मंगल पर उड़ेगा नासा का ‘हेलिकॉप्टर’

नासा मंगलग्रह की सतह पर साल २०२० में एक रोवर भेजनेवाला है। इसे ‘मार्स २०२०’ नाम दिया गया है। इस अभियान के तहत जुलाई २०२० में एक रोवर (घुमंतू वाहन) मंगल पर भेजा जाएगा। इस रोवर को बड़े ही खास ढंग से तैयार किया गया है ताकि यह मंगल पर जीवन की उपस्थिति के नमूनों को खोज सके। इस रोवर से जोड़कर नासा मंगलग्रह पर एक हेलिकॉप्टर भी भेजेगा, जो मंगल ग्रह पर उड़ेगा।
बता दें कि इस हेलिकॉप्टर का वजन १ हजार ५० किलोग्राम है और इसका आकार एक कार के बराबर है। ये रोवर १० फीट लंबा, ९ फीट चौड़ा और ७ फीट ऊंचा है। इस रोवर को इस प्रकार तैयार किया गया है कि रोवर की तुलना किसी प्राणी के अलग-अलग अंगों से की जा सकती है। मार्स रोवर को २०११ में भेजे गए रोवर की डिजाइन के आधार पर ही बनाया गया है। इस रोवर को मंगल ग्रह के जजारों क्रिएटर पर उतारा जाएगा। मंगल ग्रह पर उतरने के बाद रोवर इस हेलिकॉप्टर को अलग कर मंगल की सतह पर बैठा देगा और फिर धरती से भेजे गए निर्देश प्रसारित करेगा। यहां परेशानी यह है कि धरती से जो निर्देश भेजे जाएंगे, उन्हें हेलिकॉप्टर तक पहुंचने में कई मिनट लग जाएंगे इसलिए इसे इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है जिसमें कुछ स्वतंत्र क्षमताएं हों, जिससे बिना किसी नियंत्रण के भी वह उड़ान भर सके। जानकारी के मुताबिक इस मिशन की अवधि ३० दिन की है। इस दौरान हेलिकॉप्टर का उपयोग पांच बार किया जाएगा। यह डेढ़ मिनट से भी कम अवधि में सैकड़ों मीटर की दूरी तय कर लेगा यदि यह रफ्तार धीमी प्रतीत हो रही है तो इस बात पर भी गौर करना होगा कि जब रोवर स्वयं मंगल की सतह पर चहलकदमी करता है तो वह एक मांगलिक दिवस में १०० मीटर की दूरी तय करता है क्योंकि उसे काफी पथरीली सतह से होकर आगे बढ़ना होता है। हेलिकॉप्टर हवा में उड़ता है और उसे जमीन की पथरीली सतह का सामना नहीं करना पड़ेगा। ऐसे में मंगल ग्रह पर उतरनेवाला नासा का हेलिकॉप्टर कम समय में अधिक खोज व नमूने इकट्ठा करने में सहायक होगा। हेलिकॉप्टर न सिर्फ ज्यादा दूरी तय करेगा बल्कि जहां रोवर नहीं पहुंच सकता, ऐसी जगह पर हेलिकॉप्टर पहुंच कर अलग-अलग नमूने इकट्ठा करने के साथ ही इसे विश्लेषण के लिए धरती पर भेजेगा। यह पहली बार होगा, जब किसी ग्रह पर हेलिकॉप्टर उड़ान भरेगा।