भिवंडी का भयानक सच! कूड़े-नाले एचआईवीवाले

भिवंडी शहर की साफ-सफाई करनेवाले सफाईकर्मी खतरे में हैं। उनकी कड़ी मेहनत से शहर तो साफ हो रहा है लेकिन उनका शरीर एचआईवी के जीवाणुओं से मैला हो रहा है। शहर के कूड़ेदानों और नालियों में संक्रमण तैर रहे हैं और इसका निशाना बन रहे हैं भिवंडी के सफाईकर्मी।
भिवंडी में मेडिकल वेस्टेज सफाईकर्मियों की जान के लिए जोखिम बन गया है। भिवंडी-निजामपुर मनपा प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में ४ सफाईकर्मियों में एचआईवी पॉजिटिव पाया गया, जबकि १,७४० सफाईकर्मियों में संक्रमण पाया गया। शहर में मेडिकल वेस्टेज को धड़ल्ले से कूड़ेदानों और नालों में फेंका जा रहा है। इसका तय मानक के तहत निष्पादन करने के बजाय कूड़ों व नालों में फेंका जा रहा है, जिससे सफाईकर्मी सफाई के दौरान संक्रमित हो रहे हैं। हैरत की बात यह है कि सफाईकर्मियों की सुरक्षा को लेकर मनपा प्रशासन भी उदासीन बना हुआ है।
ज्ञात हो कि भिवंडी मनपा क्षेत्र में कल्याण बायो मेडिकल वेस्टेज द्वारा एसएमएस एलम क्लीन संस्था की मेडिकल वेस्टेज कलेक्शन की जिम्मेदारी थी। इनकी गाड़ी रोजाना शहरभर के अस्पतालों, नर्सिंग होम व क्लिनिक से मेडिकल वेस्टेज इकट्ठा कर उसे नष्ट करती थी लेकिन पिछले दो वर्षों से उक्त गाड़ियां शहर में नहीं आ रही हैं। भैरव क्लिनिक के डॉ. श्रीपाल जैन ने बताया कि उक्त गाड़ियां कई बार फोन करने के बावजूद भी वेस्टेज लेने नहीं आतीं। इस वजह से शहर के अस्पताल, नर्सिग होम व क्लीनिक अपने मेडिकल वेस्टेज को नष्ट करने की बजाय कूड़े या नाले में फेंक देते हैं। जब मनपाकर्मी सफाई करने कूड़े के ढेर, गटर या नालों में जाते हैं तो वे स्वयं मेडिकल वेस्टज का शिकार होकर विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।