मंदी में भी ऑफिस-ऑफिस!, मुंबई में तेजी से बढ़ रही है कमर्शियल स्पेस की वैल्यू

आगमी १० वर्षों में पूरी तरह बदल जाएगा मुंबई का स्वरूप

उद्योग-धंधे की बात करें तो पूरी दुनिया इन दिनों मंदी के दौर से गुजर रही है। ऐसी खबरें सुनने को मिलती रहती हैं कि बाजार में पैसा नहीं है। रियल इस्टेट का कारोबार भी मंदी की चपेट में है। मगर इस मंदी के दौर में भी मुंबई में ‘ऑफिस-ऑफिस’ चल रहा है। यानी ऑफिस की कीमतें तो आसमान पर हैं ही, पर दूसरी तरफ बड़ी संख्या में इनके सौदे भी हो रहे हैं। हाल ही में मुंबई के सबसे महंगे ऑफिस क्षेत्र माने जानेवाले बीकेसी (बांद्रा कुर्ला कांप्लेक्स) में
ऑफिस की एक बड़ी और महंगी डील हुई है। बाजार के जानकारों के अनुसार हाल ही में २,२३८ करोड़ रुपए में ३ एकड़ का एक कमर्शियल प्लॉट का सौदा हुआ है। इसे जापान की सुमीतोमो कॉर्पोरेशन ग्रुप ने खरीदा है। इसी तरह की कुछ और भी डील हुई है और रियल इस्टेट के जानकारों का मानना है कि आगामी १० वर्षों में मुंबई का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा।
पिछले कुछ सालों से मंदी के दौर से गुजरनेवाले प्रॉपर्टी व्यवसाय को उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी है। मुंबई में कमर्शियल स्पेस की डिमांड बढ़ी है। दूसरे शब्दों में कहें तो प्रॉपर्टी बाजार बूम सा आ गया है। और वह भी छोटे-मोटे नहीं बल्कि बड़े कमर्शियल स्पेस की। मल्टी नेशनल कंपनियों के आने के साथ ही देशी कंपनियां भी कमर्शियल प्रॉपर्टी में रुचि दिखा रही हैं। हाल ही में मुंबई में कुछ बड़ी कमर्शियल प्रॉपर्टी की डील हुई हैं। इसके साथ ही बाजार के जानकार बताते हैं कि पिछले साल के मुकाबले इस समय खाली कमर्शियल प्रॉपर्टी का प्रतिशत घटा है। ऐसा इसलिए क्योंकि इनकी बिक्री में तेजी दर्ज की गई है।
प्रॉपर्टी बाजार के सूत्रों के अनुसार हाल ही में ब्लैकस्टोन ग्रुप ने बीकेसी में पूरा ऑफिस कांप्लेक्स २,५०० करोड़ रुपए की भारी-भरकम रकम में खरीदी है। इसके साथ ही जापान की सुमीतोमो कॉर्पोरेशन ग्रुप ने तीन एकड़ का कमर्शियल प्लॉट २,२३८ करोड़ रुपए में खरीदा है। इससे रियल इस्टेट सेक्टर में जान आ गई है। इसके पहले एक समय बॉलीवुड की पहचान रहे चेंबूर स्थित मशहूर आर।के। स्टूडियो को गोदरेज ने २०० करोड़ रुपए में खरीदा था। प्रॉपर्टी बाजार के जानकारों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में कमर्शियल स्पेस के डिमांड सप्लाई का संतुलन गड़बड़ा गया था। सप्लाई बढ़ गई थी जबकि डिमांड घट गई थी। इससे बड़ी संख्या में प्रॉपर्टी बिना बिके पड़ी हुई थी। हाल के वक्त में संतुलन थोड़ा ठीक हुआ है और डिमांड बढ़ी है। अगर पिछले कुछ सालों पर नजरें दौड़ाएं और ७ बड़े शहरों की बात करें तो वर्ष २०१८ सबसे अच्छा रहा था। इस साल कुल मिलाकर ३७ मिलियन वर्ग फुट नई ऑफिस के जगह की डील हुई थी। इसके साथ ही २०१२ में जहां २० प्रतिशत प्रॉपर्टी खाली पड़ी हुई थी, उसमें गिरावट हुई और २०१८ में यह १२ प्रतिशत पर आ गया। हालांकि ऐसा नहीं है कि इससे सभी बिल्डरों के अच्छे दिन आ गए हैं। निवासी संकुल बनानेवाले कई बिल्डर अभी भी मंदी से परेशान हैं और कई तो डिफॉल्टर भी हो चुके हैं। एक बड़ी लिस्टेड कंपनी ने मुंबई में कई निवासी इमारतें बनाई हैं और संकट के दौर से गुजर रही है। फिलहाल जो सीन है उससे इसे अपने कर्जों से बाहर निकलने में ३ साल तक का वक्त लग सकता है। हालांकि इस कंपनी ने अपनी कई प्रॉपर्टी भाड़े पर दिया हुआ है और इसमें इसकी इनकम में कुछ साल में १० प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।