भूमाफिया निगल रहे मैंग्रोव्ज के जंगल

मीरा-भाइंदर शहर में मनपा प्रशासन के आशीर्वाद से मैंग्रोव्ज के जंगलों का बड़े पैमाने पर ह्रास किया जा रहा है। उच्च न्यायालय के आदेश की धज्जियां उड़ाकर मैंग्रोव्ज के जंगल, सीआरजेड बाधित क्षेत्र और दलदलीय क्षेत्रों में मिट्टी भराव और निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। इससे पर्यावरण को भारी क्षति और बरसात में शहर के डूबने का खतरा उत्पन्न हो गया है। उपसमिति द्वारा किए गए सर्वेक्षण इसका खुलासा हुआ है। भूमाफियाओं द्वारा मैंग्रोव्ज और सीआरजेड संरक्षित भूखंडों को निगले जाने में स्थानीय नेताओं, बिल्डर, मिट्टी भराव करनेवाले माफिया, मनपा प्रशासन, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से अंजाम दिए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं तो जिन भूखंडों पर मैंग्रोव्ज के कत्ल और पर्यावरण को ह्रास करने के मामले दर्ज हुए हैं, उन्हीं भूखंडों पर मनपा प्रशासन ने निर्माण कार्य की अनुमति प्रदान की है।
उच्च न्यायालय के आदेश से स्थापित कोकण आयुक्त की अध्यक्षता में मैंग्रोव्ज वन संरक्षण समिति ने मीरा-भाइंदर क्षेत्र में हो रहे पर्यावरण ह्रास की गंभीर दखल लेते हुए उपसमिति का गठन किया है। हाल ही में इस उपसमिति ने मीरा रोड के हाटकेश, कनकिया व ७११ क्लब, इंद्रलोक, नवघर, सरस्वती नगर, आरएनपी पार्क और जेसलपार्क परिसर का सर्वेक्षण किया था। इन परिसरों में हो रहे पर्यावरण के ह्रास पर उपसमिति ने तीव्र नाराजगी व्यक्त की है।
उपसमिति ने भाइंदर-पश्चिम में प्लैनेटेरिया व राधा स्वामी सत्संग के पीछे के हिस्से, मीरा रोड-पश्चिम के डिबी रियालिटी व नाजरेथ आगर झोपड़पट्टी, सुभाषचंद्र बोस मैदान, मोर्वा, खोपरा व राई शिवनेरी के परिसरों का भी सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण में उपविभागीय अधिकारी अविनाश शिंदे, तहसीलदार अधिक पाटील, मैंग्रोव्ज सेल की गिरिजा देसाई, देशमुख, मनपा उपायुक्त दीपक पुजारी, नगर रचनाकार हेमंत ठाकुर, अतिक्रमण विभागप्रमुख दादासाहेब खेत्रे के साथ राजस्व विभाग, नगर रचना, प्रभाग समिति अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे। ‘बॉम्बे एंव्हायरमेंटल एक्शन ग्रुप’, ‘वनशक्ति’ संस्था के प्रतिनिधि भी सम्मिलित थे।