" /> महाराष्ट्र आगे ही बढ़ेगा!, संकट की बात लेकर क्या बैठे हो?

महाराष्ट्र आगे ही बढ़ेगा!, संकट की बात लेकर क्या बैठे हो?

महाराष्ट्र का हीरक महोत्सव बड़े पैमाने पर भव्य तरीके से मनाया जा सकता था लेकिन महाराष्ट्र दिन विपरीत परिस्थितियों के दौरान आया है। आज महाराष्ट्र में शिवसेना का मुख्यमंत्री विराजमान है और वे उद्धव ठाकरे हैं। उस आनंद के साथ ही आज के महाराष्ट्र दिन का आनंद अपने चरम पर होता। सरकारी समारोह एक तरफ लेकिन राज्य की ११ करोड़ की जनता ने ही इस महाराष्ट्र दिन को एक अलग तरह से मनाया होता। उद्धव ठाकरे ने शिवतीर्थ पर २८ नवंबर २०१९ को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। वो उत्साह, शिवतीर्थ पर और राज्य भर में उठी आनंद की लहरों का जिन लोगों ने अनुभव लिया, वे समझ सकते हैं कि हम क्या कहना चाहते हैं। महाराष्ट्र दिन का ६० वां सूर्योदय ऐसे समय हुआ है जब महाराष्ट्र सहित पूरा देश कोरोना से लड़ रहा है। सूर्य हमेशा की तरह प्रकाशमान और तेजस्वी है लेकिन जनता सरकारी आदेश के कारण तालाबंद होकर बैठी है। आखिरकार महाराष्ट्र की तेजस्वी लड़ाई की स्मृतियां अमर ही रहेंगी! मराठी जनता ने शिवराय की जय जयकार ने मुंबई सहित महाराष्ट्र की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। १०५ लोगों का बलिदान देकर दिल्ली के तख्त को झुकाकर संयुक्त महाराष्ट्र हासिल किया गया। उस महाराष्ट्र का हीरक महोत्सव उसी अंदाज में मनाया गया होता लेकिन जिस महाराष्ट्र ने मोरारजी की अंधाधुंध गोलीबारी की परवाह नहीं की, वह महाराष्ट्र आज एक विषाणु से युद्धरत है। हालांकि ऐसे कई विषाणु महाराष्ट्र से दो-चार हुए लेकिन आखिरकार समाप्त हो गए। राज्य स्थापना से लेकर आज तक महाराष्ट्र की लगातार प्रगति ही हुई है। अब ऐसा विचार करने का समय आ गया है कि क्या इस प्रगति रथ को कोरोना संकट के कारण ब्रेक लग जाएगा? महाराष्ट्र लड़ाकू है और वह इस संकट का सामना करके उसे मात देगा। यह लड़ाई महाराष्ट्र के दुश्मनों को दिखाई जा सकती है लेकिन यह लड़ाई फिलहाल राज्य की अस्मिता, उद्योग-धंधों और रोजगार बचाने की लड़ाई है। गत डेढ़ महीने से राज्य में तालाबंदी है। उद्योग-व्यापार ठप हैं और अब तक तीन लाख करोड़ का नुकसान हो चुका है। यह नुकसान राज्य की प्रगति में बाधक है। विजय के उन्माद की बात कहकर और राजनीतिक उठापटक करके यह संकट दूर नहीं होगा। आखिरकार ‘महाराष्ट्र धर्म’ नामक मंत्र कोई जादू टोना या अंधश्रद्धा नहीं। यह मंत्र मराठी जनों के पसीने और श्रम से बना है। महाराष्ट्र का अभ्युदय इसी मंत्र से हुआ है। समृद्ध कृषि, अच्छे कारखाने और तेजी से बढ़ता उद्योग, व्यापार की जीवंत ऊर्जा, गरीबी और बेरोजगारी से मुक्ति सुखी जीवन के कुछ दृश्य पहलू हैं। इसका उपयोग आमतौर पर किसी व्यक्ति, समाज या राष्ट्र की ऊर्जा को मापने के लिए किया जाता है। यही कर्तव्य की कीमत है। फिर संस्कृति भी एक रूप