाग्य भाव पर राहु बैठ करके आपकी कुंडली में भाग्यग्रहण‌ दोष भी बना रहा है। व्यापार को स्थिर करने के लिए वैदिक विधि से भाग्यग्रहण दोष की पूजा जरूर कराएं।
गुरु जी, मेरी राशि क्या है? कुंडली में दोष क्या है?
-जयप्रकाश चौकसे
(जन्म- २४ जून १९९४, समय ५.१० बजे, इंदौर मध्य प्रदेश)
जयप्रकाश जी, आपका जन्म मिथुन लग्न और धनु राशि में हुआ है। आपकी कुंडली में भाग्येश भाग्य भाव में बैठकर आपको भाग्यशाली तो बनाया है। आपकी कुंडली में द्वितीय भाव का स्वामी होकर सप्तम भाव में बैठकर प्रबल मारकेश का काम कर रहा है एवं आपकी कुंडली में शनि अष्टमेश भी है। इस समय आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती भी चल रही है। अत: स्वास्थ्य एवं खानपान पर विशेष ध्यान दें तथा वाहन से बचने का प्रयास करें, नहीं तो किसी प्रकार की दुर्घटना हो सकती है क्योंकि आपकी कुंडली में पंचम भाव पर गुरु के साथ राहु बैठकर चांडाल योग भी बना रहा है।
गुरु जी, मेरी कुंडली में दोष क्या है तथा मैं परेशान बहुत रहता हूं? -शैलेंद्र सिंह
(जन्म- २४ दिसंबर १९६८, समय ४.१५ भोपाल-मध्य प्रदेश)
शैलेंद्र जी, आपका जन्म वृश्चिक लग्न एवं कुंभ राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का गहन अध्ययन किया गया। लग्नेश एवं रोगेश मंगल बारहवें भाव में बैठ कर आपको समय-समय पर व्यग्रता एवं परेशानी पैदा कर देता है। बारहवें भाव का मंगल व्यक्ति को किसी षड्यंंत्र में भी डाल देता है। लग्न बारहवें भाव में बैठकर पराक्रम भाव को उच्च की दृष्टि से देख करके आपको पुरुषार्थी तो बनाया है लेकिन रोग भाव एवं सप्तम भाव को भी पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। अत: रोग भाव देखने पर रक्त से संबंधित रोग भी पैदा कर सकता है तथा सप्तम भाव से पत्नी का विचार एवं स्वास्थ्य का विचार किया जाता है। अत: आप अपने स्वास्थ्य के प्रति निरंतर चिंतित भी रहते होंगे एवं धर्म-पत्नी का भी स्वास्थ्य प्रतिकूल ही होना चाहिए, पंचम भाव से संतान के लिए विचार किया जाता है तथा संतान के लिए भी हानि कर सकता है। मानसिक व्यग्रता को समाप्त करने के लिए मोती जरूर धारण करें।
गुरु जी, मेरी राशि क्या है? समय किस प्रकार चल रहा है?
-विवेक जायसवाल
(जन्म-२० जुलाई १९९७, समय सायं ७.३० बजे, इलाहाबाद-उत्तर प्रदेश)
विवेक जी, आपका जन्म मकर लग्न एवं मकर राशि में हुआ है। लग्न में ही पराक्रमेश एवं द्वादषेश होकर बृहस्पति नीच राशि का होकर बैठा है, जो समय-समय पर आपके मनोबल को भी कम करता है। शनि ग्रह से शुभ फल प्राप्त करने के लिए पीपल के पेड़ की परिक्रमा एवं हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करें।
गुरुजी, पढ़ने में मन नहीं लगता है। कोई उपाय बताएं?
-सुचित्रा दुबे
(जन्म- १४ अक्टूबर २०००, समय प्रात: ८.३५ बजे, भदोही-यूपी)
सुचित्रा जी, आपका जन्म वृश्चिक लग्न मेष राशि में हुआ है। लग्नेश रोगेश होकर मंगल दशम भाव में बैठकर आपको भाग्यशाली तो बना रहा है लेकिन आपकी कुंडली में चंद्र ग्रह छठे भाव में बैठकर आपके मन की एकाग्रता को समाप्त कर रहा है तथा किसी के प्रति जल्दी विश्वास भी पैदा करके आपको कार्य के प्रति लापरवाह बना देता है। आपकी कुंडली में द्वितीय भाव में केतु बैठा है तथा अष्टम भाव में राहु बैठकर कालसर्प योग बना रहा है। जीवन की अन्य गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण जरूर बनवाएं।