मकान के लिए मोहलत ३६५ दिन

अब ग्राहकों को देरी से घर देनेवाले बिल्डरों की मनमानी नहीं चलेगी। अगर उन्होंने ग्राहकों को घर देने में तय वक्त से ज्यादा देरी की तो ग्राहक अपना पूरा पैसा मांग सकता है। देश के सबसे पड़े उपभोक्ता आयोग ने घर खरीदनेवाले लोगों के हित में बहुत अहम पैâसला दिया है। इससे ऐसे लाखों ग्राहकों को राहत मिलेगी, जिन्हें पूरे पैसे चुकाए जाने के बाद भी बिल्डर से घर का पजेशन नहीं मिल रहा है।
एनसीडीआरसी (नेशनल कंज्यूमर डिसप्यूट्स रिड्रेसल कमीशन्ी) ने कहा है कि अगर फ्लैट मिलने में एक साल से ज्यादा की देर होती है तो ग्राहक बिल्डर से अपना पैसा वापस मांग सकता है। इसस पहले सुप्रीम कोर्ट सहित कई न्यायिक मंच कह चुके हैं कि बिल्डर ग्राहक को फ्लैट देने के मामले में अनिश्चित काल तक इंतजार करने को मजबूर नहीं कर सकता लेकिन यह नहीं कहा गया था कि पजेशन में कितनी देर होने पर ग्राहक बिल्डर से घर का पैसा वापस मांग सकता है।
अब एनसीडीआरसी ने यह साफ कर दिया है कि बिल्डर की बताई गई तारीख से पजेशन में एक साल से ज्यादा देर होने पर ग्राहक अपना पैसा वापस मांग सकता है। कमीशन के प्रेम नारायण ने कहा, ‘अब यह तय हो गया है कि ज्यादा देर खासकर एक साल से ज्यादा समय बीत जाने पर फ्लैट खरीदने वाला अपना पैसा वापस मांग सकता है। ‘एनसीडीआरसी ने दिल्ली के रहनेवाले शलभ निगम की शिकायत पर यह पैâसला सुनाया है। उन्होंने गुड़गांव में ग्रीनपोलिस नाम के प्रोजेक्ट में एक फ्लैट खरीदा था। निगम ने फ्लैट के लिए करीब ९० लाख रुपए का पेमेंट किया था। इस फ्लैट की कुल कीमत करीब एक करोड़ रुपए थी। बिल्डर के साथ एग्रीमेंट के मुताबिक निगम को अलॉटमेंट के ३६ महीने के अंदर फ्लैट मिल जाना चाहिए था। इसके बाद छह महीने का ग्रेस पीरियड था। जब निगम को तय समय पर फ्लैट नहीं मिला तो उन्होंने अपने वकील आदित्य परोलिया के जरिए कमीशन में शिकायत की। उन्होंने आयोग से कहा कि वह बिल्डर को या तो पैसा वापस करने या फ्लैट का पेजशन देने का निर्देश दे। फ्लैट का पजेशन लेने में निगम की दिलचस्पी को देखते हुए कमीशन ने बिल्डर को फ्लैट तैयार करने और उसका पजेशन देने का निर्देश दिया। उसने ओसी लेने के बाद सितंबर २०१९ के अंत तक इस काम को पूरा करने के लिए कहा। कमीशन ने बिल्डर को यह भी कहा कि वह पजेशन देने के बाद देरी की अवधि के लिए कुल जमा रकम पर ६ फीसदी की दर से मुआवजे का भुगतान करे। एनसीडीआरसी ने यह भी कहा कि तय सीमा में फ्लैट की डिलीवरी नहीं होने पर बिल्डर को १० फीसदी ब्याज के साथ पूरी रकम निगम को वापस करनी पड़ेगी।