मराठा आंदोलनकारियों पर दर्ज केस वापस लो, मुस्लिम, धनगर, लिंगायत समाज को भी दो आरक्षण, शिवसेना की मांग

शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन कल विधान सभा में शिवसेना विधायक दल नेता सुनील प्रभु ने आक्रामक रुख अपनाते हुुए कहा कि मराठा आंदोलनकारियों पर जो मामले दर्ज हैं, उसे तत्काल वापस लेने की घोषणा सदन में की जाए। इसके अलावा मराठा आंदोलन के दौरान आत्महत्या करनेवाले मराठा बंधुओं के परिवारवालों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा सदन में की जाए। ओबीसी मंडल की रिपोर्ट आने के बाद मराठा समाज के आरक्षण देने के बारे में तत्काल सदन में जानकारी दी जाए ताकि ओबीसी समाज में जो यह आशंका है कि ओबीसी समाज का आरक्षण मराठा समाज को दिया जाएगा, इस आशंका को दूर किया जाए। शिवसेना विधायक ने कहा कि ओबीसी आरक्षण को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाए बिना मराठा, मुस्लिम, धनगर, लिंगायत समाज को आरक्षण दिया जाए।
शिवसेना विधायक सुभाष साबले ने कहा कि विरोधी दल सदस्य सूखा प्रभावित किसानों को पचास हजार रुपए प्रति हेक्टेयर और बाग नुकसानवाले किसानों को एक लाख रुपए प्रति हेक्टेयर आर्थिक मदद देने की मांग कर रहे हैं। इस आशय का प्रस्ताव सत्ता पक्ष ने सरकार को पहले ही दे दिया है।
सदन दिन भर के लिए स्थगित
शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन भी हंगामेदार रहा। मराठा, मुस्लिम, धनगर और लिंगायत समाज को आरक्षण की मांग को लेकर दोनों सदनों में विपक्ष ने आक्रामक रुख अपनाया। इस मुद्दे पर सरकार की सफाई से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों के हंगामे के चलते विधानसभा की कार्यवाही चार बार स्थगित करनी पड़ी, वहीं विधानपरिषद की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। मुस्लिम आरक्षण की मांग करते हुए कुछ विधायक अध्यक्ष के आसन के करीब आ गए और राजदंड उठा लिया। हंगामे के दौरान विधानसभा में सरकार ने बिल इत्यादि सरकारी कामकाज पूरा कर लिया। उसके बाद सदन का कामकाज पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।
कल सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विधानसभा में विपक्षी नेता राधाकृष्ण विखे पाटील ने कहा कि मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सरकार की नीयत साफ नहीं है इसीलिए उसने विपक्ष को भरोसे में नहीं लिया। राकांपा नेता अजीत पवार ने कहा कि इस मुद्दे पर हम राजनीति नहीं करना चाहते अगर सरकार को लगता है कि आयोग की सिफारिशें सदन के पटल पर रखने पर वह सार्वजनिक हो जाएगी और उसे अदालत में चुनौती दे दी जाएगी तो विरोधी पक्ष नेता, गटनेताओं के साथ बैठक कर इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया जा सकता है। विरोधी दलों के सदस्यों का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटील ने कहा कि इस मुद्दे पर मैं अजीत पवार की राय से सहमत हूं कि रिपोर्ट पटल पर रखने के बाद इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है लेकिन कुछ लोग चाहते हैं कि मराठा आरक्षण न मिले। मुख्यमंत्री पहले ही साफ कर चुके हैं कि ५२ फीसदी आरक्षण से छेड़छाड़ के बिना मौजूदा आरक्षण दिया जाएगा। पाटील ने कहा कि धनगर समाज को आरक्षण का मुद्दा केंद्र सरकार के आदिवासी आयोग के पास है। हम चाहते हैं कि धनगर समाज को शेड्यूल ट्राइब मानकर आरक्षण दिया जाए। पाटील ने कहा कि मुस्लिम समाज के ओबीसी को मौजूदा नियमों के मुताबिक आरक्षण का लाभ मिल रहा है।
तीन बार उठाया गया राजदंड
मुस्लिम आरक्षण की मांग करते हुए विधायक असलम शेख, अबू हाशिम आजमी, सतीश पाटील, अब्दुल सत्तार, अमीन पटेल, आसिफ शेख, वारिस पठान ने क्रमश: तीन बार राजदंड उठा लिया। राजदंड उठाकर जिस तरह विधायक घूम रहे थे, उससे लगता था कि राजदंड नहीं बल्कि लाठी है। इसके अलावा अध्यक्ष के आसन के सामने कागज फाड़कर और बैनर लहराकर भी विरोध प्रदर्शन किया।