भाजपा सरकार में ‘परमेश्वर’ जेल में, बजरंगी को कमल बाधा

राम सेतु को लेकर भाजपा हमेशा से कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करती रही है। उसी राम सेतु को बचाने के लिए बजरंग दल ने कभी आंदोलन किया था। उस आंदोलन से जुड़े परमेश्वर पाठक को मात्र भाजपा के राज में प्रताड़ना झेलनी पड़ी है। भाजपा सरकार होने के बावजूद ‘परमेश्वर’ को जेल की हवा खानी पड़ी है। भाजपा सरकार के कार्यकाल में हिंदूवादी संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं की क्या स्थिति है? इसकी हकीकत सामने आ गई है। ‘बजरंगी’ को कमल बाधा होने के चलते ही बजरंग दल के कार्यकर्ता को पुलिस ने न केवल गिरफ्तार किया बल्कि शुक्रवार को गिरफ्तार किए जाने के बाद उसे दो दिन तक आर्थर रोड जेल की हवा खानी पड़ी। भाजपा सरकार के रहते उनके साथ घटी इस घटना के बाद हिंदूवादी संगठनों के लोग कहने को मजबूर हैं कि भाजपा सरकार में ‘परमेश्वर’ जेल में।
परमेश्वर पाठक ने ‘दोपहर का सामना’ को बताया कि इस मामले में विलेपार्ले से भाजपा के विधायक पराग अलावनी भी आरोपी हैं पर अपने विधायक को बचाने के लिए भाजपा ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया और मुझ जैसे छोटे से कार्यकर्ता को जेल में यातना सहने के लिए छोड़ दिया।
बता दें कि वर्ष २००८ में राम सेतु के मुद्दे को लेकर देशभर में भाजपा और हिंदुत्ववादी संगठनों ने जमकर आंदोलन किया था। मुंबई में भी विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने वकोला में हाई-वे पर रास्ता रोको आंदोलन किया था। आंदोलन में सहभागी परमेश्वर पाठक ने बताया कि उस समय पराग अलवानी भी उनके साथ आंदोलन में सहभागी हुए थे। आंदोलन के दौरान पुलिस ने उनको, पराग अलावनी और अन्य कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां सभी को जमानत मिल गई। नवंबर २०१७ में कोर्ट ने सभी ५६ आरोपियों के खिलाफ अरेस्ट वॉरंट निकाला। परमेश्वर ने कहा कि पुलिस ने ५ बार विधायक पराग अलावनी को बताया कि अरेस्ट वॉरंट निकल गया है लेकिन विधायक जी ने एक बार भी हमसे संपर्क नहीं किया। नतीजतन, पुलिस ने २३ नवंबर की रात को मुझे और कुछ कार्यकर्ताओं को अरेस्ट कर लिया। राम के लिए हमें कितनी बार भी जेल जाना पड़े उसका हमें कोई गम नहीं है लेकिन हमारे लोगों को वॉरंट की बात पता होने के बावजूद उन्होंने हमें नहीं बताया अन्यथा हम भी बेल के लिए अपील कर देते है। बेवजह हमें जेल जाना पड़ा व पुलिस की यातना सहनी पड़ी। हमने पुलिस से भी कहा कि जब उन पर भी यही आरोप है तो उन्हें क्यों नहीं अरेस्ट किया गया? तो पुलिस ने कहा कि उनके लिए उन्हें विधिमंडल से इजाजत लेनी होगी। इससे यह साफ है कि वे भाजपा के विधायक हैं इसलिए बच गए हमारे प्रति उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। हमारी तरह एक कार्यकर्ता और अब विधायक होने के नाते उनका यह फर्ज था कि हमें इत्तिला तो कर देते। बचाना तो दूर की बात संकट की घड़ी में उन्होंने हमारा फोन तक नहीं उठाया। इससे यह सवाल उठता है कि हिंदुत्व का दम भरनेवाली भाजपा क्या सच में हिंदुत्व के साथ है? इस संदर्भ में जब विलेपार्ले से भाजपा के विधायक पराग अलावनी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ‘मैं भी एक कार्यकर्ता के रूप में आंदोलन में शामिल था। मैं आंदोलन का नेतृत्व नहीं कर रहा था। जो मामला दूसरों पर दर्ज हुआ है वही मुझ पर भी हुआ है। मुझे भी वॉरंट के बारे में तब पता चला जब अन्य कार्यकर्ताओं को पता चला। सभी ५६ कार्यकर्ताओं को सूचित करने की मेरी जिम्मेदारी नहीं है। मैंने उनके संगठन से संबंधित लोगों को सूचित कर दिया था अब उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं तक बात नहीं पहुंचाई तो मैं कुछ नहीं कर सकता।