भोजन में छांछ और दही का प्रयोग जरूरी

पिछले कई वर्षों से मुझे खासकर बरसाती मौसम में पेट मरोड़कर शौच की प्रतीति होती है। दिन में ४ से ६ बार शौच जाना पड़ता है। कई बार पेट दर्द ज्यादा हो जाता है। बार-बार शौच जाने की वजह से घर के बाहर जाने से मैं डरता हूं। मैं बहुत व्यथित हूं कृपया मुझे औषधोपचार बताएं।
– प्रदीप पांडेय, वाशी
आपके पत्र के वर्णन से प्रतीत होता है कि आपको प्रवाहिका नामक रोग हुआ है। कूंथन (मरोड़/पेचिस) के साथ थोड़ा-थोड़ा मल त्याग व पेट में दर्द होता है। कई बार यह दर्द तीव्र स्वरूप का भी हो सकता है। शौच के प्रति मन में आशंका बनी रहती है इसलिए व्यक्ति मानसिक तनाव से ग्रस्त रहता है। तनाव बढ़ने से रोग बढ़ जाता है। इसी कारण व्यक्ति भयभीत रहता है व घर से बाहर जाने के लिए भी घबराता है। आपको पिछले कई वर्षों से ये तकलीफ बरसाती मौसम में हो रही है तो इसका अर्थ है कि पीने का पानी दूषित या संक्रमित है। बरसात में पेयजल में अशुद्धि व पत्तेदार हरी सब्जियां व फलों के कारण तथा रोड साइड फूड के सेवन इत्यादि से ये रोग हो जाता है। अत: इसका ध्यान देना आवश्यक है। आप स्वच्छ व उबला हुआ पानी पीएं। पंचामृतपर्पटी दो गोली, कुटजयन वटी दो-दो गोली दिन में दो बार लें। कुटजारिष्ट चार-चार चम्मच दो बार भोजन के बाद समप्रमाण पानी मिलाकर लें। पीने के लिए गर्म पानी ही पीएं। भोजन में छांछ एवं दही का प्रयोग करें। पेट दर्द की अवस्था में शंखवटी दो-दो गोली गर्म पानी से लें। व्यक्तिगत साफ-सफाई का भी ध्यान रखें।
८ महीने पहले अचानक मुझे ऐसा लगा कि मैं चल नहीं पा रहा हूं। मेरा एक पैर पूरा सूज गया। सरकारी अस्पताल जाकर अपना परीक्षण करवाया तो डीवीटी का पता चला। डॉक्टरों का कहना है कि सूजन जिंदगी भर रहेगी। फिलहाल वार्फ-५ एमजी की गोली खा रहा हूं। न जाने क्यों मुझे विश्वास है कि आयुर्वेद में इसका इलाज संभव है। कृपया उपचार बताकर मेरा मार्गदर्शन करें।
– एल.एच. मंगलानी, उल्हासनगर
डावीटी व्याधि में खून की नली में रक्त की गांठें बन जाती हैं। इन गांठों के कारण रक्त परिवहन में बाधा हो जाती है तथा जिस अवयव में गांठें बनती हैं वहां सूजन हो जाती है। ऐसे में उस अवयव पर मालिश व सेंक बिल्कुल न करें। गांठों को कम करने तथा गांठें न बनें इसलिए औषधि का लेना आवश्यक है। गांठें रक्त परिभ्रमण में न आए इसका भी ध्यान रखना होगा। कांचनार गुगुल व आरोग्यवर्धनी वटी की दो-दो गोली दिन में तीन बार लें। वेखंड (वचा) घर तथा गुडुची घन की एक-एक गोली दिन में दो बार लें। सूजन वाले भाग पर दशांग लेप लगाएं। रात में सोते समय पैरों के नीचे तकिया लगाकर स्लोप दें। पंचकर्म चिकित्सा के अंतर्गत वमन, विरेक्ट व रक्तमोक्षण उपयोगी है। पीड़ित भाग पर जलौका लगाना चाहिए। हल्का-फुल्का व्यायाम करें। साग-सब्जी, फल आदि का ज्यादा प्रयोग करें।
