मनमोहक है मयानी पक्षी अभयारण्य

लगभग १०,५०० वर्ग कि.मी. क्षेत्र में फैले सातारा के उत्तर में पुणे, दक्षिण में सांगली, पूरब में सोलापुर और पश्चिम में रत्नागिरी जिले हैं अर्थात यदि हम मयानी पक्षी अभयारण्य में प्रकृति की सुंदरता का आनंद उठाने की योजना बनाते हैं तो वहां से आस-पास बसे अन्य जिलों के नजदीकी पर्यटन केंद्रों पर जाकर पर्यटन का आनंद उठा सकते हैं। जैसे सांगली के सागरेश्‍वर वन्यजीव अभयारण्य, दानडोवा हिल स्‍टेशन आदि हैं। इसी तरह पुणे, सोलापुर और रत्नागिरी में दर्जनों स्थान हैं, जहां वर्ष भर पर्यटकों का ताता लगा रहता है। वैसे मयानी पक्षी अभयारण्य के इर्द-गिर्द सातारा में जरंदेश्वर, यवतेश्वर, कित्लिचा डोंगर, पैदयाचा बैरोबा और नक्दिचा डोंगर आदि कई जगहें हैं, जो पर्यटकों को बेहद पसंद आती हैं लेकिन यदि आप मयानी पक्षी अभयारण्य जाते हैं तो इन जगहों पर जाना न भूलें।
कौस झील और कौस पठार- यह सातारा का प्रसिद्ध पर्यटकस्थल है। इसे ‘पलेटो ऑफ फ्लावर्स’ के नाम से भी जाना जाता है। इस की हरियाली मन को मोहित करती है। यह सातारा से २२ कि.मी. दूर है। कौस झील सातारा के लिए पीने के पानी का प्राथमिक स्रोत है। इसका निर्माण १८४४ में हुआ था। यह कुल ३,५०० फीट की ऊंचाई पर है। यहां से हम वन्यजीव अभयारण्य देख सकते हैं। जहां ४०० से भी ज्यादा प्रकार के पौधे और जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं।
थोसघार झरना- यह सातारा से ३५ कि.मी. की दूरी पर है। मॉनसून में यह झरना पानी से भरा रहता है, जो यहां के सैलानियों को बहुत आकर्षित करता है।
सज्जनगढ़ किला- सज्जनगढ़ और वासोटा किलों का निर्माण मराठा शैली में किया गया है। इसे पहले अस्वल्यान्गढ़ या अस्वल्गढ़ के नाम से जाना जाता है। यह १०वीं सदी में बनाया गया। यह सातारा से ९ कि.मी. की दूरी पर है। यह ३१२ मीटर ऊंचा और १,५२५ वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है। यहां छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु श्री समर्थ रामदास स्वामी समाधि में लीन हुए। इस किले के पास दो झीले हैं। रामनवमी के त्यौहार पर इस किले के आस-पास की जगह को बहुत सुंदर तरीके से सजाया जाता है।
अजिंक्यतारा किला- यह किला, जिंक्यात्रा पहाड़ी पर स्थित है। इसका निर्माण शिलर राजवंश के राजा, राजा भोज ने किया था। यह ३,००० फीट की ऊंचाई पर है और समुद्र तल से १,००६ मीटर की ऊंचाई पर है। यह सांगली जिले में है। इसे ‘सप्त ऋषि’ किले के नाम से भी जाना जाता है। यह किला दुश्मन से रक्षा प्रदान करता है। इस के भीतर मनमोहन करनेवाला मंगलाई देवी का मंदिर है। यह किला १८५७ के शहीदों की याद में बनाया गया है। इस किले को हम यातेश्वर पहाड़ी से भी देख सकते हैं, जो की यहां से ५ किलोमीटर की दूरी पर है। इस किले की चोटी से हम पूरे सातारा शहर का नजारा देख सकते हैं।
कोयना बांध- कोयना बांध का निर्माण १८६३ में हुआ। यह सांगली जिले की कोयना नदी पर बना है। यह महाराष्ट्र का सब से बड़ा बांध है। इसकी पानी की क्षमता १,८७८ टीएमसी है और १,९२० मेगावाट बिजली उत्पादन करता है। कोयना बांध और नेहरू बाग परिवार के साथ शाम बिताने की एक खूबसूरत जगह है।
मॉनसून में मस्त –
वैसे तो मयानी पक्षी अभयारण्य व आस-पास के पर्यटन केंद्रों पर सालभर में कभी भी जाया जा सकता है लेकिन सातारा देखने का सबसे बेहतर समय मानसून है, जो कि जून से लेकर अक्टूबर तक रहता है। इस दौरान यहां सामान्य से लेकर भारी वर्षा होती है। इससे यहां चारों ओर हरियाली छाई रहती है और प्रकृति प्रेमी इस नजारे का पूरा आनंद ले सकते हैं। नवंबर से फरवरी तक सर्दियों में भी यहां जाया जा सकता है लेकिन तब अपने साथ कुछ गरम कपड़े जरूर ले जाएं क्योंकि इस मौसम में यहां सर्दी बहुत होती है। तापमान १५ डिग्री से लेकर ३१ डिग्री तक रहता है जबकि गर्मियों में यहां कम सैलानी आते हैं। खासकर अप्रैल, मई के महीनों में यहां पारा २७ डिग्री से लेकर ३५ डिग्री तक रहता है। दिन के समय यह ४० डिग्री भी हो जाता है।
ऐसे पहुंचें –
सातारा शहर पुणे-बंगलुरु राजमार्ग पर स्थित है। यह पुणे से १२० किमी की और मुंबई से २७० किमी की दूरी पर है। मुंबई से सातारा का रास्ता ५ घंटे का है। आप किसी भी सरकारी या निजी बस के द्वारा सातारा जा सकते हैं। सातारा रेल मार्ग द्वारा भी कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। इसी तरह सातारा के लिए सब से नजदीक पुणे हवाई अड्डा है, जो सिर्फ १०७ कि.मी. दूर है। महाराष्ट्र और हिंदुस्थान के कई शहरों से पुणे के लिए कई नियमित और दैनिक उड़ाने हैं इसलिए सातारा होकर मयानी पक्षी अभयारण्य तथा आस-पास स्थित अन्य जगहों पर आसानी से पहुंच सकते हैं।