मजदूरों का होगा मस्त इलाज

मजदूरों को अत्याधुनिक व बेहतर सुविधा मिले इसलिए उल्हासनगर स्थित कामगार अस्पताल को तोड़कर पुन: बनाने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय अनुसार मजदूरों के लिए बनाए जानेवाले नए अस्पताल में बेड की संख्या में वृद्धि की जाएगी साथ ही अन्य अत्याधुनिक उपचार सुविधाओं को भी जोड़ा जाएगा। मजदूरों का बेहतर और मस्त इलाज हो, इसके लिए शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने अथक प्रयास किया। इस कार्य में उन्हें सफलता मिली है।
१०० बेड की सुविधा
कई दफा अस्पताल के सभी बेड मरीजों से भरे होते हैं ऐसे में मजदूरों को बेड सुविधा नहीं मिल पाती, जिसे ध्यान में रखते हुए नए कामगार अस्पताल में कुल १०० बेड उपलब्ध कराए जानेवाले हैं।
१२५ करोड़ का खर्च
पुराने कामगार अस्पताल की पुरानी इमारत को तोड़कर नई इमारत बनाने व अन्य अत्याधुनिक उपचार सुविधाओं के लिए कुल १२५ करोड़ की निधि का प्रावधान किया गया है।
वर्ष २०२२ तक पूर्ण
१०० बेड के नए चमचमाते अस्पताल को बनाने और उसे सुविधाओं से लैस करने में तीन वर्ष लगेंगे यानी वर्ष २०२२ तक पूर्ण कर लिया जाएगा।
लाखों मजदूरों को मिलेगा लाभ
उल्हासनगर के आसपास के परिसर में लाखों की संख्या में मजदूर रहते हैं। अस्पताल का कार्य पूर्ण होते ही लाखों मजदूर इसका लाभ उठा सकते हैं।
अत्याधुनिक सुविधाएं
अस्पताल में पूरे शरीर की जांच करनेवाली मशीनों से लेकर सिटी स्वैâन जैसी कई जांच संबंधी सुविधाओं को कार्यान्वित किया जाएगा, जिसके कारण मजदूरों को अन्य अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
शिवसेना का प्रयास सफल
कामगार अस्पताल की इमारत को जर्जर घोषित किए जाने के बाद कल्याण के शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने नई इमारत को लेकर अथक प्रयत्न किया था और आखिरकार उनके प्रयत्न को यश मिला और नई इमारत के प्रस्ताव को मंजूरी मिली।
दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा
पुराने कामगार अस्पताल में बेड की संख्या भी कम थी, साथ ही उपचार के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं की भी कमी थी इसलिए बेहतर उपचार के लिए मजदूरों को मुंबई के अस्पतालों में उपचार के लिए दर- दर भटकना पड़ता था। कामगार अस्पताल का कार्य पूर्ण होने के बाद मजदूरों को दर- दर नहीं भटकना पड़ेगा।