" /> ‘महाराज’ सिंधिया को कैसे पचा पाएंगे शिवराज?

‘महाराज’ सिंधिया को कैसे पचा पाएंगे शिवराज?

अभी राह में कई मोड़ हैं, कोई आएगा कोई जाएगा…तुम्हें जिसने दिल से भुला दिया, उसे भूलने की दुआ करो। मशहूर शायर बशीर बद्र की इस नज्म की तरह अब कांग्रेस और ज्योतिरादित्य सिंधिया एक-दूसरे को भुलाने में जुटे हैं। सियासत की इस राह में सिंधिया ने भाजपा के रूप में नया मोड़ चुना है। सिंधिया की भाजपा में एंट्री से शिवराज सिंह चौहान पर क्या असर पड़ेगा? और हाथ का साथ छोड़ चुके सिंधिया और शिवराज के बीच क्या केमिस्ट्री रही है?
‘जब तक वहां थे तब तक महाराजा थे और आज माफिया हो गए। ये दोहरे मापदंड कांग्रेस को शोभा नहीं देते।’ ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद भाजपा नेता और एमपी के तीन बार के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने यह प्रतिक्रिया दी थी। भाजपा के पास सिंधिया की बगावत को भुनाने का बेहतरीन मौका आया तो शिवराज ने कांग्रेस पर चुटकी लेने में देर नहीं लगाई। २१ जनवरी, २०१९ की रात एक मुलाकात ने एमपी की सियासत में हड़कंप मचा दिया था। यह मुलाकात ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज सिंह चौहान के बीच हुई थी। बंद कमरे के अंदर दोनों नेताओं के बीच ४० मिनट तक चर्चा हुई। यही नहीं दोनों साथ-साथ बाहर निकले और कहा कि बातचीत अच्छी रही। शिवराज और ज्योतिरादित्य ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया। हालांकि दो दिग्गज राजनेता जब बंद कमरे के अंदर बात करें तो शायद ही कोई माने कि सियासी चर्चा नहीं हुई होगी। इस मुलाकात के १३ महीने बीत चुके हैं। शिवराज और ज्योतिरादित्य एमपी की सियासत के दो बड़े चेहरे हैं। अब सिंधिया की भाजपा में एंट्री को क्या शिवराज पचा पाएंगे? सियासी हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है। अतीत पर निगाह दौड़ाएं तो मार्च २०१७ में एक चुनावी रैली के दौरान तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सिंधिया राजघराने पर हमला बोला था। भिंड के अटेर में चुनावी सभा करते हुए उन्होंने अंग्रेजों से मिले होने और लोगों पर जुल्म ढाने की बात कही। शिवराज ने कहा था कि १८५७ के स्वतंत्रता संग्राम में असफल होने के बाद अंग्रेजों और अंग्रेजों के साथ-साथ सिंधिया ने बड़े जुल्म ढाए थे। सियासी तौर पर सिंधिया परिवार का एमपी में अच्छा-खासा असर है। इस बयान के बाद शिवराज का उन्हीं की पार्टी की नेता और सिंधिया राजघराने से आनेवालीं यशोधरा राजे ने खुलकर विरोध किया था। २०१८ में जब एमपी में विधानसभा चुनाव हुए तो माफ करो ‘महाराज’, हमारा नेता शिवराज स्लोगन काफी चर्चा में रहा। वैंâपेन के सहारे भाजपा ने सीधे सिंधिया पर हमला बोला था, वहीं सिंधिया ने भी चुनावी रैलियों में मंदसौर फायरिंग का जिक्र करते हुए कहा कि शिवराज सरकार के हाथ किसानों के खून से रंगे हैं। पूरा चुनाव सिंधिया और शिवराज के इर्द-गिर्द लड़ा गया लेकिन नतीजों के बाद दोनों नेता सूबे की सियासत में नेपथ्य पर थे। जहां एक ओर शिवराज को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का ओहदा मिल गया, वहीं सिंधिया को वेस्ट यूपी प्रभारी बना दिया गया।