मरीजों की हालत वही की वही मुफ्त टीबी दवाइयां नहीं पहुंच रही मरीजों तक

टीबी मरीजों की हालत वही की वही है। राज्य सरकार द्वारा टीबी के मरीजों को मुफ्त में दी जानेवाली दवाइयां मरीजों तक नहीं पहुंच रही हैं क्योंकि निजी डॉक्टरों द्वारा अपने फायदे के लिए टीबीr के मरीजों के लिए मिलनेवाली दवाइयां नहीं दी जा रही हैं।
बता दें कि टीबीr के मरीजों को कम दाम में इलाज मिल सके इसलिए राज्य सरकार द्वारा अनेक प्रयत्न किए जा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में टीबीr का इलाज मुफ्त में होता है लेकिन मरीज निजी अस्पतालों में अपना इलाज करवाना पसंद करते हैं। निजी अस्पतालों में मरीजों को टीबीr के इलाज के लिए एक महीने में कुल साढ़े ४ हजार रुपए खर्च करने पड़ते हैं और पूरे कोर्स के लिए लगभग ८ से ९ महीने लग जाते हैं। इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा निजी अस्पतालों में मुफ्त में टीबी की दवाइयां महानगरपालिका द्वारा वितरण किया जाने का निर्णय लिया गया था लेकिन निजी अस्पताल के डॉक्टर खुद के फायदे के लिए इन दवाइयों को लेने से साफ-साफ मना कर रहे हैं। ठाणे शहर के क्षयरोग अधिकारी खुशबू तावरी ने बताया कि महंगी दवाइयों के चलते मरीज अपना इलाज बंद करवा रहे थे इसलिए इस योजना को लाया गया था। इस योजना के अंतर्गत डॉक्टरों का शुल्क उन्हें मिलेगा केवल दवाइयों का पैसा मरीजों को नहीं भरना होगा। निजी डॉक्टरों को प्रशासन का साथ देना चाहिए। निजी अस्पताल के डॉक्टरों के साथ बैठक भी की गई थी फिर भी डॉक्टर प्रशासन का साथ नहीं दे रहे हैं।