" /> मछुआरों ने काला झंडा दिखाकर ओएनजीसी के सर्वे का किया विरोध

मछुआरों ने काला झंडा दिखाकर ओएनजीसी के सर्वे का किया विरोध

◆ मछली पकड़ने के पुराने नियम ही लागू करने की मांग
◆ कोरोना काल की मिले क्षतिपूर्ति

ओएनजीसी द्वारा १ जून से किए जानेवाले सेस्मिक सर्वे और विभिन्न मांगों को लेकर स्थानीय मछुआरों ने सोमवार को अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृति समिति के मार्गदर्शन में काला झंडा दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया।
केंद्र सरकार ने १२ नॉटिकल से २०० सागरी मील क्षेत्र के अंतर्गत मछली पकड़ने को अनुमति दी है, जिससे पारंपरिक मछुआरों को क्षति पहुंचने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने बरसात के मौसम में ६१ दिन समुद्र में मछली पकड़ने की पाबंदी की समयावधि को घटाकर ४७ दिन कर दी है, जिससे मार्च महीने में अंडे से बाहर आए पापलेट, बोंबिल, दाढ़ा, रावस आदि प्रजाति की मछलियों के बच्चों के विकास पर विपरीत परिणाम पहुंचने का खतरा उत्पन्न हो गया है इसलिए मछुआरों की मांग है कि मछली पकड़ने के पुराने नियम ही पुनः लागू किए जाएं।
दूसरी तरफ ओएनजीसी से मछुआरों को १ लाख और बोट मालिक को ६ लाख रुपए मिलनेवाली क्षतिपूर्ति रकम भी वर्ष २००५ से प्रलंबित है, इस राशि को भी शीघ्र देने की मांग मछुआरों ने की है। इन सभी मांगों को लेकर सभी सागरी किनारपट्टी पर मछुआरों ने काला झंडा दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया।
◆ पिछले १५ वर्षों से ओएनजीसी ने मछुआरों और बोट मालिकों की क्षतिपूर्ति के लाखों रुपए बकाया रखे हैं। कोरोना वायरस के कारण उपजी विश्व आपदा का असर विभिन्न व्यावसायिकों की तरह मछुआरों पर भी पड़ा है। कम से कम इस आपदा की घड़ी में तो ओएनजीसी द्वारा बकाया रखी गई क्षतिपूर्ति की रकम मछुआरों को देनी चाहिए। प्राकृतिक आपदा में जैसे किसानों को नुकसान भरपाई दी जाती है, उसी प्रकार मछुआरों को भी प्राकृतिक आपदा की नुकसानभरपाई मिलनी चाहिए। इस पर केंद्र सरकार को ध्यान देना चाहिए –
शर्मिला बगाजी (स्थानीय शिवसेना नगरसेविका)