ममता का अर्थ

बचपन से ही हमें शब्दों के गलत अर्थ समझाए गए, जिसके कारण आज तक हमारी बुद्धि परिपक्व नहीं हो पाई। हमें बचपन से ही ममता का अर्थ समझाया गया प्रेम विश्वास से सनी मां की शुभ भावना! लेकिन बाद में हमने बंगाल में जिस ममता को देखा उसने हमारे रोंगटे खड़े कर दिए। बंगाल जैसी शांत और सुसंस्कृत नगरी में ममता नाम का जो उत्पात और जो भयानक आंधी पिछले कुछ समय से चल रही है उसने ममता शब्द के अर्थ को लेकर हमारे दिमाग के सारे जाले साफ कर दिए हैं। बचपन से ही हमने मां की ममता का जो रूप देखा उस पर अब पूरी तरह से पानी फिर चुका है। पहले ममता शब्द सामने आते ही हमें सिर पर पल्लू रखे ऐसी ममतामयी स्त्री के दर्शन होते थे, जिसके आस-पास उसका प्यारा बालक या तो घुटनों-घुटनों चल रहा होता था या गेंद से खेल रहा होता था और यह ममता मयी स्त्री बहुत ही प्रेमपूर्ण दृष्टि से अपने बालक को निहार रही होती थी। बंगाल की ममता इसके बिल्कुल अलग है। उसके मुखारविंद में जहरीली वाणी और हाथों में भयानक हथियारों का दर्शन होता है। बंगाल की ममता कमल नाम के फूल से विशेष नफरत करती है। हिंदू धर्म से संबंधित किसी भी प्रतीक, नारे और कर्मकांड से भी इस ममता को भारी नफरत है। भगवान श्री राम का नाम तो इसे फूटी आंख नहीं सुहाता। इस नाम का उच्चारण करनेवाले को तो यह सरेराह पिटवा सकती है लुटवा सकती है और जेल में ठुंसवा सकती है। भगवान राम के अलावा माता दुर्गा के प्रति भी इस ममता के मन में वैमनस्य कम नहीं है। वहीं दूसरे धर्मावलंबियों के प्रति इस ममता के मन में उदारता के झरने बहते हैं। ममता का यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब रावण कंस और दुर्योधन की तरह ममता नाम भी प्रतिबंधित हो जाएगा और लोग अपनी संतान का नाम ममता रखने से कतराने लगेंगे। मेरे विचार से सभी पाठ्य्पुस्तकों में और शब्दकोशों में ममता शब्द के अर्थ को बदल देना चाहिए। ममता का अर्थ जिद, क्रूरता, सांप्रदायिक अंधत्व और मारपीट कर देना चाहिए।