मुझे पिछले तीन-चार हफ्तों से खांसी आ रही है। कभी-कभी शाम को हल्का बुखार सा महसूस होता है। थकान व कमजोरी भी है। दो दिन पहले खांसते समय बलगम में खून का खतरा भी दिखाई पड़ा। कृपया मुझे उपचार बताएं।
– बंशबहादुर, नारपोली, भिवंडी
दो सप्ताह से खांसी आ रही हो व दवा लेने पर भी ठीक न हो तो उसकी जांच करवाना जरूरी है। बलगम के साथ खून का आना कई प्रकार के रोगों का निर्देश करता है। प्राय: टीबी (फेफड़े की), हृदय के वाल्व विकार विशेषत: मायट्रल वाल्व, फेफड़े का कर्क रोग, पुरानी खांसी इत्यादि। यदि बलगम का रक्त ज्यादा चमकदार हो तो इसका अर्थ है कि रक्त मसूढ़े अथवा गले के किसी भाग से आ रहा है। रोग निदान के लिए सीबीसी, रक्त परीक्षण, चेस्ट एक्सरे व एमटी टीका लगवाना आदि प्राथमिक परीक्षण करना चाहिए। परंतु छाती का सी.टी. स्वैâन परीक्षण से बेहतर जानकारी प्राप्त होती है। प्राथमिक चिकित्सा के रूप में आप सितोप्लादि चूर्ण एक चम्मच तथा नागकेशर चूर्ण आधा चम्मच मिलाकर दिन में तीन बार शहद के साथ लें। भागोत्तर गुटिका दो-दो गोली दो बार तथा गोजिष्ठादि क्वाथ चार-चार चम्मच दो बार समप्रमाण पानी मिलाकर लें। आंवला भरपूर मात्रा में खाएं। परीक्षण के बाद सही निदान होने पर रोगानुसार दवा लेने पर आप रोग से मुक्त हो जाएंगे।
मेरा पेट फूल गया था इसलिए पेट की सोनोग्राफी करवाई तब मालूम पड़ा कि पेट में पानी भर गया है। पिछले ३ महीने से दवा चालू है परंतु आराम नहीं हो पा रहा है। आयुर्वेदिक दवा बताकर आप मेरी बीमारी ठीक करें। मेरी उम्र ४९ वर्ष है और मैं शादीशुदा हूं। पहले मैं सप्ताह में दो से तीन बार शराब पीता था लेकिन अब ये सब बंद है।
– आर.बी. सिंह, एरोली
पत्र के वर्णन से स्पष्ट है कि आपको ‘असाइटिस’ नामक बीमारी है। आयुर्वेद के मुताबिक यह उदर रोग है व जलोदर प्रकार में आता है। इससे पेट में पानी भर जाता है व नाभि उन्नत हो जाती है। जलोदर व्याधि होने के कई कारण है। अत: इस दृष्टि से निदान आवश्यक है। पेट की सोनोग्राफी के अलावा अन्य कई प्रकार के रक्त परीक्षण की आवश्यकता रहती है। सीरोटिक लीवर, पेट का वैंâसर, पीलिया, पेट में टीबी की गांठें आदि कारणों के साथ अन्य कई कारण होते हैं। अत: निदान के अनुरूप चिकित्सा बदलती है। आपको शायद ‘सीरोसिस ऑफ लीवर’ हुआ है, जो लोग शराब का सेवन ज्यादा करते हैं उनमें यह प्राय: देखा जाता है। आरोग्यवर्धनी वटी की दो-दो गोलियां दिन में तीन बार तथा पुर्ननवाष्टक क्वाथ ६-६ चम्मच ३ बार समप्रमाण पानी मिलाकर लें। अभयादिमोदक से आपको विरेचन होगा, जिससे पेट का पानी धीरे-धीरे कम होता जाएगा।