मस्त-मस्त थर्टी फर्स्ट, एक ग्राम का ‘जश्न’!

मस्त-मस्त थर्टी फर्स्ट के आगमन में अभी वक्त है पर इसकी तैयारी में लोग जुट गए हैं। नए वर्ष को शुरू होने में कुछ ही दिन शेष हैं। नए वर्ष का स्वागत करते समय अब कई युवा तो इसे नशा का माध्यम मानने लगे हैं। युवा पीढ़ी इस समय इस बात में लगी हुई है कि इस बार थर्टी फर्स्ट की पार्टी में किस ड्रग्स का एक ग्राम नशा लें कि उनका थर्टी फर्स्ट इस बार भी मस्त रहे। नशीले थर्टी फर्स्ट की तैयारी में जुटे लोग नशे के सौदागरों से संपर्क कर अभी से नशे की जमाखोरी करने में लगे हैं। ऐसे लोगों पर नकेल कसने के लिए पुलिस विभाग ने भी कमर कस ली है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष विभिन्न प्रकार के कुल ४ ड्रग्स की मांग बढ़ी है, जिनमें एमडी, चरस, गांजा और एफिड्रिन का समावेश है। पुलिस का कहना है कि ये ऐसे ड्रग्स हैं, जिनका केवल १ ग्राम सेवन करने से ही आदमी के होश उड़ जाते हैं। पार्टियों में नशे का तड़का लगानेवाले इन ड्रग्स की मांग को देखते हुए नशे के सौदागर इस बार भी कम समय में अधिक पैसा बनाने के लिए बाजार में सक्रिय हो चुके हैं।
थर्टी फर्स्ट की पार्टियों को केवल ११ दिन ही शेष रह गए हैं। पुलिस के अनुसार हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पार्टियों में चार चांद लगाने के लिए लोग अवैध रूप से नशीले पदार्थों की खेप मंगाने में जुट गए हैं। इनमें से कुछ लोग पुलिस के हाथ भी लगे हैं।
ठाणे नारकोटिक्स पुलिस पिछले कई दिनों से इन तस्करों पर सख्त कार्रवाई कर रही है, जिस वजह से तस्कर अंडरग्राउंड हो चुके थे लेकिन थर्टी फर्स्ट की पार्टी में इनकी बढ़ती मांग को देखते हुए ये तस्कर फिर सक्रिय हो चुके हैं।
ठाणे नारकोटिक्स विभाग के अनुसार अफिड्रिन और एमडी अम्लीय पदार्थों की मांग में ७० से ८० प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जबकि चरस और गांजे की मांग में ४५ से ५० प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। ठाणे नारकोटिक्स के उपायुक्त दीपक देवराज ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी थर्टी फर्स्ट की पार्टियों में नशे का सेवन होना तय है, लेकिन इस वर्ष नारकोटिक्स विभाग द्वारा इन तस्करों को पकड़ने के लिए तीन टीमों का गठन किया गया है, जो निरंतर कॉलेजों तथा थर्टी फर्स्ट की पार्टीवाले परिसर में घूमनेवाले तस्करों पर नजर गड़ाए हुए हैं। ठाणे नारकोटिक्स की इसी सतर्कता के चलते बुधवार को पुलिस ने १५० ग्राम एफिड्रिन पकड़ा है। जिसकी कुल कीमत ६ लाख २२ हजार रुपए बताई जा रही है। ठाणे शहर में एफिड्रिन की इस खेप को बेचने आए आरोपी अंकुश कसबे (२९) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। नारकोटिक्स पुलिस का कहना है कि ड्रग्स खरीदने के लिए बाजार में कोड नेम का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें एमडी को नमक, एफिड्रिन को शक्कर, चरस को काला सोना और गांजे को भोले का प्रसाद कहा जाता है। नारकोटिक्स पुलिस का कहना है कि एफिड्रिन और एमडी की एक लाइन सूंघने के लिए ५,००० से ७,००० रुपए अदा करने पड़ते हैं, वहीं एक तोला चरस के लिए कुल ५,००० रुपए तक अदा करने पड़ते हैं, जबकि गांजा के एक पैकेट के लिए १२० से २५० रुपए तक चुकाने पड़ते हैं।