है। महाराष्ट्र धर्म ही संस्कृति है और यह महाराष्ट्र के अंतःकरण और नैतिकता में निहित है। महाराष्ट्र का दैनिक जीवन उसी सांस्कृतिक अच्छाई से भरा हुआ है और यही महाराष्ट्र धर्म बन गया है। उस महाराष्ट्र धर्म का भगवा ध्वज महाराष्ट्र के मंत्रालय पर भले ही लहरा रहा हो, लेकिन इस दौरान कोरोना संकट की वेदना भी स्पष्ट दिख रही है। गत ६० सालों में महाराष्ट्र को कई नेताओं के विचारों ने ढाला है। इस अवधि के दौरान महाराष्ट्र पर क्या कम हमले हुए? इन सभी घावों के बावजूद महाराष्ट्र नए सिरे से लड़ना जारी रखेगा। महाराष्ट्र को अब एक नई छलांग लगानी होगी। नए संकट के कारण होने वाली मुसीबतों को दूर करने की नई आशा के साथ खड़ा होना होगा। महाराष्ट्र की असली ताकत उद्योग और इसमें काम करने वाले करोड़ों लोगों के हाथ हैं। आज वे मशीनें बंद हैं और हाथ खाली हैं। इन्हें पुनर्जीवित करना होगा। महाराष्ट्र का मर्द आज भी राष्ट्र की रक्षा के लिए सीना ताने खड़ा है। राज्य के हीरक महोत्सव समारोह के दौरान देश के सेनाप्रमुख पद पर एक मराठी माणूस विराजमान है, यही महाराष्ट्र धर्म की विशेषता है। गत ६० वर्षों में हजारों मराठी जवान देश की रक्षा के दौरान बलिदान हुए। इस महाराष्ट्र धर्म की तुलना किसी भी प्रकार से नहीं की जा सकती। हिमालय की रक्षा करना महाराष्ट्र की पीढ़ीगत जिम्मेदारी है। ऐसे संकट के समय में प्रांतवाद को समाप्त कर राष्ट्रवाद की नीति अपनाना महाराष्ट्र का संस्कार है। कोरोना के संकट काल में भी जाति, धर्म, पंथ आदि का विचार न करते हुए उनके भोजन-पानी की व्यवस्था करनेवाला और उन्हें अपनेपन से संभालने वाला ही महाराष्ट्र धर्म है। महाराष्ट्र ने खुद अपना रास्ता तैयार किया है। आज भी ज्ञान और विज्ञान के मामले में महाराष्ट्र दो कदम आगे ही है। कोरोना से दो-दो हाथ करते हुए उस पर मात करने वाला ‘टीका’ बना तो वो भी महाराष्ट्र में ही बनेगा! इसका हमें पूरा विश्वास है। पुणे की ‘सिरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया’ नामक संस्था इस दिशा में काम कर रही है। कोरोना संकट के दौरान महाराष्ट्र ने देश के लिए जो कुछ करना चाहिए, वह सब कुछ किया। स्वदेशी किट निर्माण करके नए-नए प्रयोग करते हुए देश को संकटमुक्त करने का उद्देश्य रखनेवाला महाराष्ट्र राज्य ही है। हिमालय जब संकट में होता है, उस समय मराठी जवान लड़ रहे होते हैं। उसी तरह मराठी वैज्ञानिक, डॉक्टर और पुलिस भी हिमालय की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं। महाराष्ट्र धर्म उन जगहों पर सन्निहित है जहां मानवता जिज्ञासा, अज्ञानता, कट्टरता और घृणा पर काबू पाकर उभरता है। यह ‘महाराष्ट्र धर्म’ बढ़ता रहेगा। महाराष्ट्रीयन आचार-विचारों का मानदंड हिंदुस्थान में प्रस्थापित होगा।। देश पर आया संकट शिवराय का महाराष्ट्र दूर करेगा। हीरक महोत्सव के दौरान महाराष्ट्र कोरोना संकट को मात देकर हिमालय को दिशा दिखाए बिना नहीं रहेगा।