" /> मजदूरों से मजाक!

मजदूरों से मजाक!

पूर्व मिस फेमिना ग्रैंड इंटरनेशनल और उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत की बहू अनुकृति गुसाईं को काम करना था मजदूरों के कल्याण का लेकिन वे फैशन शो और अपने प्रचार में जुटी रहीं। इसके लिए उनके गैरसरकारी संगठन को उत्तराखंड भवन निर्माण व कर्मकार कल्याण बोर्ड से बकायदे फीस भी मिलती रही। २००५ में गठित इस बोर्ड का काम था राज्य के सभी जिलों के मजदूरों का पंजीकरण करे और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने का सुनिश्चित करे। बोर्ड की उपलब्धि यह रही कि अब तक राज्य में ३ लाख मजदूरों का पंजीकरण बोर्ड में हुआ है। पहाड़ी ज॰िलों उत्तरकाशी में २०००, चम्पावत में ४०००, बागेश्वर में ३०००, रुद्रप्रयाग में ६३०० मजदूरों का ही पंजीकरण हुआ है। इन जिलों सहित राज्य के अन्य जिलों में निर्माण स्थलों से इनके कल्याण के लिए पैसा ही वसूला नहीं गया है। हल्द्वानी के अमित पाण्डे ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर बोर्ड के काम पर सवाल खड़े किये तो उसके लपेटे में अनुकृति के ससुर भी आ गये हैं। हाईकोर्ट ने श्रमिक कल्याण बोर्ड के चेयरमैन पद से हटाने व बोर्ड में चल रही अनिमितताओं पर कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, केंद्र सरकार और राज्य सरकार के साथ अनुकृति गुसाईं, राज्य के श्रम आयुक्त व सचिव को नोटिस जारी कर २ हफ़्तों में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि बोर्ड में अनिमितताएं कैसे चल रही हैं। बोर्ड ने जनजागरूकता के लिए जिस एनजीओ को काम दिया, उसका नाम महिला उत्थान व बाल कल्याण संस्थान कोद्वार है जिसकी अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री व बोर्ड के अध्यक्ष हरक सिंह रावत की पुत्रवुधू अनुकृति गुसाईं हैं। आरोप है कि एनजीओ ने श्रमिकों के कल्याण से ज्यादा अपना प्रचार किया और श्रमिकों को जागरूक करने के बजाए फैशन शो जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिससे श्रमिकों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी ही उन्हें नहीं मिल सकी।

अब बिहार में अनामिका कांड
उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बिहार शिक्षा विभाग में भी अनामिका कांड का खुलासा हुआ है। अधिकारियों की मिलीभगत से एक फर्जी शिक्षिका ने पहले इस्तीफा दिया और उसके बाद में ३ साल तक वेतन लेकर विभाग को लगभग १० लाख का चूना लगा दिया, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। जब स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग के पास यह शिकायत की तो विभाग ने जांच शुरू की। जांच में पता चला कि शिक्षिका चंदा कुमारी मशरक प्रखंड के जजौली उत्क्रमित मध्य विद्यालय में अध्यापिका के तौर पर तैनात थी, लेकिन फर्जी प्रमाणपत्र होने के कारण उसे इस्तीफा देना पड़ा। इस्तीफा देने के बाद भी वह ३ साल तक वेतन उठाती रही। चंदा कुमारी ने पद से इस्तीफा देने के बाद भी प्रधानाचार्य संजीव कुमार और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी लखेन्द्र पासवान की मिलीभगत से २९/०७/१५ से अक्टूबर २०१८ तक अपने आप को विद्यालय में कार्यरत दिखा दिया। इस दौरान वेतन भुगतान प्रस्ताव जिला कार्यक्रम पदाधिकारी और स्थापना कार्यालय को भेज वेतन भी प्राप्त कर लिया। आरोपी शिक्षिका और संबंधित अधिकारी फरार हैं। मशरक थाने ने अपराध संख्या ३२९/२० दर्ज कर मामले की जांच शुरू दी है। मामले में दिये आवेदन में कहा गया है कि फर्जी शिक्षकों पर हाईकोर्ट पटना ने सीडबलूजेसी १५४५९/२०१४ के तहत आदेश जारी किया था कि जो भी प्रखंड शिक्षक फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरी कर रहे हैं वे पद से इस्तीफा दें।

ज्योति फिर चमकी
तालाबंदी में अपने बीमार पिता को साइकिल पर बिठा गुरुग्राम से दरभंगा लाने वाली ज्योति पासवान फिर चर्चा में हैं। ज्योति के दादा दो भाई थे। दोनों दादा कारी पासवान व शिवनंदन पासवान का निधन हो चुका है। चचेरी दादी विधवा लीला देवी लकवाग्रस्त हैं। ज्योति ने अपनी चचेरी दादी की हालत देख उनकी बेटी कविता कुमारी की शादी कराने का फैसला लिया और यह बात उसने अपने माता-पिता से कही। ज्योति के पिता मोहन पासवान ने कहा कि ज्योति ने ही कविता की शादी करा देने का सुझाव दिया था। ज्योति ने अपने माता-पिता से कहा कि कल हमारे पास कुछ नहीं था लेकिन आज जो कुछ है, बहुत है तो एक गरीब की बेटी की शादी करा देनी चाहिए। बेटी की बात को पिता ने सहर्ष स्वीकार किया और ज्योति के पैसे से रिश्ते में उसकी बहन कविता की शादी अरविंद से कर दी। पिता का कहना है कि इसमें सब कुछ ज्योति का है और उन्हें अपनी बेटी पर नाज है। कविता की शादी समस्तीपुर जिले के खानपुर थाना क्षेत्र के नाथुद्वार गांव के शिबू पासवान के लड़के अरविंद पासवान के साथ श्यामा मंदिर में हुई। इसके लिए ज्योति ने पुरस्कार में मिली राशि में से ५० हजार रुपये खर्च किए और अपनी गरीब चचेरी बुआ कविता के हाथ पीले कर न सिर्फ लोगों का दिल जीत लिया बल्कि एक सकारात्मक संदेश भी दे दिया।

देवकी-यशोदा
द्वापर की कथा में एक देवकी थी और एक यशोदा। भगवान कृष्ण को जन्म देने के बावजूद उनकी प्राणरक्षा के लिए यशोदा की गोद में पलना पड़ा। आधुनिक भारत के इतिहास में सिक्किम में दो देवकी अपने-अपने कृष्ण को बचाने के लिए यशोदा बन गई हैं। वैसे भी सबसे बाद में सिक्किम तक पहुंचे कोरोना से लड़ने के लिए दो माताओं को एक विशेष लड़ाई लड़ने के लिए विवश होना पड़ा है। इनमें एक महिला का २७ महीने का बच्चा कोरोना से संक्रमित पाया गया है, जो राज्य में सबसे कम आयु का कोरोना रोगी है। इस महामारी की इलाल की शर्तें मां को उसके साथ रहने की इजाजत नहीं देतीं। दूसरी तरफ एक अन्य महिला खुद कोरोना संक्रमित है और उसका ६ साल का बच्चा है। बच्चों की देखरेख का दोनों माताओं ने जो हल ढूंढा। उसने दोनों को देवकी के साथ-साथ यशोदा भी बना दिया। अब संक्रमित बच्चे की देखभाल का जिम्मा संक्रमित महिला का है और गैर संक्रमित बच्चे की देखभाल वह मां कर रही है जिसका बच्चा संक्रमित है।