मंगल चंडिका स्तोत्र पाठ से दांपत्य जीवन होगा सुखमय

 

गुरु जी, मेरी राशि क्या है और भविष्य वैâसा होगा?
-महिमा दुबे
(जन्म-२६ अगस्त २००२, समय- प्रात: ८:१८, स्थान- भदोही, उत्तर प्रदेश)
महिमा जी, आपका जन्म कन्या लग्न और मीन राशि में हुआ है। लग्न में लग्नेश एवं कर्मेश बुध-शुक्र के साथ लग्न में भी उच्च राशि का बैठ करके आपको तेजस्वी, बुद्धिमान बनाया है। आपकी कुंडली में बारहवें भाव में सूर्य के साथ मंगल ने बैठ करके आपको मांगलिक भी बना दिया है। पराक्रम भाव में केतु एवं भाग्य भाव में राहु बैठ करके आपकी कुंडली में भाग्य ग्रहण दोष एवं कालसर्प योग भी बनाया है। दांपत्य जीवन का पूर्णत: सुख प्राप्त करने के लिए मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ भी आवश्यक होगा। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए जीवन दर्पण बनवाएं।

गुरु जी, मेरी शादी कब होगी कोई उपाय बताएं?
– आंचल सोनी
(जन्म-१६ नवंबर १९९२, समय- रात्रि १२:४५, स्थान- एरोली, नई मुंबई, महाराष्ट्र)
आंचल जी, आपका जन्म सिंह लग्न एवं कर्क राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का अच्छी प्रकार से विचार किया गया। आपकी कुंडली सुखेश एवं भाग्येश मंगल नीच राशि का होकर बारहवें भाव में बैठ करके आपको मांगलिक बना दिया। विवाह का समय चल रहा है लेकिन मांगलिक दोष के कारण अनुकूल पति नहीं मिल पा रहा है। अनुकूल पति प्राप्त करने के लिए मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ कराना आवश्यक है। मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ कराने से दांपत्य जीवन पूर्णतया सुखमय होगा एवं अनुकूल पति भी प्राप्त हो जाएगा।

कृपया मेरी राशि बताएं और कौन-सा रत्न धारण करूं कोई उपाय बताएं?
– विनय सिंह
(जन्म- ९ अप्रैल १९९०, समय- ३:४८ बजे, स्थान- इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश)
विनय जी, आपका जन्म सिंह लग्न कन्या राशि हुआ है। चूंकि आपका सिंह लग्न में जन्म हुआ है अत: आप बहुत ही तेज-तर्रार प्रकृति के हैं लेकिन इस समय आपकी राशि पर शनि की ढैया भी चल रही है, जो जनवरी २०२० तक चलेगी। आपकी कुंडली में इस समय गुरु की महादशा है। गुरु ग्रह आपकी कुंडली में पंचमेश और अष्टमेश हो करके लाभ भाव में बैठा है, जो आपके लिए लाभकारी होगा लेकिन आपकी कुंडली में छठे स्थान पर भाग्येश मंगल के साथ में राहु बैठकर अंगारक योग एवं महापद्म नामक कालसर्प योग बना रहा है। इस योग के कारण परिश्रम का पूर्ण पारिश्रमिक भी नहीं मिल पाता होगा। भाग्य को प्रबल बनाने के लिए भाग्येश मंगल का रत्न धारण करें तथा महापद्म नामक कालसर्प योग की पूजा भी वैदिक विधि से कराएं।

मेरी राशि क्या है, मेरा समय कब अच्छा होगा? -ओमप्रकाश तिवारी
(जन्म- ३ मार्च १९८४, समय- प्रात: ६:१५ बजे, स्थान- कांदिवली, मुंबई)
ओमप्रकाश जी, आपका जन्म मीन लग्न एवं कुंभ राशि में हुआ है। लग्नेश एवं कर्मेश बृहस्पति कर्म भाव में स्वगृही होकर बैठा है। यह योग आपको भाग्यशाली तो बनाता है लेकिन बृहस्पति दो केंद्र का स्वामी होने के कारण आप अपने परिश्रम का पूर्ण फल प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। आपके पराक्रम भाव पर राहु बैठ करके आपको अपने कार्य के प्रति प्रेरणा तो देता है लेकिन भाग्य भाव पर केतु बैठ करके भाग्य को कमजोर बना दिया तथा भाग्य ग्रहण दोष भी बना दिया है एवं पितृदोष भी बना दिया है। इस समय आपकी कुंडली में शनि की महादशा चल रही है। भाग्य ग्रहण दोष की वैदिक विधि से पूजा कराएं तथा जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

गुरु जी, मेरी शादी कब होगी और मैं कौन-सा रत्न पहन सकता हूं?
– मनोज तिवारी
(जन्म- २८ मई १९७९, समय- सायं ७:२८, स्थान- मालाड, मुंबई)
मनोज जी, आपका जन्म कन्या लग्न एवं मिथुन राशि में हुआ है। आपकी कुंडली मांगलिक नहीं है लेकिन सप्तम भाव पर सूर्य बैठ करके विवाह स्थान को दूषित बना दिया है। इस समय आपकी कुंडली में शनि की महादशा में राहु का अंतर चल रहा है। दशम भाव पर राहु एवं सुख भाव पर केतु बैठकर कालसर्प योग बना दिया है। गोचरीय व्यवस्था के आधार पर विवाह का समय तो चल रहा है लेकिन कालसर्प विधि कराने से अनुकूल पत्नी प्राप्त करने का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है।