भूकंप का भय मासूम की मौत

पालघर जिले के डहाणू तालुका में लगातार तीन महीने से आ रहे भूकंप के झटकों के बाद भी प्रशासन ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध रखी है। शुक्रवार शाम ३.५५ बजे भूकंप का जोरदार झटका आने के बाद दो वर्षीय मासूम वैभवी भूयाल डर से भाग ही रही थी कि अचानक वह पत्थर पर गिर गई। घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मासूम को मृत घोषित कर दिया।
बता दें कि शुक्रवार को लगातार पांच बार डहाणू व तलासरी में ३ रिक्टर स्केल से अधिक के भूकंप के जोरदार झटके लगने से धुंधलवाड़ी ग्राम पंचायत व आस-पास के गांवों में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने घरों में ताला मारकर सुरक्षित जगह पर चले गए। विगत ३ महीनों से पालघर जिला हिल रहा है लेकिन प्रशासन की नींद अब जाकर खुली है। इस संदर्भ में जिलाधिकारी प्रशांत नारनवरे ने बताया कि हमारी पूरी टीम २४ घंटे निगरानी रखेगी। मुंबई से एनडीआरएफ की टीम आ चुकी है। इसके अलावा पुलिस की टीम, एंबुलेंस सहित पूरी तैयारी कर ली गई है। यह गंभीर मामला है, हमने ४२ स्थानों का निरीक्षण किया है। आम जनता को परेशानी नहीं होने देंगे। कल घटनास्थल पर एनडीआरएफ की टीम पहुंच गई। टीम ने डहाणू व तलासरी में चिह्नित की गई ४२ जगहों पर २०० टेंट लगाने का काम शुरू कर दिया गया है और लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया जा रहा है। गौरतलब है कि पालघर में ११ नवंबर से अब तक लगभग ५० से अधिक बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।
भूकंप से दहली दिल्ली
दिल्ली समेत एनसीआर और आसपास के इलाकों सहित जम्मू संभाग के पुंछ जिले में भी भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए। दिल्ली में भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर ६.१ दर्ज की गई है। इस मामले में खबर लिखे जाने तक कहीं से भी किसी के हताहत होने की खबरें नहीं आर्इं थी। हिंदुस्थानी समयानुसार ये भूकंप कल शाम ५ बजकर ३४ मिनट और ४४ सेकंड आया। शुरुआती जानकारी में भूकंप का केंद्र हिंदुकुश पर्वत क्षेत्र बताया जा रहा है। ये हिंदुकुश पर्वत माला मध्य अफगानिस्तान से उत्तरी पाकिस्तान तक फैली हुई है। इन झटकों से पूरे देश में डर का माहौल है क्योंकि एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के करीब ३८ शहर हाई रिस्क सिस्मिक जोन में आते हैं जबकि ६० फीसदी भूभाग भूकंप को लेकर असुरक्षित हैं। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के मुताबिक हिंदुस्थान में ज्यादातर निर्माण भूकंप को ध्यान में रखकर नहीं किए गए हैं। हालांकि इसके कुछ अपवादों में शामिल दिल्ली मेट्रो भूकंप के झटके सह सकती है।
बता दें कि जितना ज्यादा रिक्टर स्केल पर भूकंप आता है, उतना ही अधिक कंपन महसूस होता है। जैसे २.९ रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर हल्का कंपन होता है। वहीं, ७.९ रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर इमारतें गिर जाती हैं। इसी तरह जोन ५ को भूकंप के लिहाज से सबसे अधिक खतरनाक माना जाता है। साथ ही दिल्ली, पटना, श्रीनगर, कोहिमा, पांडुचेरी, गुवाहाटी, गैंगटॉक, शिमला, देहरादून, इंफाल और चंडीगढ़, अंबाला, अमृतसर, लुधियाना, रुड़की सिस्मिक जोन ४ और ५ में आते हैं। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, उत्तर बिहार और अंडमान-निकोबार के कुछ इलाके जोन-५ में शामिल हैं।