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मजदूरों पर मार बसों पर रार!

महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की सरकारों की कोशिशों से प्रवासी श्रमिकों के सबसे बड़े गढ़ मुंबई से मुलुक आने वालों की तादाद बढ़ गई और मजदूर काफी संख्या में अपने गांव पहुंच रहे हैं तो दूसरी तरफ सूबे की सियासत में बस-बस का खेल चालू है। फिलहाल उत्तर प्रदेश में बस तो हैं लेकिन उनके रास्ते में राजनीति का रोड़ा बड़ा है। प्रियंका गांधी ने मजदूरों के लिए एक हजार बसों की पेशकश की जिसे यूपी सरकार ने मान भी लिया लेकिन फिटनेस सहित तमाम विवरणों के साथ। उस पल लगा जैसे राजनीति छोड़कर दोनों पक्ष मजलूम बने मजदूरों की मदद में जुट गए हैं। मजदूर बेबस हाइवे पर भटक रहे हैं। लारी और कंटेनर में ठुंसे पड़ रहे हैं और सियासत की बस दौड़ने लगी है। आरोप-प्रत्यारोप जारी है और इन सब के बीच फंसे मजदूर हैं जो इस बसों के सहारे घर वापसी का सपना देख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के नोएडा व गाजियाबाद सहित कई सीमाओं पर हजारों मजदूर घरों को जाने के लिए बसों के इंतजार में तपती गर्मी में भुन रहे हैं जबकि नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए चिट्ठीबाजी और प्रेस कांप्रâेंसों में उलझे हुए हैं। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव के मजदूरों के लिए १००० बसें चलाने के प्रस्ताव को लेकर रार इस कदर बढ़ गई कि अरसे से क्वारन्टीन में चल रहे उत्तर प्रदेश सरकार के तीन मंत्री मंगलवार को प्रेस कांप्रâेंस करने मैदान में उतरे।

इससे पहले दो दिनों तक प्रियंका के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डालने के बाद योगी सरकार ने सोमवार को बसें चलाने की अनुमति दी तो तमाम शर्तें भी लगा दी। पहले बसों की सूची मांगी। फिर ड्राइवर, कंडक्टरों के नाम और फिर बस सहित लखनऊ आकर लाइसेंस व फिटनेस सर्टिफिकेट जंचवाने का फरमान सुना दिया। और तो और कांग्रेस की ओर से बसों की सूची देने पर उनमें से करीब डेढ़ दर्जन को ऑटो, एंबुलेंस, स्कूल बस व ट्रैक्टर होने की जानकारी दी। आखिर तमाम बवाल के बाद मंगलवार दोपहर प्रदेश सरकार ने बसों के कागज जंचवाने के लिए नोएडा व गाजियाबाद जिला प्रशासन जाने को कहा।

दरअसल उत्तर प्रदेश आ रहे प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए प्रियंका गांधी ने १००० बसें देने का प्रस्ताव दिया। प्रियंका गांधी का पत्र लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना शुक्ला मोना मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचे थे और न मिलने पर वहीं के स्टाफ को दिया था। प्रियंका गांधी के पत्र पर दो दिन चुप्पी साधे बैठी रही योगी सरकार ने सोमवार १८ मई को पत्र का संज्ञान लिया और प्रस्ताव को स्वीकारते हुए बसों की सूची मांगी। हालांकि प्रदेश सरकार के इस पत्र के मिलने के पहले ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एक प्रेस कांप्रâेंस कर बसों की सूची मीडिया के सामने पेश कर चुके थे। बहरहाल सोमवार देर शाम कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर बसों की सूची प्रदेश सरकार को सौंप दी।

प्रियंका गांधी की ओर से तुरंत बसों की सूची सौंपने के बाद योगी सरकार ने सोमवार देर रात एक चिट्ठी भेजकर उन बसों को लखनऊ लाकर फिटनेस सार्टिफिकेट और ड्राइविंग लाइसेंस दिखाने का फरमान दे दिया। जबकि प्रियंका गांधी की ओर से मजदूरों को लाने के लिए उपलब्ध कराई गई बसें नोएडा व गाजियाबाद सीमा पर खड़ी हैं। आनन-फानन में बसों को लखनऊ लाकर चेक करवाने के प्रस्ताव पर प्रियका गांधी के निजी सचिव संदीप सिंह ने मंगलवार तड़के चिट्ठी का जवाब देते हुए कहा मजदूर यूपी की सीमा पर फंसे हैं और खाली बसों को लखनऊ बुलाया जा रहा है। उन्होंने इसे राजनीति करार देते हुए कहा कि नोडल अफसर तय कर बसों की चेकिंग वगैरह वहीं नोएडा-गाजियाबाद में करवा ली जाए और मजदूरों को लाने दिया जाए।

पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा सवाल उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग पर उठ रहे हैं। पहले तो प्रियंका गांधी के प्रस्ताव को दो दिन तक दबाए क्यों रखा गया? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह एक निजी टीवी चैनल के साथ इंटरव्यू में प्रियंका के प्रस्ताव वाले सवाल पर कह दिया कि वो बसों की सूची मांग रहे हैं पर उन्हें उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। योगी के इस बयान पर तुरंत यूपी सरकार पर सवालों की बरसात होने लगी। आनन-फानन में सोमवार दोपहर बाद गृह विभाग के मुखिया अवनीश अवस्थी ने प्रियंका की चिट्ठी का जवाब भिजवाया। हालांकि उससे पहले प्रदेश कांग्रेस प्रेस कांप्रâेंस कर बसों की सूची जारी कर चुकी थी। बसों की सूची मिलने के बाद आधी रात अवनीश अवस्थी ने प्रियंका गांधी के निजी सचिव संदीप सिंह को ईमेल कर बसों को लखनऊ लाकर ड्राइविंग लाइसेंस व फिटनेस सार्टिफिकेट दिखाने को कह दिया।

आधी रात फरमान भेज सुबह १० बजे १००० बसों को नोएडा-गाजियाबाद से लखनऊ लाकर ड्राइविंग लाइसेंस व फिटनेस सार्टिफिकेट दिखाने की योगी सरकार के अफसर अवनीश अवस्थी के फरमान से हर कोई हैरान हुआ। प्रियंका गांधी के निजी सचिव संदीप सिंह ने आधी रात के इस पत्र का जवाब उसी रात दो बजे देते हुए कहा कि मजदूर यूपी की सीमाओं पर फंसे हैं और सरकार खाली बसों को लखनऊ बुला रही है। उन्होंने पत्र में लिखा कि प्रदेश सरकार नोडल अफसर तय कर सारी कार्रवाई वहीं नोएडा-गाजियाबाद में पूरी कर मजदूरों को बसों से भेज सकती है। उन्होंने कहा कि संकट में मजदूर फंसे हुए हैं और प्रदेश सरकार राजनीति से बाज नहीं आ रही है। हालांकि बाद में मंगलवार दोपहर प्रदेश सरकार ने कांग्रेस महासचिव के कार्यालय को पत्र भेजकर बसों की जांच नोएडा व गाजियाबाद में करवाने की इजाजत दे दी है। रार इतने पर ही नहीं थमी। बाद में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राजस्थान की सीमा पर आगरा के नंगला ऊंचा में खड़ी बसों को नोएडा व गाजियाबाद नहीं जाने दिया जा रहा है। बसों को ले जाने के लिए पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को आगरा में पुलिस ने रोक भी लिया।

माना जा रहा है कि इस पूरे मामले में योगी सरकार के अफसर व सलाहकार खासकर गृह विभाग के मुखिया से आकलन में चूक हो गई। पहले तो मुख्यमंत्री को प्रियंका गांधी के पत्र के बारे में सही जानकारी नहीं दी गई और न ही अफसरों ने इसे कोई तवज्जो दी। टीवी चैनल पर मुख्यमंत्री के कहने पर कि कांग्रेस बसों की सूची नहीं दे रही है। गृह विभाग हड़बड़ाया और आनन-फानन में चिट्ठी खोज उसका जवाब भेजा गया। दरअसल गृह विभाग को अंदाजा था कि बसों की सूची मांगने पर कांग्रेस फंस जाएगी और उसे समय लगेगा। उधर कांग्रेस सूची लेकर तैयार बैठी थी और तुरंत इसे जारी कर दिया। पूरे प्रकरण में सरकार की किरकिरी होते देख आधी रात फिर गृह विभाग ने लखनऊ बुला तमाम कागजात दिखाने का फरमान दे दिया। इसके बाद तो और भी छीछालेदर शुरू हो गई।

वहीं मंगलवार को इस मुद्दे पर पहले सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह और उसके बाद उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने प्रेस कांप्रâेंस बुलाकर कहा कि कांग्रेस का काम सिर्फ गुमराह करना व्यवधान डालना है जबकि राजस्थान, महाराष्ट्र की हालत बद से बदतर है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारें वहां भोजन, चेकअप कुछ नहीं कर पा रही हैं। दिनेश शर्मा ने कहा कि कांग्रेस का पुराना अलाप यही है जबकि ६० साल से ज्यादा शासन कर इसने ने सिर्फ बेरोजगारी दी। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सपा बसपा और कांग्रेस महामारी में भी क्रूर मजाक कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने बसों के नाम पर टूव्हीलर, ऑटोरिक्शा और एम्बुलेंस की लिस्ट भेजी है।

उधर कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी ने जवाब में कहा कि पार्टी ने १००० से ज्यादा बसों की लिस्ट दी, इसलिए दी थी की सरकार को जिन बसों में कमी लगे वो हटा दे फिर भी १००० बसें रहें। तिवारी ने कहा कि जो सूची कांग्रेस ने दी है वो सारी बसों की है, इसकी जिम्मेदारी मैं ले रहा हूं। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग गुमराह करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम ५०० बसे गाजियाबाद बॉर्डर और ५०० बसे नोएडा बॉर्डर से चलाना चाहते है, इसलिए अनुमति प्रदान करे। बसों का पूरा खर्च कांग्रेस उठा रही है और सरकार जो नियम बताए हम पालन करने के लिए तैयार है।