भेजा फिरा रे बरेली के बाजार में, भिखारियों व वेश्याओं से टैक्स की वसूली

एक समय था जब झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में… यह गीत काफी लोकप्रिय हुआ था। उसी बाजार के लोग अब कह रह हैं कि भेजा फिरा रे बरेली के बाजार में… क्योंकि स्थानीय प्रशासन काम ही कुछ ऐसा कर रहा हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली में फरीदपुर नगर पालिका परिषद ने भिखारियों और वेश्याओं पर लगाम कसने के लिए नया प्रस्ताव बनाया है। इस नए प्रस्ताव में भिखारियों और वेश्याओं से टैक्स की वसूली की जानेवाली है। इस नए टैक्स प्रस्ताव से भिखारियों पर ५०० रुपए तो वेश्यावृत्ति करने वाली महिलाओं पर २,००० रुपए का टैक्स लगाया जाएगा।
फरीदपुर नगर पालिका परिषद बरेली के नेशनल हाइवे २४ पर स्थित है। यहां यह प्रस्ताव पास किया गया है। नगर पालिका परिषद ने ६२ बिंदुओं को ‘केयरिंग चार्ज’ के दायरे में रखा है इसमें से वेश्यावृति और भिक्षावृत्ति भी शामिल हैं।

नगर पालिका परिषद का कहना है कि यह पैâसला परिषद की आय बढ़ाने को लेकर लिया गया है। इससे जहां भिखारियों और वेश्यावृत्ति पर लगाम लगेगी वहां परिषद की आय भी बढ़ेगी, इस आय को शहर के विकास कार्यों में लगाया जा सकेगा।
हालांकि नगर पालिका परिषद ने अभी इस प्रस्ताव पर लोगों की आपत्तियां मांगी हैं। उन आपत्तियों के आधार पर प्रस्ताव में बदलाव करके उसे पास किया जाएगा। प्रस्ताव में सड़क पर कूड़ा फेंकने, मलबा फेंकने जैसे मामलों में भी टैक्स लगाने की बात कही गई है। बरेली की अंधेरगर्दी के साथ ही स्वच्छ भारत सेस के नाम पर भी देश में अभी भी वसूली जारी है। स्वच्छ भारत सेस बंद होने के बाद भी मोदी सरकार ने लोगों से करोड़ों रुपए का टैक्स वसूला है। गौरतलब है कि एक जुलाई, २०१७ से स्वच्छ भारत सेस को खत्म कर दिया गया था। एक आरटीआई के जवाब में वित्त मंत्रालय ने बताया कि साल २०१५ से लेकर अब तक स्वच्छ भारत सेस के तहत कुल २०,६०० करोड़ रुपए वसूले गए हैं। हालांकि सरकार ने ये नहीं बताया कि टैक्स के रूप में वसूली गई यह राशि कहां खर्र्च की गई?
सिस्टम और डेटा प्रबंधन के निदेशालय जनरल ने आरटीआई आवेदन के तहत बताया है कि साल २०१७ से लेकर ३० सितंबर, २०१८ तक ४३९१.४७ करोड़ रुपए का स्वच्छ भारत सेस वसूला गया है। इसमें से वित्त वर्ष २०१७-१८ (एक अप्रैल २०१७-३० मार्च २०१८) के दौरान ४२४२.०७ करोड़ रुपए और साल २०१८-१९ के दौरान १४९.४० करोड़ रुपए स्वच्छ भारत सेस के रूप में वसूलने की जानकारी सरकार की ओर से दी गई है।