मतिमंद टीम, हिंदुस्थानी हॉकी भगवान भरोसे

विश्व कप की यदि ऐसी तैयारी है तो भूल जाना चाहिए कि हिंदुस्थानी टीम कोई जीत भी दर्ज कर सकती है। ठीक है ऑस्ट्रेलिया से पहला मैच हार गए थे किंतु अर्जेंटीना से भी हार जाना टीम इंडिया के लिए निराशाजनक था पर यहां से वापसी की भी उम्मीद थी। इंग्लैंड से ड्रा कर लेना और मलेशिया को ५-१ के बड़े अंतर से हरा देने के बाद समझा जाने लगा था कि फाइनल दौड़ के लिए टीम इंडिया में अभी सांस शेष है। मगर आयरलैंड जैसी कमजोर टीम से हार जाना सबसे बड़ी शर्म की बात है। ये पहली बार है जब हिंदुस्थान-आयरलैंड से कोई मैच हारा है। आयरलैंड से हारने के बाद सारी उम्मीदें धराशायी हो गई हैं। इस टूर्नामेंट में सबसे पीछे टीम इंडिया है और ये उसके लिए शर्मनाक है। विश्व की छठी नंबर की टीम है और ऐसी टीम १० वे नंबर की टीम से पटखनी खाती है तो स्मरण रखना चाहिए कि उसमें मार्क क्षमता का न केवल अभाव है बल्कि जीत के लिए आत्मविश्वास भी नहीं है। अजलान शाह कप में बुरी तरह पराजित होकर लौटनेवाली टीम से अब क्या और कैसी आशा रखें कि वो विश्वकप की मेजबानी कर रही है और अपनी जमीन पर भी कोई जीत दर्ज कर सकती है।
विश्वकप में वो एक आसान ग्रुप में है किंतु आयरलैंड से हार जाने के बाद कहना कि उसका ग्रुप आसान है। सिर्फ कागजी है क्योंकि वो अपने ग्रुप से ही क्वालीफाई कर जाए तो बहुत है। वहीं सारी परंपरागत कमजोरियां हैं, जिन पर समय-समय पर चर्चा होती रहती है। टीम इंडिया के खिलाड़ी ऐसे पक्की ठोस मानसिकता के शिकार हैं कि वो वैश्विक स्तर की हॉकी सीख ही नहीं पाते और हर बार वही गलतियां दोहराते रहते हैं, जो बरसों से दोहरा रहे हैं। इस हार से ये भी उजागर हो जाता है कि यदि आप किसी मतिबंद को खूब सीखाने की कोशिश करें तो वो व्यर्थ ही। वो थोड़ा बहुत तो सीख लेगा मगर सामान्य मति अनुसार स्थिति में कभी नहीं लौटता। हिंदुस्थानी हॉकी भी ठीक-ठीक ऐसी ही मतिमंद टीम है।
आयरलैंड से पटखनी खाने से पूर्व हिंदुस्थान को ओलिंपिक चैंपियन अर्जेंटीना के खिलाफ २-३ और विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ २-४ से हार का सामना करना पड़ा था, जबकि टीम ने इंग्लैंड से १-१ से ड्रा खेला। दुनिया में छठे नंबर की हिंदुस्थानी पुरुष हॉकी टीम को शुक्रवार को २७वें सुलतान अजलान शाह कप टूर्नामेंट में खेले गए मैच में आयरलैंड के हाथों उलटफेर का शिकार होना पड़ा। इस मैच में वल्र्ड नंबर-१० आयरलैंड ने हिंदुस्थानी टीम को ३-२ से मात दी। इस हार ने हिंदुस्थान की इस टूर्नामेंट के फाइनल के लिए क्वालीफाई की उम्मीदों को भी चूर-चूर कर दिया। हालांकि फाइनल के लिए क्वालीफाई करने की होड़ में हिंदुस्थान तभी रह पाता, जब आयरलैंड को परास्त करने के बाद बाकी टीमों के परिणाम भी उसके मनमाफिक होते। हिंदुस्थानी टीम ने इस मैच में दमदार शुरुआत की थी। शुरुआत तो उसकी हमेशा से दमदार ही होती है मगर पहले ही अपना सबकुछ झोंककर वो बाद में ढीली हो जाती है, ये सिलसिला बरसों से कायम है। बहरहाल १०वें मिनट में ही टीम ने पेनाल्टी कॉर्नर हासिल किया। इस अवसर को रमनदीप सिंह ने भुनाते हुए टीम को १-० की बढ़त दी। खेल के १२वें मिनट में आयरलैंड को गोल करने का मौका मिला लेकिन हिंदुस्थानी टीम के डिफेंस ने इसे अंजाम तक नहीं पहुंचने दिया। दूसरे क्वार्टर में आयरलैंड को सफलता हाथ लगी। खेल के २४वें मिनट में शेन ओडोनोगहुए ने अपने शॉट को सीधे हिंदुस्थान के गोल पोस्ट तक पहुंचाया और स्कोर १-१ से बराबर कर लिया। इसके दो मिनट बाद अमित रोहिदास ने पेनल्टी कॉर्नर से मिले अवसर के गोल में तब्दील कर हिंदुस्थान को २-१ से आगे कर दिया। आयरलैंड ने तीसरे क्वार्टर में एक बार फिर अपनी अच्छी कोशिशों को जारी रखा और ३६वें मिनट में शिमिंस ने मरे को पास दिया और मरे ने इसमें कोई गलती न करते हुए टीम को हिंदुस्थान के खिलाफ २-२ से बराबरी पर ला खड़ा किया। आयरलैंड ने ४२वें मिनट में एक और पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया। इस अवसर का ली कोले ने पूरा फायदा उठाते हुए अपनी टीम को ३-२ से आगे कर दिया। चौथे क्वार्टर में हिंदुस्थान ने काफी संघर्ष किया और ५६वें मिनट में उसे पेनल्टी कॉर्नर भी हासिल हुआ लेकिन वरुण कुमार इसमें चूक गए और हिंदुस्थान को आयरलैंड के खिलाफ २-३ से हार का सामना करना पड़ा। यानी टूर्नामेंट से बाहर की स्थिति। फिसड्डी टीम बन जाने का दु:ख भी शायद अब टीम इंडिया को नहीं होता क्योंकि उसकी आदत में शुमार है ये। जो भी हो, विश्वकप में एकाध मैच भी जीत ले तो टीम इंडिया की बड़ी कामयाबी समझी जाए, यही हिंदुस्थानी हॉकी प्रशंसकों के लिए काफी है। ज्यादा की उम्मीदें पालना खुद की इच्छा का गला घोंटना ही समझा जाएगा।